Priyanka Rahul Gandhi Wayanad Election Campaign Wait; Landslide Politics

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केरल में 2 दिन बाद वोटिंग है, लेकिन वायनाड के लोगों को अपनी सांसद प्रियंका गांधी का इंतजार है। 2024 में हुए उपचुनाव में 4.1 लाख वोट से जीतीं प्रियंका गांधी चुनाव में कम एक्टिव दिखी हैं। पहली रैली 2 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम में की थी। फिर 6 अप्रैल को कन

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वायनाड में दो साल पहले हुई लैंडस्लाइड में चार गांव मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा बर्बाद हो गए थे। 420 लोग मारे गए। 118 का पता ही नहीं चला। तब सांसद रहे राहुल गांधी ने पीड़ितों को 100 घर देने का वादा किया था। 19 महीने हो गए, अब तक उनकी नींव भी नहीं पड़ी।

इस त्रासदी में चूरलमाला की सुनेरा के परिवार के 6 लोग मारे गए थे। सुनेरा बताती हैं कि सरकार से पैसे की मदद तो मिली, लेकिन हमारा नाम घर वाली लिस्ट में नहीं है। राहुल और प्रियंका गांधी आए थे। घर दिलाने का वादा किया था, लेकिन मिला नहीं। फिर भी हम कांग्रेस को ही वोट देंगे।

केरलम की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होनी है। घर देने के वादे पर कांग्रेस और CPM आमने-सामने हैं। वायनाड लोकसभा सीट में विधानसभा की 7 सीटें हैं। 2021 में कांग्रेस के गठबंधन UDF को 4 और लेफ्ट के गठबंधन LDF को 3 सीटें मिली थीं। इस बार UDF 5 सीटों पर आगे दिख रहा है।

लैंडस्लाइड से प्रभावित इलाके कलपेट्टा विधानसभा सीट में आते हैं। यहां LDF ने सहयोगी पार्टी RJD को टिकट दिया है। कांग्रेस से मौजूदा विधायक टी. सिद्दीकी चुनाव लड़ रहे हैं।

2009 से वायनाड नहीं हारी कांग्रेस, सांसद प्रियंका असम की प्रभारी प्रियंका गांधी को कांग्रेस ने असम चुनाव की कमान सौंपी है। असम में केरलम के साथ 9 अप्रैल को ही वोटिंग होनी है। सीनियर जर्नलिस्ट बृजेश कुमार के मुताबिक, वायनाड में चर्चा होती है कि राहुल और प्रियंका यहां बहुत कम आते हैं। वे इसे सेफ प्लेस के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। फिर भी वायनाड में कांग्रेस का हमेशा से दबदबा रहा है। इसलिए वह इन सब बातों पर बहुत ध्यान नहीं देती।

वायनाड लोकसभा सीट पर कांग्रेस 2009 के बाद कोई चुनाव नहीं हारी है। 2019 में राहुल गांधी यहां से 4.3 लाख वोट से जीते। 2024 में करीब 3.6 लाख वोट से जीत मिली। उनके सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में प्रियंका गांधी ने पहला चुनाव यहीं से लड़ा। जीत का मार्जिन 4.1 लाख, यानी राहुल की पिछली जीत से ज्यादा रहा।

राहुल ने वायनाड छोड़ने के बाद यहां के लोगों के लिए लेटर लिखा था। उन्होंने लिखा कि आप मेरे परिवार का हिस्सा हैं। मैं आपके लिए हमेशा मौजूद रहूंगा। हालांकि, फिलहाल वे वायनाड से दूरी बनाए हुए हैं।

2 साल बाद भी त्रासदी से नहीं उबर पाया वायनाड, हर जगह तबाही के निशान वायनाड 2 साल पहले आई लैंडस्लाइड की त्रासदी से अब तक उबर नहीं पाया है। पीड़ित परिवारों को फिर से बसाने का काम चल रहा है। लैंडस्लाइड के बाद कांग्रेस ने पीड़ितों के लिए फंड जुटाया था। सरकार चला रहा गठबंधन LDF इसके इस्तेमाल पर सवाल उठा रहा है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ के मुताबिक, फंड के लिए खोले अकाउंट में करीब 5.38 करोड़ रुपए आए हैं। इससे पीड़ितों के घर बनाने के लिए जमीन खरीदी गई है।

