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Tue, Oct 6, 2026Updated 11:39 PM IST
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पंजाब सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार मामले की जांच CBI को सौंपी गई, हाईकोर्ट ने CM के OSD पर FIR दर्ज करने का दिया आदेश; सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी सरकार

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चंडीगढ़। पंजाब सरकार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के एक अत्यंत संवेदनशील मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी यानी मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का भी स्पष्ट आदेश दिया है। इस फैसले के तुरंत बाद पंजाब सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह उच्च न्यायालय के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी। यह पूरा मामला राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए इस आदेश के अनुसार, पंजाब सरकार से संबंधित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए इसे सीबीआई को स्थानांतरित किया गया है। अदालत ने अपने आदेश में यह माना कि इस स्तर के कथित भ्रष्टाचार की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा कराया जाना अधिक उपयुक्त होगा, ताकि जांच की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी जांच की जा रही थी, जिसमें डीजीपी से जुड़े पहलू भी शामिल बताए जा रहे थे। हालांकि, अब उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद जांच की पूरी जिम्मेदारी सीबीआई के पास आ गई है।

इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उच्च न्यायालय ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे तौर पर जुड़े अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश आना एक बेहद गंभीर और दुर्लभ घटना मानी जाती है। मुख्यमंत्री कार्यालय राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक केंद्र होता है, इसलिए वहां कार्यरत किसी विशेष अधिकारी पर इस तरह के आरोप लगना स्वाभाविक रूप से सरकार के लिए एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक चुनौती खड़ी करता है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को इस आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के इस आदेश के आने के बाद राज्य सरकार ने अपनी अगली रणनीति तय कर ली है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी। सरकारी पक्ष का मानना है कि इस मामले में उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप और जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश कई कानूनी और प्रक्रियात्मक बिंदुओं पर खरा नहीं उतरता। सरकार की ओर से शीघ्र ही दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा और वहां से इस आदेश पर रोक या पुनर्विचार की मांग की जाएगी। सरकार का तर्क है कि राज्य की एजेंसियां सक्षम हैं और उन्हें जांच पूरी करने का मौका मिलना चाहिए था।

बता दें कि पंजाब में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर हमेशा से ही सख्त रुख अपनाया जाता रहा है। इससे पहले भी राज्य में कई बड़े भ्रष्टाचार मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी जा चुकी है। वर्तमान मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका भी शुरू से ही चर्चा में रही है। ईडी द्वारा धनशोधन और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के पहलुओं पर जांच की जा रही थी। इसके अलावा, पुलिस महानिदेशक (DGP) से जुड़े कुछ तथ्यों की भी जांच के दायरे में होने की जानकारी सामने आई थी। अब जब अदालत ने पूरी जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है, तो यह देखना होगा कि ईडी और अन्य एजेंसियों द्वारा अब तक जुटाए गए साक्ष्य और जानकारी का आदान-प्रदान किस प्रकार किया जाएगा।

उच्च न्यायालय के इस आदेश ने पंजाब की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों के लिए यह आदेश सरकार पर हमला बोलने का एक बड़ा आधार बन गया है। हालांकि, स्रोत सामग्री में किसी भी राजनीतिक दल या नेता की ओर से कोई विशिष्ट प्रतिक्रिया या बयान दर्ज नहीं है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि विपक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाएगा। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीबीआई कब इस मामले में औपचारिक रूप से जांच शुरू करती है और मुख्यमंत्री के OSD के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया कब पूरी होती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई मामला उच्च न्यायालय के आदेश से सीबीआई को स्थानांतरित किया जाता है, तो एजेंसी को अपनी प्रारंभिक जांच जल्द से जल्द शुरू करनी होती है। सीबीआई को अब उन सभी दस्तावेजों और सबूतों का अध्ययन करना होगा जो पहले प्रवर्तन निदेशालय या अन्य जांच एजेंसियों के पास थे। चूंकि मामला सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ा है, इसलिए सीबीआई को जांच के दौरान अत्यंत सावधानी और गोपनीयता बरतनी होगी।

अब पूरे राज्य की नजरें सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यदि सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा देता है, तो जांच की प्रक्रिया फिर से बदल सकती है। लेकिन अगर शीर्ष अदालत उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखती है, तो सीबीआई की जांच का रास्ता पूरी तरह से साफ हो जाएगा और मुख्यमंत्री के OSD के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ेगी। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले में होने वाले हर नए विकास पर नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाता रहेगा।