Thu, 08 Oct 20267:42 AM
Thu, Oct 8, 2026Updated 7:42 AM IST
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फर्जी आधार कार्ड से लोन लेने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़: SIT ने मास्टरमाइंड राकेश कुमार को उत्तराखंड से किया गिरफ्तार

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बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पुलिस ने नेपाली नागरिकों के फर्जी आधार कार्ड तैयार कर विभिन्न बैंकों से लोन स्वीकृत कराने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने गिरोह के कथित मास्टरमाइंड राकेश कुमार को उत्तराखंड से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई कुंडवा चैनपुर पुलिस द्वारा की गई है। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला बिहार के मोतिहारी जिले के घोड़ासाहन और कुंडवा चैनपुर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां पुलिस ने इस पूरे रैकेट का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी को धर दबोचा है।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और इसने कई नेपाली नागरिकों के फर्जी आधार कार्ड तैयार किए थे। इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके गिरोह के सदस्य देश के विभिन्न बैंकों से लोन मंजूर कराने में कामयाब हो रहे थे। इस पूरे खेल में बैंकों को भारी चूना लगाया जा रहा था। जब इस तरह की धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आईं, तो स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की। चूंकि यह मामला सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई राज्यों में फैले हुए थे, इसलिए इसकी जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था।

विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच के दौरान पाया कि इस पूरे रैकेट के पीछे एक सुनियोजित साजिश थी। गिरोह का कथित मास्टरमाइंड राकेश कुमार बताया जा रहा है, जो इस पूरे फर्जीवाड़े को संचालित कर रहा था। SIT की टीम ने राकेश कुमार की तलाश में कई राज्यों में छापेमारी की। आखिरकार, तकनीकी सुराग और सूचनाओं के आधार पर SIT ने उसे उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया। उत्तराखंड से उसकी गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि आरोपी पुलिस से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और दूसरे राज्यों में छिपकर बैठने की कोशिश कर रहा था।

कुंडवा चैनपुर पुलिस ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपी राकेश कुमार से पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान इस गिरोह से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने अब तक कितने बैंकों से कितनी रकम का लोन लिया है और इसमें कितने फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, यह भी जांचा जा रहा है कि क्या इस रैकेट में किसी बैंक कर्मचारी या अन्य अधिकारियों की भी संलिप्तता है, जिन्होंने बिना उचित सत्यापन के इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन पास किए।

नेपाली नागरिकों के नाम पर फर्जी आधार कार्ड बनवाने का यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान प्रणाली के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण पहचान पत्र है, जिसका उपयोग बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय लेनदेन में होता है। ऐसे में विदेशी नागरिकों के फर्जी आधार कार्ड बनाकर उनसे बैंकों को चूना लगाना एक गंभीर अपराध है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन नेपाली नागरिकों को इस काम के लिए कैसे तैयार किया गया और उन्हें इसके बदले में क्या दिया जाता था।

पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी और घोड़ासाहन क्षेत्र में पिछले कुछ समय से आर्थिक अपराधों और धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ऐसे मामलों को लेकर सतर्क है। कुंडवा चैनपुर थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले ने पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की थी, लेकिन SIT की मेहनत और समन्वित कार्रवाई से मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी संभव हो पाई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी इस अंतरराज्यीय गिरोह की कमर तोड़ने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में बैंकों को भी अपने सत्यापन प्रक्रिया (KYC) को और अधिक सख्त करने की जरूरत है। फर्जी आधार कार्ड के जरिए लोन लेने की घटनाएं बैंकिंग सिस्टम की खामियों को उजागर करती हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस गिरोह ने किन-किन बैंकों को अपना निशाना बनाया था और कुल कितनी राशि की हेराफेरी की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही इन सभी सवालों के सटीक जवाब मिल पाएंगे।

फिलहाल, SIT ने गिरफ्तार मास्टरमाइंड राकेश कुमार को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस की टीम इस मामले में शामिल अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई है। कुंडवा चैनपुर पुलिस का कहना है कि जब तक इस गिरोह के सभी सदस्यों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, तब तक जांच अभियान जारी रहेगा। यह कार्रवाई आम जनता और बैंकिंग संस्थानों के लिए एक राहत की खबर है, क्योंकि इससे फर्जीवाड़े के इस बड़े नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले में आगे आने वाले अपडेट्स पर नजर बनाए हुए है।