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Tue, Oct 6, 2026Updated 9:27 AM IST
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राजस्थान: 3605 पंचायतों में धनतेरस के दिन होने वाली वोटिंग की तारीख बदलने की तैयारी, राज्य निर्वाचन आयुक्त ने दिए संकेत

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जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर एक बड़ी प्रशासनिक तैयारी सामने आई है। प्रदेश की 3605 पंचायतों में मतदान की तारीख को बदलने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार इन पंचायतों में 6 नवंबर को मतदान होना प्रस्तावित है, लेकिन यह तिथि इस बार धनतेरस के पावन पर्व से मेल खा रही है। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग ने धनतेरस के दिन होने वाली इस वोटिंग को टालने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। हालांकि, आयोग की ओर से अभी तक कोई अंतिम और औपचारिक फैसला जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह माना जा रहा है कि जल्द ही नई तारीखों का ऐलान किया जा सकता है।

इस पूरे मामले में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह का बयान काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि चुनावी कैलेंडर बनाते समय इस बात का ध्यान नहीं रखा गया था कि मतदान की तारीख धनतेरस के त्योहार से टकरा सकती है। उनके इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि निर्वाचन आयोग अब इस चूक को सुधारने और मतदान की तारीख में बदलाव करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आयुक्त ने धनतेरस को देखते हुए वोटिंग टालने के जो संकेत दिए हैं, उससे प्रदेश भर के मतदाताओं और राजनीतिक दलों में नई तारीखों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

धनतेरस हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की पूजा-अर्चना के लिए जाना जाता है। इस दिन लोग बड़ी संख्या में सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। बाजारों में भारी भीड़ रहती है और व्यापारियों के लिए यह साल का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण दिनों में से एक होता है। ऐसे में यदि 6 नवंबर को ही मतदान कराया जाता है, तो न केवल आम जनता की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचती, बल्कि व्यापारियों और दुकानदारों को भी अपने मतदान का अधिकार प्रयोग करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता। मतदान केंद्रों पर ड्यूटी करने वाले सरकारी कर्मचारियों और पीठासीन अधिकारियों के लिए भी त्योहार के दिन व्यवस्थाएं संभालना एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन जाता।

राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण शासन की रीढ़ है। 3605 पंचायतों में एक साथ चुनाव कराना अपने आप में एक विशाल प्रशासनिक और लॉजिस्टिक अभियान है। इन पंचायतों में लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनावी प्रक्रिया के तहत मतदान कर्मियों की नियुक्ति, ईवीएम और अन्य मतदान सामग्री का परिवहन, सुरक्षा बलों की तैनाती और मतदान केंद्रों की स्थापना जैसे कई अहम कार्य शामिल होते हैं। जब इतने बड़े स्तर पर चुनाव आयोजित किए जा रहे हों, तो स्थानीय त्योहारों और धार्मिक अवसरों का ध्यान रखना निर्वाचन आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक होता है, ताकि मतदान प्रतिशत पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने यह स्पष्ट किया है कि कैलेंडर तैयार करते समय इस पहलू पर ध्यान नहीं दिया जा सका था। यह स्वीकारोक्ति दर्शाती है कि आयोग अपनी गलती को सुधारने के लिए तत्पर है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जनता की सुविधा का ध्यान रखना सर्वोपरि होता है। यदि त्योहार के दिन चुनाव कराए जाते हैं, तो इस बात की पूरी संभावना रहती है कि मतदाता अपने घरों और पूजा-पाठ को छोड़कर मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचेंगे, जिससे मतदान का प्रतिशत प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि आयोग ने अब तारीख बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।

हालांकि, यह ध्यान देने योग्य बात है कि अभी तक अंतिम फैसला होना बाकी है। निर्वाचन आयोग किसी भी तारीख में बदलाव करने से पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की बारीकी से समीक्षा करता है। नई तारीख तय करने के लिए यह देखा जाएगा कि उसके आसपास कोई अन्य त्योहार या राष्ट्रीय अवकाश तो नहीं है, सुरक्षा बलों की उपलब्धता कैसी रहेगी और प्रशासनिक मशीनरी कितनी जल्दी नई तारीख के अनुसार खुद को ढाल सकती है। फिलहाल, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से औपचारिक अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है।

इस संभावित बदलाव से प्रदेश के राजनीतिक दलों और पंचायत चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशियों की रणनीति पर भी असर पड़ना तय है। चुनाव प्रचार के लिए बचा हुआ समय और नई तारीख के अनुसार उन्हें अपने कार्यक्रमों को फिर से व्यवस्थित करना होगा। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 3605 पंचायतों में मतदान की नई तारीखों का औपचारिक ऐलान किया जाएगा, हम इस खबर को अपडेट करेंगे। फिलहाल आम जनता, व्यापारियों और मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है कि धनतेरस के दिन उन्हें चुनावी प्रक्रिया और त्योहार की तैयारियों के बीच कोई संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।