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RDVV जबलपुर के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल का गुना तबादला, सुरक्षा की मांग और षड्यंत्र की आशंका जताने के बाद हुआ फैसला

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) जबलपुर के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल का तबादला कर दिया है। उन्हें क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय, गुना में कुलसचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। यह तबादला ऐसे समय में हुआ है, जब डॉ. सोनवाल ने हाल ही में विश्वविद्यालय के कुलगुरु और राज्यपाल को पत्र लिखकर काम करने के माहौल को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की थीं। उन्होंने अपने पत्रों में खुद को और अपने परिवार को खतरा होने की आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग भी की थी। इस पूरे मामले ने जबलपुर के शैक्षणिक और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

डॉ. रविशंकर सोनवाल ने 16 अगस्त को रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा को एक विस्तृत पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि विश्वविद्यालय में काम करने का वातावरण ठीक नहीं है और वे लगातार तनाव की स्थिति में अपना कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पत्र में बताया था कि वे जबलपुर में अकेले निवास कर रहे हैं, जिसके कारण उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। डॉ. सोनवाल ने कुलगुरु को लिखे गए पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि उन्होंने हाल ही में एक कर्मचारी को निलंबित किया था। इस निलंबन की कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ षड्यंत्र या कुचक्र रचे जाने की आशंका पैदा हो गई है।

कुलसचिव डॉ. सोनवाल ने अपनी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ झूठी शिकायतें किए जाने और उन्हें किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने कुलगुरु से अनुरोध किया था कि उन्हें कार्यालय और उनके निवास स्थान दोनों जगहों पर उचित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे बिना किसी भय के स्वतंत्र रूप से अपना काम कर सकें। उनका कहना था कि सुरक्षा मिलने के बाद ही वे भयमुक्त होकर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों का संचालन कर पाएंगे।

अपने पत्र में डॉ. सोनवाल ने विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति का वर्णन करते हुए कहा था कि वहां बार-बार झूठी शिकायतें की जा रही हैं और षड्यंत्र की स्थिति बन रही है। उन्होंने यह तक कह दिया था कि विश्वविद्यालय की परिस्थितियां इतनी जटिल और पेचीदा हैं कि यदि उनका पूरा विवरण दिया जाए तो एक पूरी किताब लिखी जा सकती है। इस बयान से साफ जाहिर होता है कि वे किस स्तर के मानसिक दबाव और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे।

इसके साथ ही, डॉ. रविशंकर सोनवाल ने राज्यपाल को भी पत्र लिखकर अपनी व्यथा सुनाई थी। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री से भी किसी दूसरे विश्वविद्यालय में अपना स्थानांतरण करने की मांग की थी। उन्होंने अपनी मांग में कहा था कि स्थानांतरण होने से वे और उनका परिवार भय और तनाव से मुक्त वातावरण में रह सकेंगे। कुलसचिव द्वारा कुलगुरु, राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री को एक साथ पत्र लिखकर सुरक्षा और तबादले की मांग करना विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक असामान्य घटनाक्रम माना जा रहा है।

इसी बीच, गुरुवार को मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने तबादलों का आदेश जारी कर दिया। राज्यपाल के नाम से अपर सचिव द्वारा जारी किए गए इस आदेश के अनुसार, डॉ. रविशंकर सोनवाल को रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से हटाकर क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय, गुना का कुलसचिव नियुक्त किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह तबादला सीधे तौर पर डॉ. सोनवाल द्वारा की गई मांग के परिणामस्वरूप हुआ है या यह उच्च शिक्षा विभाग के नियमित प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा है।

बताया जा रहा है कि उच्च शिक्षा विभाग ने इस बार करीब आधा दर्जन कुलसचिवों के तबादले एक साथ किए हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि यह राज्य स्तर पर विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक अधिकारियों के पुनर्गठन की एक बड़ी कवायद का हिस्सा है। लेकिन डॉ. सोनवाल के मामले ने विशेष ध्यान खींचा है क्योंकि उन्होंने तबादले से पहले ही सुरक्षा की मांग और षड्यंत्र की आशंका जता दी थी।

डॉ. रविशंकर सोनवाल के गुना तबादले के बाद अब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर में कुलसचिव का पद रिक्त हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक इस पद पर किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है। कुलसचिव का पद किसी भी विश्वविद्यालय की दिनचर्या और प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में इस पद के रिक्त रहने से विश्वविद्यालय के दैनिक कार्यों पर असर पड़ने की संभावना है। विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों में इस तबादले और उससे जुड़ी परिस्थितियों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

गौरतलब है कि एक कर्मचारी के निलंबन के बाद कुलसचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा खुद की जान को खतरा बताना और सुरक्षा की मांग करना विश्वविद्यालय के भीतर के तनावपूर्ण माहौल की ओर इशारा करता है। डॉ. सोनवाल ने जिस प्रकार से अपने पत्रों में ‘एक किताब लिखी जा सकती है’ जैसा उल्लेख किया, वह दर्शाता है कि मामला केवल एक कर्मचारी के निलंबन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई अन्य प्रशासनिक और संगठनात्मक जटिलताएं भी शामिल थीं।

फिलहाल, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किए गए इस तबादले के बाद डॉ. रविशंकर सोनवाल को गुना में अपना नया कार्यभार संभालना होगा। वहीं, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन को नए कुलसचिव की नियुक्ति होने तक इस रिक्त पद के कार्यों के संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। राज्यपाल के नाम से जारी आदेश के बाद अब यह देखना होगा कि गुना विश्वविद्यालय में डॉ. सोनवाल को कैसा कार्य वातावरण मिलता है और जबलपुर विश्वविद्यालय में नए कुलसचिव की नियुक्ति कब तक पूरी होती है।