पटना: बिना नोटिस और कारण बताए हटाए गए ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजरों का BJP कार्यालय के बाहर हंगामा, बोले- 5 साल के अनुबंध को 1 साल में तोड़ा

पटना। वंदे भारत न्यूज। बिहार की राजधानी पटना में शिक्षा विभाग से अचानक हटाए गए ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर (प्रखंड परियोजना प्रबंधक) आज अपनी मांगों को लेकर भाजपा कार्यालय पहुंचे और जमकर हंगामा किया। इन कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस और बिना कोई कारण बताए उनके पदों से हटा दिया गया है। आक्रोशित कर्मचारियों ने भाजपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए अपनी व्यथा सुनाई और न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना है कि वर्ष 2023 में शिक्षा विभाग में उनकी नियुक्ति पांच साल के अनुबंध पर हुई थी, लेकिन महज एक साल के भीतर ही 31 मार्च 2025 को उन्हें काम से हटा दिया गया।
ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजरों ने बताया कि उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपना कार्य किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बिना किसी स्पष्टीकरण के बर्खास्त कर दिया गया। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने हमें बिना नोटिस और बिना कारण बताए हटा दिया। जबकि नियुक्ति के समय जो अनुबंध किया गया था, उसकी अवधि पांच वर्ष की थी। अब मात्र एक वर्ष की सेवा के बाद ही उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, जिससे वे सभी गहरे सदमे और आर्थिक संकट में हैं। इन कर्मचारियों का यह भी कहना है कि इतनी जल्दी और बिना किसी औपचारिकता के उन्हें हटाया जाना नियमों के खिलाफ है।
आज पटना स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर जब ये ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर पहुंचे तो उन्होंने अपने साथ बैनर और पोस्टर भी रखे थे, जिन पर उनकी मांगें लिखी हुई थीं। उन्होंने भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। कर्मचारियों का तर्क है कि चूंकि राज्य में वर्तमान में भाजपा गठबंधन की सरकार है, इसलिए वे अपनी बात सत्ता पक्ष तक पहुंचाने के लिए पार्टी कार्यालय आए हैं। उनका मानना है कि यदि उचित मंच पर उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्हें अपनी नौकरी वापस पाने के लिए और बड़े स्तर पर आंदोलन करना पड़ सकता है।
ज्ञात हो कि बिहार के शिक्षा विभाग में ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ये अधिकारी प्रखंड स्तर पर सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों की उपस्थिति, मिड-डे मील योजना के क्रियान्वयन और अन्य शैक्षिक कार्यक्रमों की निगरानी का कार्य करते हैं। वर्ष 2023 में इनकी नियुक्तियां शिक्षा विभाग में सुधार लाने और प्रखंड स्तर पर बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थीं। अनुबंध के आधार पर इनकी नियुक्ति पांच वर्षों के लिए की गई थी, ताकि वे दीर्घकालिक योजनाओं को धरातल पर उतार सकें। हालांकि, 31 मार्च 2025 को अचानक इन सभी को उनके पदों से मुक्त कर दिया गया, जिसके बाद से ही इन कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।
हटाए गए कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें नौकरी से हटाते समय कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया। सामान्यतः किसी भी अनुबंधित कर्मचारी को सेवा से हटाते समय पहले उसके कार्य की समीक्षा की जाती है और यदि कोई कमी पाई जाती है तो उसे सुधार का मौका देने के लिए नोटिस जारी किया जाता है। लेकिन ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजरों का दावा है कि उनके साथ ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया। सीधे तौर पर 31 मार्च 2025 को उन्हें काम से हटा दिया गया। इस एकाएक लिए गए फैसले ने सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डाला है।
इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर किस आधार पर पांच साल के अनुबंध को बीच में ही समाप्त किया गया। क्या यह निर्णय नीतिगत बदलाव के तहत लिया गया है या फिर इन कर्मचारियों के प्रदर्शन को लेकर कोई अन्य कारण है, इस पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में मीडिया के समक्ष कोई पुष्ट जानकारी साझा नहीं की है।
भाजपा कार्यालय के बाहर हुए इस हंगामे ने राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना दिया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से मांग की है कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से बात करें, ताकि उन्हें न्याय मिल सके। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी सुनवाई नहीं हुई तो वे सचिवालय का घेराव करने और आमरण अनशन जैसे कड़े कदम उठाने को भी बाध्य होंगे। फिलहाल, भाजपा कार्यालय के बाहर कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी रहा और उन्होंने अपनी बहाली की मांग को लेकर नारेबाजी की।
यह मामला बिहार में सरकारी अनुबंधित कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और सेवा शर्तों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। पांच साल के अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों को महज एक साल में बिना कारण बताए हटा दिया जाना, अन्य अनुबंधित कर्मचारियों में भी असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है। वंदे भारत न्यूज इस मामले की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है और शिक्षा विभाग का पक्ष आने पर इसे प्रकाशित किया जाएगा।

