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Wed, Oct 7, 2026Updated 9:48 AM IST
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पटना: पुलिस दीदी को थप्पड़ मारने वाला NEET अभ्यर्थी गुलाम अली अब भी फरार, रिश्तेदार ने थाने में मारपीट और ₹60 हजार वसूली का लगाया आरोप

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पटना। बिहार की राजधानी पटना के रामकृष्णा नगर इलाके में एक महिला पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारने के मामले में मुख्य आरोपी गुलाम अली अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया था और पुलिस प्रशासन की छवि पर सवाल उठने लगे थे। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पटना पुलिस आरोपी तक पहुंचने में असमर्थ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुलाम अली पटना में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रहा था और वह मूल रूप से इस क्षेत्र का निवासी नहीं है। पुलिस टीमों द्वारा उसकी तलाश में संभावित ठिकानों और उसके परिचितों के यहां दबिश दी जा रही है, लेकिन अब तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।

इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब आरोपी गुलाम अली के एक रिश्तेदार ने स्थानीय थाने पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिश्तेदार का दावा है कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थाने के अंदर उनके साथ मारपीट की और उनसे 60 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई। इस संबंध में रिश्तेदार ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें कहा गया है कि गुलाम अली की तलाश के बहाने पुलिस ने परिवार के सदस्यों को परेशान किया और धन उगाही की। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने अभी तक इन आरोपों की पुष्टि या खंडन नहीं किया है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।

वीडियो वायरल होने के बाद पटना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल पर मौजूद रहे गुलाम अली के दो साथियों की पहचान कर ली है। इन दोनों साथियों से पूछताछ की जा रही है ताकि गुलाम अली के वर्तमान ठिकाने और उसकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। पुलिस सूत्रों का मानना है कि ये साथी आरोपी की लोकेशन और उसके फरार होने की योजना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं। पहचान किए गए दोनों व्यक्तियों को पुलिस ने अपनी निगरानी में ले लिया है और उनसे विस्तृत पूछताछ जारी है। यह कदम आरोपी तक पहुंचने की कड़ी में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शुरुआती जांच में पता चला है कि घटना के समय ये लोग भी मौके पर उपस्थित थे।

रामकृष्णा नगर थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने पुलिस बल और आम जनता के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कैसे एक युवक द्वारा वर्दीधारी महिला पुलिसकर्मी के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इस दृश्य ने न केवल पुलिस विभाग को शर्मसार किया है, बल्कि महिला सुरक्षा और कानून के प्रति सम्मान को लेकर भी बहस छेड़ दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसे गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी तकनीकी और पारंपरिक साधनों का उपयोग करके जल्द से जल्द आरोपी को न्यायिक हिरासत में लें।

दूसरी ओर, रिश्तेदार द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठने लगी है। नागरिक समाज के कुछ सदस्यों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिसकर्मी ही अवैध वसूली और मारपीट में संलिप्त हैं, तो पीड़ित परिवार को न्याय कैसे मिलेगा? ऐसे में उच्च अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की जा रही है। पुलिस प्रशासन के लिए यह एक दोहरी चुनौती है—एक तरफ फरार आरोपी को पकड़ना और दूसरी तरफ अपने ही विभाग की विश्वसनीयता को बनाए रखना।

गुलाम अली के फरार रहने से पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। स्थानीय लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इतने दिनों बाद भी पुलिस आरोपी को क्यों नहीं पकड़ पाई है। क्या वह शहर छोड़कर भाग गया है या फिर वह किसी प्रभावशाली व्यक्ति के संरक्षण में छिपा हुआ है? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनके उत्तर पुलिस को देने होंगे। फिलहाल, पटना पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और सीसीटीवी फुटेज तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास कर रही हैं।

इस पूरे प्रकरण में सबसे चिंताजनक पहलू पुलिस और जनता के बीच विश्वास की कमी है। जहां एक ओर पुलिसकर्मी पर हमले की घटना ने कानून व्यवस्था को चुनौती दी है, वहीं दूसरी ओर थाने में मारपीट और वसूली के आरोपों ने पुलिस की छवि को और धूमिल किया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह आवश्यक है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, चाहे वे वर्दी में हों या आम नागरिक। पटना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ही इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने लाएंगे और न्याय की प्रक्रिया को तेज करेंगे। जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होता और रिश्तेदार के आरोपों की तथ्यात्मक जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह मामला सुर्खियों में बना रहने की संभावना है।