एबटाबाद स्थित गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा को बेच दिया गया है। अब इस गुरुद्वारे की हालत जर्जर है।
पाकिस्तान में सिखों व हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के एबटाबाद शहर से गुरुद्वारा साहिब की इमारत गिराने और जमीन बेचने का मामला सामने आया है।
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खालसा वोक्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एबटाबाद में ऐतिहासिक गुरुद्वारे को इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के एक अधिकारी ने एक करोड़ पाकिस्तानी रुपए की रिश्वत लेकर बेच दिया है। यही नहीं, अधिकारी ने गुरुद्वारा साहिब को गिराने की अनुमति भी दे दी। अब इसका खरीदार यहां अपनी पत्नियों के लिए बुटीक बनवा रहा है।
बता दें कि पाकिस्तान में ETPB अल्पसंख्यक समुदायों के गुरुद्वारों, मंदिरों और अन्य पूजा स्थलों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार संस्था है। पाकिस्तान में जितने भी अल्पसंख्यक समुदाय हैं, उनके धार्मिक स्थलों की देखरेख करने के लिए इस बोर्ड का गठन किया गया था।

पाकिस्तान के एबटाबाद में गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा की इमारत। – फाइल फोटो
गुरुद्वारा साहिब को बुटीक बनाने की अनुमति दी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अटोक जिले के हसन अब्दाल स्थित ETPB प्रशासक ने सिख शासन के दौरान बने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, एबटाबाद का कब्जा वाहिद बाला नाम के एक स्थानीय निवासी को सौंप दिया। अधिकारी ने कथित तौर पर गुरुद्वारे को गिराने और उसके स्थान पर कपड़ों का बुटीक बनाने की अनुमति भी दे दी।
जमीन खरीदार ने दो पत्नियों के नाम करवाई
गुरुद्वारा सिंह सभा की जमीन खरीदने वाले का नाम वाहिद बाला बताया जा रहा है, जिसने यह जमीन अपनी दो पत्नियों रिदा जादून और आयशा वाहिद के नाम पर करवा दी है। अब वे जल्दी ही यहां पर अपना बुटीक खोलने वाली हैं।
सिखों ने ETPB अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग रखी
पाकिस्तान में रहने वाले सिखों ने गुरुद्वारा साहिब को बेचने और उसे गिराने की अनुमति देने वाले ETPB अधिकारी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने गुरुद्वारा साहिब की इमारत को बचाने की मांग भी सरकार से की है।

पाकिस्तान में जिस गली में गुरुद्वारा है, उसे आज भी गुरुद्वारे वाली गली के नाम से जाना जाता है।
किराया लिया फिर भी नहीं की मरम्मत
पाकिस्तान में रहने वाले सिखों का कहना है कि ETPB ने गुरुद्वारा परिसर में बनी दुकानों का किराया सालों से वसूला, लेकिन गुरुद्वारा साहिब की मरम्मत नहीं की गई। आज भी एबटाबाद में उस मार्केट का नाम गुरुद्वारा मार्केट और गुरुद्वारा गली है।
गुरुद्वारा साहिब के गेट पर गुरुमुखी में लिखा
एबटाबाद के जिस गुरुद्वारा साहिब को बेचने का दावा किया गया है, उसके मुख्य प्रवेश द्वार पर आज भी गुरुमुखी में ‘गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा’ अंकित है, और दीवान हॉल के बाहर ‘सचखंडि वसै निरंकार’ शब्द स्पष्ट रूप से लिखे गए हैं। इसके बावजूद, संपत्ति अब कथित तौर पर उस व्यक्ति के नियंत्रण में आ गई है जिसने इसे खरीदा है।
गुरुद्वारे के अंदर के 2 PHOTOS…

गुरुद्वारा साहिब के अंदर का हाल। यह इमारत जर्जर हो चुकी है। – फाइल फोटो

गुरुद्वारे के अंदर तोड़फोड़ कर दी गई है।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा एबटाबाद का यह है इतिहास…
- 19वीं सदी में निर्माण हुआ: रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह गुरुद्वारा 19वीं सदी में बनाया गया था, जब हजारा एबटाबाद क्षेत्र सिख शासन के अधीन था। इससे अनुमान लगाया जाता है कि यह गुरुद्वारा साहिब 1818 से 1849 के बीच में बनाया गया था। इसे महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल में बने सिख धार्मिक स्थलों में शामिल बताया गया है।
- सिख शासनकाल की ऐतिहासिक विरासत: हजारा एबटाबाद क्षेत्र में महाराजा रणजीत सिंह का सैन्य स्थल भी माना जाता था। सिख प्रशासन और सेना की मौजूदगी के कारण यह गुरुद्वारा स्थानीय सिख आबादी का प्रमुख धार्मिक केंद्र था। इसलिए, इसे सिख साम्राज्य काल की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखा जाता है।
- हिंदुओं व सिखों के धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध: एबटाबाद में सिख और हिंदू बड़ी संख्या में रहते थे। श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा साहिब के साथ ही एक मंदिर भी है। ऐसे में एबटाबाद का यह क्षेत्र सिखों व हिंदुओं के प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में माना जाता था।
- आजादी के बाद वीरान हुआ गुरुद्वारा साहिब: आजादी के बाद इस क्षेत्र से हिंदुओं और सिखों का पलायन हो गया। सिख आबादी न रहने के कारण यहां धार्मिक गतिविधियां बंद हो गईं। 1976 के बाद तो गुरुद्वारा साहिब की इमारत खंडहर में तब्दील होने लगी।
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