रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का अयोध्या दौरा: वैदिक गणित को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की वकालत, रानोपाली आश्रम में नारायण संस्कृत महाविद्यालय भवन का लोकार्पण

अयोध्या। भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या दौरे के दौरान शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर एक महत्वपूर्ण विचार रखा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्कूलों में वैदिक मैथमेटिक्स (वैदिक गणित) की पढ़ाई अनिवार्य रूप से कराई जानी चाहिए। रक्षामंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के विद्यार्थियों को संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ कंप्यूटर कोडिंग भी समझनी चाहिए। उनका मानना है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक का यह संगम छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगा। राजनाथ सिंह यह विचार अयोध्या में आयोजित एक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान व्यक्त कर रहे थे।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गुरु पर्व के समापन अवसर पर अयोध्या पहुंचे थे। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रानोपाली उदासीन आश्रम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेना था। इसी क्रम में उन्होंने नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन का विधिवत लोकार्पण किया। इस भवन के उद्घाटन के बाद संस्कृत शिक्षा और वैदिक अध्ययनों को एक नया बुनियादी ढांचा मिलेगा, जिससे छात्रों और शोधार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। रक्षामंत्री ने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा और वैदिक गणित के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली में गणित और विज्ञान का जो आधार था, वह विश्व स्तर पर अद्वितीय रहा है।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि वैदिक गणित केवल पुरानी परंपरा नहीं है, बल्कि यह आधुनिक गणितीय समस्याओं को हल करने का एक अत्यंत सरल और तेज तरीका है। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश के स्कूलों में वैदिक गणित को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, तो छात्रों की गणितीय क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। इसके अलावा, उन्होंने आधुनिक शिक्षा की जरूरतों को देखते हुए कहा कि विद्यार्थियों को संस्कृत के श्लोकों का अर्थ समझने के साथ ही कंप्यूटर कोड की भाषा पर भी अधिकार प्राप्त करना चाहिए। रक्षामंत्री का यह कथन भारतीय शिक्षा नीति में प्राचीन और आधुनिक ज्ञान के समन्वय की आवश्यकता को दर्शाता है।
इस अवसर पर रानोपाली उदासीन आश्रम में संतों का एक बड़ा समागम आयोजित किया गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए उदासीन संप्रदाय के संतों और विद्वानों ने इस धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया। गुरु पर्व के समापन के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में संतों ने भारतीय संस्कृति, धर्म और शिक्षा के प्रसार पर अपने विचार साझा किए। नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन के लोकार्पण को संतों ने संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। आश्रम परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भी भारी भीड़ देखने को मिली।
हालांकि, इस पूरे आयोजन के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन को लेकर संशय की स्थिति बनी रही। पहले ऐसी चर्चा थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उनके आगमन पर अंत तक संशय बरकरार रहा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में ही नारायण संस्कृत महाविद्यालय के भवन का लोकार्पण किया और कार्यक्रम को संबोधित किया। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर किसी आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
बता दें कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समय-समय पर भारतीय शिक्षा प्रणाली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हो रहे बदलावों और स्वदेशी ज्ञान परंपराओं को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। अयोध्या में दिए गए उनके इस बयान को शिक्षा जगत में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैदिक गणित को स्कूलों में लागू करने की उनकी अपील से यह संकेत मिलता है कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही स्तर पर पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।
नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण से अब यहां संस्कृत साहित्य, वेद, उपनिषद और व्याकरण जैसे विषयों की पढ़ाई अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। रानोपाली उदासीन आश्रम द्वारा संचालित यह महाविद्यालय संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। रक्षामंत्री के दौरे और उनके संबोधन ने इस संस्था के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है। अयोध्या में गुरु पर्व के समापन पर आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था और शैक्षणिक दूरदर्शिता का एक अनूठा संगम रहा, जहां रक्षामंत्री ने युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक तकनीक में पारंगत होने का संदेश दिया।

