‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को किसानों को करेगा बर्बाद’: नर्मदापुरम में राष्ट्रीय किसान नेता शिवकुमार शर्मा ने जताई गंभीर चिंता, 24 नवंबर से कुरुक्षेत्र में होगा ‘देश बचाओ’ आंदोलन

नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में राष्ट्रीय किसान नेता शिवकुमार शर्मा ने मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) को लेकर भारतीय किसानों के भविष्य पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह समझौता देश के किसानों को बर्बाद कर देगा। शिवकुमार शर्मा ने यह भी घोषणा की कि इस नीति के खिलाफ 24 नवंबर से हरियाणा के ऐतिहासिक शहर कुरुक्षेत्र में ‘देश बचाओ’ आंदोलन शुरू किया जाएगा। नर्मदापुरम में दिए गए अपने बयान में उन्होंने विस्तार से बताया कि इस समझौते के तहत विदेशी किसानों का उत्पाद भारत आएगा, जिसमें गेहूं, चावल, चीज और दूध से बने हुए आइटम शामिल होंगे।
राष्ट्रीय किसान नेता शिवकुमार शर्मा ने नर्मदापुरम में उपस्थित किसानों और आम जनता को संबोधित करते हुए मुक्त व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने के बाद विदेशी किसानों द्वारा उत्पादित कृषि उपज सीधे भारतीय बाजारों में प्रवेश करेगी। इसके परिणामस्वरूप भारतीय किसानों को अपने ही देश में विदेशी उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। शिवकुमार शर्मा ने विशेष रूप से उन फसलों और उत्पादों का उल्लेख किया जो इस समझौते के तहत भारत आने वाले हैं। उन्होंने बताया कि इसमें गेहूं और चावल जैसी प्रमुख खाद्यान्न फसलें शामिल हैं, जो भारतीय किसानों की खेती का मुख्य आधार हैं। इसके अलावा, चीज और दूध से बने हुए अन्य आइटम भी बड़ी मात्रा में विदेशों से भारत आने लगेंगे, जिससे देश के डेयरी क्षेत्र और पशुपालकों पर भी गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
शिवकुमार शर्मा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की करोड़ों आबादी अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से खेती-किसानी पर निर्भर है। ऐसे में यदि विदेशी किसानों का उत्पाद बिना किसी ठोस रोक-टोक के भारतीय बाजारों में आने लगेगा, तो स्थानीय किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलना लगभग असंभव हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बर्बाद कर सकती है। गेहूं और चावल जैसे अनाजों पर विदेशी उत्पादों की मार पड़ने से न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
डेयरी उत्पादों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी राष्ट्रीय किसान नेता ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चीज और दूध से बने हुए आइटम जब विदेशों से आकर भारतीय बाजार में सस्ती दरों पर या भारी मात्रा में उपलब्ध होंगे, तो देश के छोटे और सीमांत पशुपालक इस प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर पाएंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा पशुपालन और डेयरी से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस समझौते का असर सीधे तौर पर गाँवों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
इन्हीं गंभीर चिंताओं और किसानों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से शिवकुमार शर्मा ने एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा की है। उन्होंने नर्मदापुरम में स्पष्ट किया कि 24 नवंबर से हरियाणा के कुरुक्षेत्र में ‘देश बचाओ’ आंदोलन किया जाएगा। कुरुक्षेत्र का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से देश के किसानों और सैनिकों के संघर्ष का प्रतीक माना जाता रहा है। ‘देश बचाओ’ आंदोलन के माध्यम से किसान नेता सरकार और नीति निर्धारकों का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहते हैं कि मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने से पहले देश के किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
शिवकुमार शर्मा ने किसानों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ किसानों की नहीं है, बल्कि पूरे देश के अन्नदाताओं और उनकी आजीविका को बचाने की है। नर्मदापुरम में दिए गए उनके इस बयान ने किसान संगठनों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों में चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की निगाहें 24 नवंबर को कुरुक्षेत्र में प्रस्तावित ‘देश बचाओ’ आंदोलन पर टिकी हुई हैं, जहाँ देश भर से किसानों के जुटने और मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की संभावना जताई जा रही है।