कलपेट्टा से करीब 22 किमी दूर चूरलमाला में घुसते ही एक होर्डिंग दिखता है। इस पर लैंडस्लाइड में मारे गए लोगों की फोटो लगी हैं। लैंडस्लाइड से सबसे ज्यादा तबाही चूरलमाला में ही हुई थी। कुछ कदम आगे बढ़ते ही लैंडस्लाइड से हुई तबाही के निशान दिखने लगते हैं। यहां से आगे गाड़ियां नहीं ले जा सकते।

चूरलमाला में लैंडस्लाइड के दौरान मारे गए लोगों की फोटो लगी हैं। यहां आने वाले टूरिस्ट कुछ देर यहां जरूर रुकते हैं।

चूरलमाला में लैंडस्लाइड के दौरान मारे गए लोगों की फोटो लगी हैं। यहां आने वाले टूरिस्ट कुछ देर यहां जरूर रुकते हैं।

एक तरफ कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। लैंडस्लाइड वाली जगह पर आम लोगों की एंट्री मना है। यहां जगह–जगह लाल झंडे लगाए गए हैं। खतरे की वजह से आगे जाने के लिए कलेक्टर से परमिशन लेनी होती है।

चूरलमाला के घरों, दुकानों और स्कूल में आज भी लैंडस्लाइड के वक्त छोड़ा गया सामान बिखरा पड़ा हैं। इनमें किताबें, कपड़े-बिस्तर, भगवान की मूर्तियां सब कुछ है। लोग इन्हें दोबारा लेने भी नहीं आए।

चूरलमाला के घरों, दुकानों और स्कूल में आज भी लैंडस्लाइड के वक्त छोड़ा गया सामान बिखरा पड़ा हैं। इनमें किताबें, कपड़े-बिस्तर, भगवान की मूर्तियां सब कुछ है। लोग इन्हें दोबारा लेने भी नहीं आए।

चूरलमाला में टूरिस्ट दोबारा आने लगे हैं। वे त्रासदी के वक्त आर्मी के बनाए पुल पर फोटो खिंचवाते हैं। इलाके में बना ग्लास ब्रिज दोबारा खुल गया है। वहां जाने के लिए प्राइवेट जीप बुक करनी होती है। गांव में जगह–जगह बुकिंग सेंटर खुले हैं। आसपास के चाय बगानों में चहल-पहल दिखने लगी है। टूरिज्म भले पटरी पर आ रहा हो, लेकिन लोग अब तब उस हादसे को नहीं भूले हैं।

पीड़ित 1 : सुनीश ‘पत्नी अब भी सदमे में, बारिश होते ही घबरा जाती है’ सुनीश चूरलमाला में अपने उजड़े हुए घर को देखने आए थे। हमें घर के अंदर एक कमरे में ले गए। बोले कि मैं यहीं सो रहा था। एक दिन पहले लगा था कि तेज बारिश होने वाली है। रात में ऐसा प्रलय आएगा, ये नहीं सोचा था। देखिए घर का क्या हाल है।

सुनीश का चूरलमाला में दो मंजिला मकान है। त्रासदी के बाद परिवार यहां से चला गया था। सुनीश कभी-कभार घर देखने आ जाते हैं।

सुनीश का चूरलमाला में दो मंजिला मकान है। त्रासदी के बाद परिवार यहां से चला गया था। सुनीश कभी-कभार घर देखने आ जाते हैं।

सुनीश बताते हैं, ‘हमने घर मजबूत बनवाया था, इसलिए बहने से बच गया। नींद खुली तो पहली मंजिल डूब चुकी थी। हम दूसरी मंजिल पर चले गए। हमारे सामने आसपास के घर गिर रहे थे। लोग और सामान बह रहे थे।’

सुनीश से बात करने के दौरान ही हल्की बारिश होने लगी। वे बोले, ‘मुझे घर जाना पड़ेगा। पत्नी अब भी सदमे में हैं। बारिश होने पर घबरा जाती हैं। कई बार आधी रात को उठ जाती हैं। हम कलपेट्टा में किराए के मकान में रहते हैं। सरकार किराए के लिए 6 हजार रुपए देती हैं। मदद के तौर पर हर महीने 19 हजार रुपए और मिलते हैं।’

