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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:45 PM IST
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ओडिशा: जाजपुर में BJD नेता प्रनब बलबंतराय पर सशस्त्र भीड़ द्वारा हमले का आरोप, पुलिस की मौजूदगी में तीन वाहनों में तोड़फोड़

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भुवनेश्वर। ओडिशा के जाजपुर जिले में राजनीतिक हिंसा की एक ताजा घटना सामने आई है, जिसमें बीजू जनता दल (बीजेडी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक प्रनब बलबंतराय ने अपनी जनसंपर्क पदयात्रा के दौरान सशस्त्र भीड़ द्वारा किए गए कथित हमले का गंभीर आरोप लगाया है। बलबंतराय ने दावा किया है कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था और सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह घटना पुलिस बल की मौजूदगी में हुई, बावजूद इसके सुरक्षाकर्मी हमलावरों को रोकने में विफल रहे। इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

बीजेडी नेता प्रनब बलबंतराय ने मीडिया को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया कि वे जाजपुर जिले में अपने निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत एक नियमित जनसंपर्क पदयात्रा निकाल रहे थे। इस पदयात्रा का उद्देश्य आम जनता से संवाद स्थापित करना और उनके मुद्दों को समझना था। हालांकि, पदयात्रा के दौरान अचानक एक सशस्त्र भीड़ ने उन पर और उनके साथ मौजूद समर्थकों पर हमला कर दिया। बलबंतराय ने बताया कि हमलावर हथियारों से लैस थे और उन्होंने बिना किसी उकसावे के पार्टी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया। इस हमले में जान-माल के नुकसान की आशंका के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

हमले के परिणामस्वरूप बीजेडी के काफिले में शामिल तीन वाहनों में भारी तोड़फोड़ की गई। बलबंतराय ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने न केवल व्यक्तिगत रूप से उन्हें और उनके समर्थकों को धमकाया, बल्कि संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। क्षतिग्रस्त हुए वाहनों में पार्टी के झंडे और अन्य सामग्री भी शामिल थी। बीजेडी नेता ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास बताया और कहा कि जनसंपर्क अभियान किसी भी राजनीतिक दल का वैध अधिकार है, जिसका इस प्रकार से विरोध किया जाना अस्वीकार्य है।

इस घटना का सबसे विवादास्पद पहलू पुलिस की भूमिका को लेकर है। प्रनब बलबंतराय ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जब सशस्त्र भीड़ द्वारा हमला किया जा रहा था, उस समय पुलिस के जवान मौके पर मौजूद थे। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद लोगों के जमावड़े और हमले की योजना की भनक प्रशासन को पहले से क्यों नहीं लगी। साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि हमले के दौरान पुलिस ने सक्रिय कार्रवाई क्यों नहीं की और हमलावरों को खदेड़ने या गिरफ्तार करने के बजाय मूकदर्शक क्यों बनी रही। बीजेडी नेता ने इसे प्रशासनिक निष्क्रियता और पक्षपातपूर्ण रवैया करार देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

जाजपुर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से अभी तक इस विशिष्ट आरोप पर कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। हालांकि, ऐसी घटनाओं के बाद सामान्यतः पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच शुरू करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यदि बलबंतराय के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह जिले में खुफिया तंत्र की विफलता और कानून व्यवस्था की स्थिति पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न होगा। विपक्षी दलों द्वारा अक्सर ओडिशा में शासक दल पर राजनीतिक विरोधियों को दबाने का आरोप लगाया जाता रहा है, और यह ताजा घटना उसी श्रृंखला में एक नया अध्याय जोड़ती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओडिशा में आगामी चुनावी तैयारियों और सत्ता संघर्ष के बीच इस प्रकार की हिंसात्मक घटनाएं बढ़ सकती हैं। जनसंपर्क पदयात्राएं राजनीतिक दलों के लिए जमीनी स्तर पर अपनी ताकत दिखाने और मतदाताओं को रिझाने का प्रमुख माध्यम हैं। ऐसे में इन अभियानों पर हमले न केवल संबंधित दल के मनोबल को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम मतदाताओं में भी असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। बीजेडी के लिए यह घटना विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि पार्टी वर्तमान में विपक्ष की भूमिका में है और उसे अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

प्रनब बलबंतराय ने स्पष्ट किया है कि वे इस हमले से डरकर अपने जनसंपर्क अभियान को नहीं रोकेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में डर का कोई स्थान नहीं है और वे जनता के बीच जाना जारी रखेंगे। हालांकि, उन्होंने राज्य सरकार और चुनाव आयोग से मांग की है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो बीजेडी सड़क से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे को उठाएगी और न्याय के लिए संघर्ष करेगी।

इस घटना ने एक बार फिर ओडिशा की राजनीति में हिंसा और असहिष्णुता के मुद्दे को सामने ला दिया है। पुलिस की मौजूदगी में हुई इस कथित वारदात ने प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना यह होगा कि जाजपुर पुलिस और राज्य प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या पीड़ित पक्ष को न्याय मिल पाता है। फिलहाल, इस घटना ने जिले में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इसके प्रतिघात देखे जा सकते हैं। समाचार एजेंसियों और स्थानीय मीडिया से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर यह पुष्टि होती है कि घटना जाजपुर जिले में ही हुई है और इसमें बीजेडी नेता के वाहनों को नुकसान पहुंचा है।