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- Silent Authentication: OTP Free Payments Coming; Transactions Blocked If SIM Device Mismatch
नई दिल्ली10 मिनट पहले
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देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ तकनीक पर काम कर रही हैं। इससे ऑनलाइन पैमेंट करने पर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की जरूरत खत्म हो जाएगी। यह सिस्टम बैकग्राउंड में ही चेक कर लेगा कि बैंक एप में रजिस्टर्ड नंबर और फोन का सिम कार्ड मैच कर रहे हैं या नहीं।
अगर सिम और नंबर मैच नहीं हुए, तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक हो जाएगा। खास बात यह है कि इसमें यूजर को कुछ भी करने की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक ई-सिम (eSIM) पर भी काम करेगी। इससे सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे फ्रॉड रुकेंगे। यह जानकारी एक्सिस बैंक के डिजिटल बिजनेस हेड समीर शेट्टी ने दी।

ऑनलाइन फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी
शेट्टी ने बताया, ‘हम टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर साइलेंट ऑथेंटिकेशन के कई पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति एप में लॉग-इन है, लेकिन उसका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नंबर से मैच नहीं करता, तो टेलीकॉम नेटवर्क हमें इसका सिग्नल दे देगा। इससे हम बिना ग्राहक को परेशान किए संभावित फ्रॉड का पता लगा सकेंगे।’
बैकग्राउंड में काम करेगा सिस्टम
PWC इंडिया के साइबर लीडर सुंदरेश्वर कृष्णमूर्ति के मुताबिक, अब तक सुरक्षा की परतें ऐसी थीं, जिन्हें आसानी से हैक किया जा सकता था। अब बैंक और टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क के मुख्य हिस्से में ही वेरिफिकेशन को शिफ्ट कर रही हैं।
यह सिस्टम बैकग्राउंड में काम करेगा, जिसे यूजर या हैकर नहीं देख सकेंगे। सुरक्षा को पक्का करने के लिए इसमें फेस ID और एप के अंदर ही कोड (OTP) जनरेट होने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं।

RBI के नए नियम: टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियमों के तहत अब देश में सभी डिजिटल लेन-देन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है।
इसमें पासवर्ड या पिन (जो आपको याद हो), OTP या एप कोड (जो आपके फोन में हो) और बायोमेट्रिक्स (जैसे चेहरा या अंगूठा) शामिल हैं।
हालांकि SMS वाले OTP को बंद नहीं किया गया है, लेकिन बैंकों को अब फिंगरप्रिंट और डिवाइस की अपनी सुरक्षा जैसे आधुनिक तरीके इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है।
वॉट्सएप पर भी मिल सकते हैं OTP
नए नियमों के बाद अब बैंक OTP भेजने के लिए वॉट्सएप जैसे थर्ड-पार्टी एप्स का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। अनुमान है कि हर महीने करीब 1000 करोड़ ट्रांजैक्शनल मैसेज भेजे जाते हैं।
क्लाउड कम्युनिकेशन कंपनी सिंच के MD नितिन सिंघल ने कहा कि इस बदलाव से ग्राहकों का अनुभव बेहतर होगा और ट्रांजैक्शन फेल होने की दर भी कम होगी।
ब्रांड्स के लिए भी यह फायदेमंद होगा, क्योंकि चेकआउट प्रक्रिया आसान होने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल एडॉप्शन तेज होगा।
















