Wed, 07 Oct 20267:50 AM
Wed, Oct 7, 2026Updated 7:50 AM IST
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पूर्णिया: कालीगंज गांव में छापेमारी, घर से 150 लीटर अवैध शराब बरामद; मुफस्सिल और सदर थाना पुलिस ने एक आरोपी को किया गिरफ्तार

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पूर्णिया जिले में अवैध शराब कारोबार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस प्रशासन ने मंगलवार देर रात एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। मुफस्सिल थाना और सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कालीगंज गांव में संयुक्त रूप से छापेमारी करते हुए पुलिस टीम ने एक निजी आवास से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की है। इस विशेष अभियान में पुलिस ने मौके से लगभग 150 लीटर अवैध शराब जब्त की है और इस मामले में एक आरोपी को भी गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पकड़े गए आरोपी से फिलहाल गहन पूछताछ जारी है ताकि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों और आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचा जा सके।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई मंगलवार देर रात अंजाम दी गई। खुफिया सूचना या नियमित गश्त के आधार पर मुफस्सिल और सदर थाना की पुलिस टीमों ने कालीगंज गांव में दबिश दी। छापेमारी के दौरान पुलिस को एक घर के अंदर बड़ी मात्रा में शराब छिपाकर रखी हुई मिली। तलाशी अभियान में कुल करीब 150 लीटर अवैध शराब बरामद हुई, जिसे मौके पर ही जब्त कर लिया गया। यह शराब किस उद्देश्य से और कहां खपत के लिए रखी गई थी, इसका पता लगाने के लिए पुलिस अब तकनीकी और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर जांच कर रही है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी यह स्पष्ट करती है कि यह केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं, बल्कि संभवतः अवैध बिक्री या वितरण के उद्देश्य से संग्रहित की गई थी।

इस मामले में पुलिस ने मौके से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसे इस अवैध भंडारण का मुख्य आरोपी माना जा रहा है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान और उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी अभी तक सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है, लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह शराब कहां से लाई गई थी, इसकी आपूर्ति श्रृंखला में और कौन लोग शामिल हैं, और क्या इस धंधे में स्थानीय स्तर पर कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि केवल भंडारण करने वाले व्यक्ति के खिलाफ ही कार्रवाई न हो, बल्कि इस पूरी अवैध चेन को तोड़ा जा सके।

मुफस्सिल और सदर थाना क्षेत्र पूर्णिया जिले के संवेदनशील इलाकों में से एक माना जाता है, जहां समय-समय पर अवैध शराब की बिक्री और निर्माण की सूचनाएं मिलती रहती हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन द्वारा देर रात की गई यह कार्रवाई क्षेत्र में कानून व्यवस्था और आबकारी नीति के अनुपालन को लेकर प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है। बिहार राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू है, और इसके बावजूद यदि इतनी बड़ी मात्रा में शराब किसी आवासीय परिसर में पाई जाती है, तो यह प्रशासनिक चुनौती और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता दोनों का विषय है। पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई दो थाना क्षेत्रों के समन्वय का भी उदाहरण है, जो सीमावर्ती या साझा क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण के लिए आवश्यक होता है।

बरामद शराब की गुणवत्ता और प्रकार की जांच के लिए उसे फोरेंसिक या आबकारी विभाग के मानकों के अनुसार परखा जाएगा। अक्सर ऐसे मामलों में बरामद शराब या तो पड़ोसी राज्यों से तस्करी कर लाई जाती है या फिर स्थानीय स्तर पर अवैध रूप से निर्मित होती है। यदि यह शराब तस्करी के माध्यम से लाई गई है, तो इसमें अंतरराज्यीय सीमाओं की निगरानी में खामी का पहलू भी सामने आ सकता है। वहीं, यदि यह स्थानीय उत्पादन है, तो इसके निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल और उपकरणों की बरामदगी भी जांच का हिस्सा होगी। पुलिस टीम अब इस दिशा में भी काम कर रही है कि क्या आरोपी के पास से कोई अन्य आपत्तिजनक सामग्री या दस्तावेज मिले हैं जो इस कारोबार के पैमाने को स्पष्ट कर सकें।

प्रशासनिक स्तर पर इस कार्रवाई को अवैध शराब माफियाओं के खिलाफ एक ठोस संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पूर्णिया पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों ने पूर्व में भी कई बार यह स्पष्ट किया है कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। कालीगंज गांव में हुई इस बरामदगी के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि क्षेत्र में अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी दबाव बढ़ेगा और अवैध कारोबारियों में भय का माहौल पैदा होगा। हालांकि, पुलिस का फोकस केवल बरामदगी पर न होकर नेटवर्क को समाप्त करने पर है, जिसके चलते गिरफ्तार आरोपी की रिमांड या विस्तृत पूछताछ को प्राथमिकता दी जा रही है।

आगामी दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि पूछताछ में नए नाम या ठिकानों का खुलासा होता है, तो पुलिस त्वरित अनुवर्ती कार्रवाई कर सकती है। साथ ही, बरामद शराब की कीमत का आकलन और आरोपी पर आबकारी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। न्यायिक हिरासत या पुलिस रिमांड के संबंध में अदालत से अनुमति लेने की प्रक्रिया भी नियमानुसार पूरी की जाएगी। यह घटना एक बार फिर रेखांकित करती है कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और इसके विरुद्ध पुलिस का अभियान निरंतर जारी रहना आवश्यक है। जनता से भी अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे अवैध कारोबार की सूचना पुलिस को दें ताकि समाज में नशा मुक्त वातावरण बनाए रखा जा सके।