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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:47 PM IST
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पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर लॉन्ग मार्च: खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद तक हजारों समर्थक निकले, पीटीआई ने दो हजार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का किया दावा

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पाकिस्तान की राजनीति रविवार को एक बार फिर बेहद गरमा गई। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनके समर्थकों ने एक बड़ा लॉन्ग मार्च निकाला है। यह मार्च खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मारवत जिले से शुरू होकर देश की राजधानी इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा है। इस लॉन्ग मार्च में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए हैं, जिससे पूरे देश में सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मार्च को देखते हुए राजधानी इस्लामाबाद में संसद भवन और प्रमुख हाईवे को सील कर दिया है, ताकि प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील इलाकों तक पहुंचने से रोका जा सके।

खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मारवत से शुरू हुआ यह लॉन्ग मार्च इमरान खान के समर्थकों के लिए उनकी आवाज बुलंद करने का एक प्रमुख जरिया बन गया है। पीटीआई के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे इमरान खान की रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए इस्लामाबाद की ओर कूच करें। इस अपील पर हजारों समर्थकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मार्च में शामिल लोगों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं और जब तक इमरान खान को रिहा नहीं किया जाता, उनका यह प्रदर्शन जारी रहेगा। लक्की मारवत से इस्लामाबाद तक का यह सफर काफी लंबा है, लेकिन समर्थकों का उत्साह और जुनून इसे एक ऐतिहासिक राजनीतिक आयोजन का रूप दे रहा है।

इस विशाल मार्च के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से भी कड़ी कार्रवाई की गई है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की ओर से दावा किया गया है कि इस लॉन्ग मार्च के दौरान लगभग दो हजार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। पार्टी का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर उनके कार्यकर्ताओं को डरा-धमकाकर रोकने की कोशिश कर रहा है और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की जा रही हैं। हालांकि, सरकारी अधिकारियों या पुलिस की ओर से गिरफ्तारियों की इस संख्या पर कोई आधिकारिक पुष्टि या स्पष्टीकरण अभी तक सामने नहीं आया है। पीटीआई के इस दावे ने पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।

प्रदर्शनकारियों के इस्लामाबाद पहुंचने की आशंका के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संसद भवन के आसपास के इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। इसके अलावा, इस्लामाबाद में प्रवेश करने वाले प्रमुख हाईवे और सड़कों पर भी बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा बलों को विभिन्न चौराहों और नाकों पर तैनात किया गया है ताकि मार्च में शामिल लोगों को शहर के संवेदनशील हिस्सों में प्रवेश करने से रोका जा सके। प्रशासन का मानना है कि कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

इमरान खान की गिरफ्तारी और उनकी रिहाई की मांग पाकिस्तान की वर्तमान राजनीति का सबसे केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले काफी समय से विभिन्न मामलों में न्यायिक हिरासत और जेल की सजा काट रहे हैं। उनकी पार्टी पीटीआई लगातार यह आरोप लगाती रही है कि इमरान खान के खिलाफ दर्ज मामले राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें जानबूझकर राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रखने के लिए जेल में रखा गया है। इसी मांग को लेकर समय-समय पर पीटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाते रहे हैं, लेकिन लक्की मारवत से इस्लामाबाद तक का यह लॉन्ग मार्च हाल के दिनों में किया गया सबसे बड़ा और संगठित प्रयास माना जा रहा है।

इस लॉन्ग मार्च ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल के हजारों समर्थकों के गुस्से और जनभावनाओं का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मार्च इस्लामाबाद की सीमाओं तक पहुंचता है, तो सरकार और पीटीआई के बीच टकराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से कोई समझौते की बात सामने नहीं आई है।

रविवार को शुरू हुए इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान के पूरे राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। सोशल मीडिया पर भी इस लॉन्ग मार्च की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें हजारों की भीड़ को सड़कों पर चलते हुए देखा जा सकता है। वहीं, दूसरी ओर गिरफ्तारियों और रास्तों को सील करने की खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं। पाकिस्तान की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह लॉन्ग मार्च किस मोड़ पर पहुंचता है और क्या इमरान खान की रिहाई को लेकर सरकार पर कोई दबाव बन पाता है या नहीं। फिलहाल, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।