25 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र
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एक्टर- डायरेक्टर मनोज कुमार का शुक्रवार सुबह मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया। वे 87 साल के थे। उनका अंतिम संस्कार कल सुबह 11 बजे मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट पर होगा। मनोज कुमार काफी समय से लिवर सिरोसिस से जूझ रहे थे। उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें 21 फरवरी 2025 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मनोज कुमार के निधन पर दिवंगत सिंगर महेंद्र कपूर के बेटे रोहन कपूर दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान भावुक होकर बोले कि मुझे लगता कि आज मेरे डैड दोबारा इस दुनिया से चले गए।

मनोज कुमार को अपने दूसरे पिताजी मानते हैं रोहन कपूर।
मनोज कुमार को रोहन कपूर पिता और गुरु मनाते थे। उन्होंने कहा- मनोज कुमार मेरे पिता समान और मेरे गुरु भी थे। मैंने उनको फिल्म ‘क्रांति’ में उन्हें असिस्ट किया था। उनसे बहुत कुछ सीखा और समझा। बहुत ही लाजवाब इंसान थे, उनको कभी भी सेट पर गुस्से में नहीं देखा। उनके जैसा देशभक्त ना तो कोई था और ना ही कभी होगा। जिस जमाने में लोग भारत को इंडिया के नाम से जानते थे तब उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से भारत की याद दोबारा दिलाई। इसी लिए उनको भारत कुमार के नाम से भी जाना जाता है। इंडिया तो अंग्रेजों का दिया नाम है।

डैड ने पहली बार मनोज कुमार के लिए फिल्म ‘शहीद’ में ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गाया था। डैड के गाते हुए जज्बे को जब मनोज कुमार देखा था तभी कह दिया था कि महेंद्र जी भगवान ने चाहा तो मैं अपनी पहली फिल्म बनाने जा रहा हूं। जब मैं फिल्म बनाऊंगा तो आप ही मेरी आवाज रहेंगे। डैड ने सोचा कि यह कलाकार भावुक होकर ऐसा कह दिया होगा। उनको यकीन नहीं था कि आगे चलकर ऐसा साथ बनेगा कि दुनिया याद करेगी। जब फिल्म ‘उपकार’ के लिए डैड को बुलाया, उनके गाने रिकॉर्ड हुए तो दुनिया ही जानती है कि एक इतिहास बन गया।
जब डैडी मनोज कुमार की फिल्मों के देश भक्ति गाने गाते थे तो गाने की रिकार्डिंग से पहले मनोज कुमार डैडी को देश के वीरों की कहानियां सुनाते थे। देश के वीरों की कहानियां सुनकर पिताजी के अंदर देश भक्ति की ऐसी भावना जागृत होती कि उनके भावों में सिर्फ वीर रस ही उपजता।

मनोज कुमार की यह खासियत थी कि गाने की रिकॉर्डिंग से पहले वह वैसा ही माहौल गायक के सामने रच देते थे। किसी भी गाने को रिकॉर्ड करने से पहले उस पर विस्तार से चर्चा होती। मैंने कभी नहीं देखा कि स्टूडियो में आए और गाने रिकार्ड करके निकल गए। मनोज कुमार को गीत-संगीत की बहुत जानकारी है।
मुझे लगता कि आज मेरे डैड दोबारा इस दुनिया से चले गए। मेरे डैड के जाने के बाद उन्होंने अपने बेटे की तरह मेरा ख्याल रखा। अपना बेटा समझकर वैसा ही प्यार करते थे। उनसे जब मिलने जाता था तब घंटों सोच विचार कर बहुत ही गहराई वाली बातें करते थे। बहुत ही विद्वान इंसान और सच्चे भारतमाता के पुत्र थे।

डैड जब भी विदेशों में स्टेज शो के लिए जाते थे तो शो की शुरुआत मनोज कुमार जी के देशभक्ति के गाने जैसे ‘जब जीरो दिया मेरे भारत ने’ और ‘है प्रीत जहां की रीत यहां’ से करते थे। इन गानों को सुनते ही लोग रोना शुरू कर देते थे। मनोज कुमार को एक महान एक्टर, डायरेक्टर के रूप में सदियों तक याद रखेंगे। अब भारत को पता चलेगा कि उन्होंने क्या खोया है?