दिल्ली/रांची: देश की पुलिस व्यवस्था को अधिक आधुनिक, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा कदम उठाया है। पीएम मोदी ने बीते वर्षों में हुई DG-IG कॉन्फ्रेंस की अहम सिफारिशों की ग्राउंड रिपोर्ट मांगी है। कई सुझाव वर्षों से फाइलों में अटके पड़े थे—अब इनकी प्रभावशीलता की वास्तविक समीक्षा शुरू हो गई है।प्रधानमंत्री ने साफ संदेश दिया है कि “सिफारिशें कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए।” इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों से लेकर राज्यों की पुलिस मशीनरी तक हलचल तेज हो गई है।
झारखंड पुलिस सक्रिय — जिलों से त्वरित रिपोर्ट तलबपीएम के निर्देश के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को विस्तृत रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। जिलों से पूछा गया है—किन सिफारिशों पर अब तक कितनी प्रगति हुई?कौन-सी योजनाएं लंबित हैं?किन क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई की जरूरत है?विशेषकर जिन बिंदुओं पर फोकस बढ़ाया गया है, उनमें शामिल हैं—
त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली (QRT) को मजबूत करनाथानों में डिजिटल मॉनिटरिंग डैशबोर्ड बनानामहिला सुरक्षा के लिए विशेष मॉड्यूल लागू करनासाइबर अपराध नियंत्रण में तकनीकी दक्षता बढ़ानाजनप्रतिनिधियों का अद्यतन डेटा तैयार करनापुलिसकर्मियों का टेक्नोलॉजी और फॉरेंसिक आधारित प्रशिक्षण
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ये सुधार जमीन पर उतरे, तो झारखंड में कानून-व्यवस्था की गति और क्षमता दोनों बढ़ेंगी। अपराध नियंत्रण अधिक डेटा-ड्रिवन होगा और पुलिसिंग में पारदर्शिता के नए मानक स्थापित होंगे।















