पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर समर्थकों का लॉन्ग मार्च तेज, पेशावर से 30 किलोमीटर दूर पहुंचे प्रदर्शनकारी; PM शहबाज शरीफ के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकराया

इस्लामाबाद/पेशावर। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान की रिहाई को लेकर राजनीतिक उथल-पुथल लगातार गहराती जा रही है। इमरान खान के समर्थकों ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर जो लॉन्ग मार्च निकाला है, वह अब अपने निर्धारित गंतव्य के बेहद करीब पहुंच चुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह लॉन्ग मार्च अब पेशावर शहर से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर पहुंच गया है। हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे समर्थकों के इस आंदोलन ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है।
इस बढ़ते राजनीतिक दबाव और बिगड़ते हालात को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विपक्षी गुट की ओर से हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इमरान खान के समर्थकों और पीटीआई नेतृत्व के समक्ष बातचीत का एक औपचारिक प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सरकार की तरफ से बातचीत के लिए एक स्पष्ट शर्त रखी गई थी। प्रधानमंत्री शरीफ ने यह न्योता इस शर्त पर दिया था कि यदि इमरान खान के समर्थक अपना धरना खत्म करते हैं और लॉन्ग मार्च को वापस लेते हैं, तो सरकार उनके साथ वार्ता की मेज पर बैठने को तैयार है। सरकार का मानना था कि सड़कों पर चल रहा यह प्रदर्शन देश की कानून व्यवस्था और आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है, इसलिए पहले धरना समाप्त होना चाहिए, उसके बाद ही किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा संभव हो सकती है।
लेकिन, इमरान खान के समर्थकों ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। पीटीआई कार्यकर्ताओं और मार्च का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने सरकार की इस शर्त को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया कि वे पहले धरना समाप्त करें। समर्थकों का स्पष्ट रुख है कि जब तक इमरान खान को रिहा नहीं किया जाता, तब तक उनका यह लॉन्ग मार्च और प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार के बातचीत के न्योते को ठुकराते हुए कहा कि बिना किसी पूर्व शर्त के और इमरान खान की रिहाई के मुद्दे को केंद्र में रखे बिना कोई भी वार्ता अर्थहीन है। समर्थकों ने इस प्रस्ताव को सरकार की एक रणनीति करार दिया, जिसका मकसद आंदोलन की धार को कुंद करना और समय निकालना है।
पाकिस्तान के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो इमरान खान की गिरफ्तारी और उनकी रिहाई की मांग को लेकर देश में पिछले कई दिनों से तनाव का माहौल बना हुआ है। इमरान खान पाकिस्तान की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं और उनके समर्थक आधार का दायरा पूरे देश में फैला हुआ है। उनके समर्थकों द्वारा निकाला गया यह लॉन्ग मार्च पाकिस्तान की मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार के लिए एक बड़े जन-आक्रोश का प्रतीक बनकर उभरा है। पेशावर से मात्र 30 किलोमीटर दूर मार्च के पहुंच जाने से प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना या हिंसा को रोका जा सके।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के लिए यह स्थिति अत्यंत जटिल हो गई है। एक तरफ सरकार चाहती है कि बातचीत के जरिए मामले का शांतिपूर्ण हल निकाला जाए, जिसके लिए उन्होंने धरना खत्म करने की शर्त पर संवाद का प्रस्ताव रखा था। वहीं दूसरी तरफ, पीटीआई समर्थकों का अड़ियल रुख और सरकार की शर्तों को मानने से इनकार करना यह दर्शाता है कि आंदोलनकारी किसी भी कीमत पर अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। समर्थकों का मानना है कि इमरान खान के साथ अन्याय हुआ है और उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से झुकने के संकेत नहीं मिले हैं। न तो सरकार अपनी शर्त से पीछे हटती दिख रही है और न ही इमरान खान के समर्थक अपने लॉन्ग मार्च को रोकने या धरना खत्म करने पर सहमत हैं। पेशावर के बाहरी इलाकों में समर्थकों का जमावड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे शहर में सामान्य जीवन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। व्यापारियों और आम नागरिकों में भी इस राजनीतिक टकराव को लेकर चिंता का माहौल है।
पाकिस्तान में यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनीतिक नेता की रिहाई या अधिकारों के लिए इस तरह का बड़ा सड़क आंदोलन देखा जा रहा हो, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में देश पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रहा है। ऐसे में इमरान खान के समर्थकों का यह लॉन्ग मार्च और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकराए जाने की घटना ने पाकिस्तान के राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता को और अधिक बढ़ा दिया है। फिलहाल, पूरे देश की निगाहें पेशावर की ओर टिकी हुई हैं कि क्या सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई रास्ता निकल पाता है या यह टकराव और अधिक गहराता है। वंदे भारत न्यूज इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे-जैसे इस राजनीतिक संकट में कोई नया विकास होगा, उसकी विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

