रीवा: APSU में भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे NSUI जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय समेत कार्यकर्ता हिरासत में, पुलिस ने टेंट उखाड़ा

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU) में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के जिलाध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। यह घटना तब हुई जब एनएसयूआई के पदाधिकारी और कार्यकर्ता विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर के बाहर पहुंचे थे। पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर न केवल प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, बल्कि उनका लगाया गया टेंट भी उखाड़ दिया। इस कार्रवाई से छात्र संगठन और पुलिस प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में छात्र कार्यकर्ताओं का एक दल अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में चल रही कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराने पहुंचा था। पंकज उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने और उनके साथियों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के ठीक बाहर टेंट लगाकर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत की थी। उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय प्रशासन और विशेष रूप से कुलपति का ध्यान इन गंभीर आरोपों की ओर आकर्षित करना था। हालांकि, जैसे ही भूख हड़ताल का कार्यक्रम शुरू हुआ, पुलिस प्रशासन की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई।
पंकज उपाध्याय के अनुसार, पुलिस ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या बातचीत के सीधे कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए टेंट को उखाड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने एनएसयूआई जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय और उनके साथ मौजूद अन्य छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से प्रदर्शनकारी छात्रों में रोष व्याप्त हो गया। छात्र नेताओं का कहना है कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपना संवैधानिक अधिकार इस्तेमाल करते हुए विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया है।
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU) मध्य प्रदेश के रीवा संभाग का एक प्रमुख और ऐतिहासिक उच्च शिक्षण संस्थान है। इस विश्वविद्यालय से रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली और अनूपपुर सहित कई जिलों के हजारों छात्र जुड़े हुए हैं। छात्र संगठन एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन या कुलपति की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। छात्र संगठन की मांग है कि विश्वविद्यालय में हो रही कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पुलिस प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने और विश्वविद्यालय परिसर के बाहर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या भीड़भाड़ को रोकने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की है। आम तौर पर ऐसे मामलों में पुलिस प्रशासन का तर्क होता है कि बिना अनुमति के सार्वजनिक स्थानों पर टेंट लगाना और प्रदर्शन करना नियमों के विरुद्ध है। वहीं, दूसरी ओर छात्र संगठनों का मानना है कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। रीवा पुलिस ने फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को थाने में रखा है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।
रीवा में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की हिरासत की खबर फैलते ही छात्र राजनीति में हलचल तेज हो गई है। छात्र संगठनों के बीच यह मुद्दा अब गर्माता जा रहा है। एनएसयूआई के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अपने साथियों की रिहाई और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आगे की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। यदि पुलिस प्रशासन और छात्र संगठन के बीच कोई सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में रीवा में छात्र आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह पहला मौका नहीं है जब किसी विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों और प्रशासन या पुलिस के बीच इस तरह का टकराव देखने को मिला हो। मध्य प्रदेश में समय-समय पर छात्र संगठन शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों, शुल्क वृद्धि, परीक्षा प्रणाली में बदलाव और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सड़कों पर उतरते रहे हैं। रीवा की यह ताजा घटना एक बार फिर छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच चल रहे तनाव को उजागर करती है। फिलहाल, पूरे मामले पर पुलिस अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही इस संबंध में कोई नई जानकारी या आधिकारिक बयान सामने आएगा, उसे तत्काल प्रकाशित किया जाएगा।