पीड़ित 2: सुनेरा और नासिर ‘परिवार और रिश्तेदार मिलाकर 31 लोग मारे गए, राहुल ने कहा था- घर दिलाएंगे’ चूरलमाला में रहने वाले सुनेरा और नासिर केले की चिप्स बेचते हैं। त्रासदी वाली रात पहाड़ पर दूसरी तरफ चढ़कर जान बचाई थी। सुनेरा बताती हैं, ‘परिवार के 6 लोग मारे गए थे। दो का तो पता ही नहीं चला। पूरे परिवार और रिश्तेदारों को मिला दें, तो 31 लोगों की जान गई। अब तक बेघर हैं। राहुल-प्रियंका ने कहा था कि घर दिलाएंगे, लेकिन पता चला है कि अब तक नींव भी नहीं पड़ी।’

सुनेरा और नासिर को सरकार की तरफ से घर नहीं मिला है। इसलिए उन्हें राहुल गांधी से उम्मीद है।

सुनेरा और नासिर को सरकार की तरफ से घर नहीं मिला है। इसलिए उन्हें राहुल गांधी से उम्मीद है।

सरकार पीड़ितों के लिए टाउनशिप बनवा रही, 178 घर सौंपे राज्य सरकार कलपेट्टा में पीड़ितों के लिए टाउनशिप बनवा रही है। यह जगह लैंडस्लाइड वाली जगह से करीब 30 किमी दूर है। यहां 159 एकड़ जमीन पर 410 घर, एक मेडिकल सेंटर और पार्क बन रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 1 मार्च को 178 लोगों को घर सौंपे हैं।

26 फरवरी को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी वायनाड आए थे। उन्होंने त्रासदी वाली जगह से करीब 11 किमी दूर मेप्पड़ी पंचायत के कुन्नमपेटा में घरों की आधारशिला रखी। ये घर लगभग 1100 वर्गफीट के होंगे।

ये लैंडस्लाइड के पीड़ितों के लिए बनवाई टाउनशिप है। पहले फेज का काम पूरा हो चुका है।

ये लैंडस्लाइड के पीड़ितों के लिए बनवाई टाउनशिप है। पहले फेज का काम पूरा हो चुका है।

‘CPM सरकार ने लोगों काे घर दिया, प्रियंका जवाब से बचने के लिए नहीं आ रहीं’ LDF की तरफ से चुनाव लड़ रहे RJD कैंडिडेट पीके अनिल कुमार कहते हैं, ‘तेजस्वी यादव के आने के बाद से हमारा कैंपेन तेजी से चला है। सरकार ने चूरलमाला के लोगों को घर बनाकर दिया है। टनल बनवा रहे हैं। लैंडस्लाइड के बाद से सरकार लोगों को किराया दे रही है। मोदीजी आए, लेकिन फोटो खिंचवाकर चले गए।’

‘कांग्रेस प्रेसिडेंट ने कहा कि हमारे पास घर बनाने के लिए पैसा नहीं है। प्रियंका गांधी अब तक नहीं आईं। उन्होंने घर देने का वादा किया था। नहीं दिया तो जवाब देना पड़ेगा। हो सकता है कि इसलिए नहीं आ रही हों।’

एक्सपर्ट बोले- सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी, UDF को फायदा मिलेगा सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. धनुराज बताते हैं, ‘सर्वे बता रहे हैं कि इस बार माइनॉरिटी एकजुट होकर UDF को वोट दे सकते हैं। पिछली बार ऐसा नहीं हुआ था। उन्होंने LDF को वोट किया था। यहां एंटी इनकम्बेंसी है, लेकिन नेक टू नेक फाइट भी है।

‘यहां CPM कैडर सबसे अहम भूमिका निभाने वाला है। कई हिस्सों में लीडरशिप में बदलाव से कार्यकर्ता नाराज हैं। हालांकि, UDF भी कमजोर ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर और कार्यकर्ताओं की कमी से जूझ रहा है। वे सरकार की नाकामियां उजागर करने में नाकाम रहे हैं।’

सीनियर जर्नलिस्ट नीनू मोहन कहती हैं कि वायनाड की ज्यादातर सीटों पर UDF का दबदबा है। यहां माइनॉरिटी और एसटी-एससी आबादी ज्यादा है। ये हमेशा से कांग्रेस के वोटबैंक रहे हैं। वायनाड जिले की तीन में से दो सीटों पर कांग्रेस लगातार जीतती आ रही है। पिछली बार एक सीट CPM ने जीती थी। वायनाड लोकसभा सीट की कुछ सीटें कोझिकोड और मल्लपुरम जिले में हैं। वहां मुस्लिम लीग और कांग्रेस दोनों का दबदबा है।

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