नवरात्र में लोक संस्कृति को बढ़ावा और डीजे पर प्रतिबंध की मांग: जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कुंवार नवरात्र के पावन अवसर पर स्थानीय लोक संस्कृति और पारंपरिक आयोजनों को संरक्षण एवं प्रोत्साहन देने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने एक औपचारिक ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर कलेक्टर को यह ज्ञापन सौंपकर नवरात्र उत्सव के दौरान देवी पंडालों और अन्य सार्वजनिक आयोजन स्थलों पर सांस्कृतिक अनुशासन बनाए रखने की अपील की है। विशेष रूप से, संगठन ने गरबा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के नाम पर होने वाली फूहड़ता और हुड़दंगबाजी पर तत्काल प्रभावी रोक लगाने की मांग प्रशासन से की है।
ज्ञापन में मुख्य रूप से इस बात पर बल दिया गया है कि नवरात्र का पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे में उत्सव की मर्यादा को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का स्पष्ट मत है कि वर्तमान में कई स्थानों पर पारंपरिक सुवा-नृत्य और लोकगीतों की उपेक्षा करके आधुनिक और असंबंधित संगीत को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय कला रूपों का ह्रास हो रहा है। संगठन ने मांग की है कि प्रशासन ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करे जहाँ छत्तीसगढ़िया लोक परंपराओं, जैसे सुवा-नृत्य, कर्मा नृत्य और पारंपरिक भजन-कीर्तन, को केंद्र स्थान दिया जाए। इससे न केवल सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ, ज्ञापन में ध्वनि प्रदूषण और लाउड डीजे के अनियमित उपयोग को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि नवरात्र के दौरान कई पंडालों और खुले मैदानों में डीजे सिस्टम का उपयोग निर्धारित मानकों और समय सीमाओं का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा है। इससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँचती है, बल्कि आसपास के निवासियों, वृद्धों, छात्रों और मरीजों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले आयोजकों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।
पार्टी ने अपने ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया है कि ‘गरबा’ गुजरात की एक विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा है, जिसका अपना अलग महत्व और अनुशासन है। हालाँकि, छत्तीसगढ़ में अक्सर गरबा के नाम पर ऐसे आयोजन देखे जाते हैं जो न तो पारंपरिक गरबा हैं और न ही छत्तीसगढ़ की किसी लोक परंपरा का हिस्सा। इन आयोजनों में अश्लील गीतों और अमर्यादित व्यवहार की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध गरबा या किसी अन्य संस्कृति से नहीं है, बल्कि उस विकृति से है जो धर्म और संस्कृति की ओट में फैलाई जा रही है। संगठन का मानना है कि यदि छत्तीसगढ़ में नवरात्र मनाया जा रहा है, तो उसका स्वरूप स्थानीय परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान पार्टी प्रतिनिधियों ने कलेक्टर से यह भी आग्रह किया कि नवरात्र उत्सव के लिए जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों में सांस्कृतिक अनुपालन को एक अनिवार्य शर्त के रूप में शामिल किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि पंडाल आयोजकों से पूर्व में ही यह लिखित सहमति ली जानी चाहिए कि वे स्थानीय लोक कलाकारों को मंच प्रदान करेंगे और ध्वनि सीमाओं का पालन करेंगे। इसके अलावा, उत्सव के दौरान नियमित निरीक्षण टीमों की तैनाती की मांग भी की गई है ताकि शिकायतों का त्वरित निवारण हो सके। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा इन मांगों पर उचित संज्ञान नहीं लिया गया, तो वे जनहित में व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
यह मांग ऐसे समय में उठी है जब राज्य भर में नवरात्र की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और हजारों पंडालों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। स्थानीय नागरिकों और सांस्कृतिक संगठनों की ओर से भी पिछले कुछ वर्षों में उत्सवों के व्यवसायीकरण और सांस्कृतिक विचलन को लेकर असंतोष व्यक्त किया जाता रहा है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का यह कदम इसी जनभावना को प्रशासनिक स्तर पर मुखर करने का एक प्रयास है। कलेक्टर कार्यालय ने ज्ञापन प्राप्त करने की पुष्टि की है और इसे संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित करने का आश्वासन दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन नवरात्र की शुचिता और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को बनाए रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

