रांची : झारखंड की सियासत इन दिनों तेज अटकलों के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में हैं, जिसके बाद कांग्रेस और आरजेडी के कुछ हलकों में बेचैनी बढ़ गई है। वहीं राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर यह चर्चा गर्म है कि जेएमएम, केंद्र से फंड में कमी के कारण भाजपा के साथ नजदीकी बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर सकता है।
बिहार चुनाव में कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन की हार और सीटें न मिलने के बाद से ही ऐसी अटकलें जोरों पर थीं कि जेएमएम मौजूदा गठबंधन की समीक्षा कर सकता है। हालांकि जेएमएम और कांग्रेस दोनों ने इन अटकलों को खारिज कर दिया है।सूत्रों के अनुसार हेमंत सोरेन 29 नवंबर को दिल्ली गए थे और संभवतः 5 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले लौट सकते हैं।
भाजपा का भी इनकार—“समुद्र के दो किनारे”
झारखंड भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने जेएमएम के साथ किसी भी संभावित गठबंधन की संभावना को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने कहा—“भाजपा और जेएमएम समुद्र के दो किनारों की तरह हैं, जिनकी नीतियों में जमीन-आसमान का फर्क है।”
जेएमएम का पलटवार—“सीएम की निजी यात्रा, बीजेपी फैला रही अफवाह”
जेएमएम के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास को ‘निजी यात्रा’ बताया और भाजपा पर जानबूझकर फेक नैरेटिव फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा—“बीजेपी खुद को प्रासंगिक दिखाने के लिए फर्जी खबरों का सहारा ले रही है। मुख्यमंत्री शीतकालीन सत्र से पहले लौटेंगे।”
गठबंधन सुरक्षित, लेकिन अटकलें जारी
हालांकि तीनों पार्टियों ने आधिकारिक तौर पर किसी भी मतभेद से इनकार किया है, लेकिन मुख्यमंत्री के लगातार दिल्ली प्रवास और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने गठबंधन की स्थिरता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।झारखंड की राजनीति में अब नजरें इस बात पर हैं कि मुख्यमंत्री कब लौटते हैं और आने वाले शीतकालीन सत्र में क्या सियासी माहौल देखने को मिलता है।
















