RSS Punjab Election Strategy; Dalit Samarasta Abhiyan

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पंजाब में विधानसभा चुनाव को करीब एक साल बाकी है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने ‘पंजाब विजय प्लान’ लॉक कर लिया है। गृह मंत्री अमित शाह भी साफ कर चुके हैं कि BJP पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।

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24 से 26 फरवरी तक सरसंघचालक मोहन भागवत पंजाब दौरे पर रहे। उन्होंने 4 साल का कामकाज देखा और स्वयंसेवकों की रणनीति में बदलाव किए। रणनीति पर 4 साल से काम चल रहा है, लेकिन चुनावी साल में स्वयंसेवक पहले से ज्यादा एक्टिव हैं।

संघ के प्लान के केंद्र में पंजाब की 38% दलित आबादी है। इसे साधने के लिए 5 पॉइंटर रणनीति बनी है। टारगेट पर AAP की 92 सीटें हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने संघ पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं से चुनावी रणनीति और कामकाज के तरीकों पर बात की।

धर्म परिवर्तन का ट्रेंड पूरे पंजाब में है, लेकिन बॉर्डर वाले जिलों में ये पैटर्न ज्यादा दिख रहा है।

धर्म परिवर्तन का ट्रेंड पूरे पंजाब में है, लेकिन बॉर्डर वाले जिलों में ये पैटर्न ज्यादा दिख रहा है।

5 पॉइंट में संघ का पंजाब विजय प्लान… पंजाब में दलितों को उनकी जड़ों से जोड़ने और मोड़ने का काम स्वयंसेवकों की टोलियां कर रही हैं। धर्म जागरण मंच के कार्यकर्ता कहते हैं, ‘संघ एक-दो साल का टारगेट लेकर नहीं चलता। हम 4 साल से इनके स्वाभिमान और सम्मान के लिए काम कर रहे हैं। भेदभाव मिटने पर ही इनमें हिंदू धर्म के लिए आस्था जगेगी।’

1. दलित और सवर्णों के लिए एक श्मशान धर्म जागरण मंच के एक पदाधिकारी बताते हैं, ‘2025 के अनुमान के मुताबिक पंजाब में दलित आबादी 38-40% हो चुकी है। हर तीसरा-चौथा वोटर दलित है। भागवत जी से साफ निर्देश मिले हैं कि एक साल के अंदर हर दलित के न घर और मन तक पहुंचना है।’

पंजाब के क्षेत्र प्रचारक बताते हैं,

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संघ ने पिछले साल एक सर्वे कराया। इसमें 23 जिलों के गांव चुने गए, जहां दलितों और सवर्णों के श्मशान अलग-अलग हैं। ऐसे 250 गांवों की लिस्ट बनी है। मिशनरीज यहां कब्जा कर चुके हैं। भेदभाव से पीड़ित 80% और कहीं-कहीं 100% दलित ईसाई बन चुके हैं।

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‘इन गांवों में समरसता अभियान चला रही टोलियों को भेदभाव मिटाने का काम मिला है। अगले एक साल में इन्हें मॉडल गांव की तरह पेश किया जाएगा। टारगेट ये है कि गांव में एक श्मशान हो, दूसरे को योग सेंटर या जिम में बदल दिया जाए, ताकि भेदभाव कम हो।’

पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 34 सीटें रिजर्व हैं। यहां दलित आबादी 45-50% है। इनमें दोआबा क्षेत्र की 23 सीटों पर दलितों का प्रभाव सबसे ज्यादा है। पंजाब का मालवा, दलित आबादी वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। यहां की 69 सीटों पर दलित आबादी 31 से 42% है। इस एरिया की की 66 सीटें AAP के पास हैं। BJP को पंजाब में ताकत बढ़ाने के लिए इसमें सेंध लगानी होगी।

2. दलितों का राम कनेक्शन पंजाब में प्रांत प्रचारक स्तर के पदाधिकारी बताते हैं, ‘धार्मिक भेदभाव पंजाब की सबसे बड़ी समस्या है। मंदिर और गुरुद्वारे तक अलग हैं। सवर्ण जातियां, दलितों को मंदिर और गुरुद्वारों में नहीं जाने देतीं। गुरुद्वारों तक तो हमारी ज्यादा पहुंच नहीं, लेकिन मंदिरों में तेजी से काम चल रहा है। हम दलितों के बीच हिंदू धर्म को लेकर आस्था बढ़ा रहे हैं, जो घर वापसी में मददगार होगा।’

आस्था बढ़ाने के लिए ये 4 काम किए जा रहे…

रामतीर्थ की जगह वाल्मीकि तीर्थ स्थल: इसकी शुरुआत अमृतसर से की गई। 2016 में रामतीर्थ का नाम बदलकर वाल्मीकि तीर्थ कर दिया गया। तब राज्य में शिरोमणि अकाली दल और BJP के गठबंधन वाली सरकार थी। यहां महर्षि वाल्मीकि आश्रम है।

इसी जगह माता सीता ने दोबारा वनवास काटा था। दलित संत महर्षि वाल्मीकि ने उन्हें आश्रम में जगह दी थी। इससे दलित भी सम्मानित महसूस करते हैं। ये उन्हें बराबरी का एहसास दिलाने का पहला कदम था कि हिंदू धर्म में वो हाशिए पर नहीं, बल्कि मुख्यधारा में हैं।

वाल्मीकि तीर्थ स्थल में महर्षि वाल्मीकि की तपस्थली है। यहीं उन्होंने 24 हजार छंदों वाली श्री रामायण लिखी थी।

वाल्मीकि तीर्थ स्थल में महर्षि वाल्मीकि की तपस्थली है। यहीं उन्होंने 24 हजार छंदों वाली श्री रामायण लिखी थी।

घर-घर वाल्मीकि रामायण: प्रांत प्रचारक स्तर के एक पदाधिकारी बताते हैं कि पंजाब के हर घर में वाल्मिकी रामायण पहुंचाई जा रही है। हमने पूछा क्या सिख रामायण पढ़ते हैं? वे जवाब देते हैं, ‘हां, संघ सिख, जैन और पारसी को हिंदू ही मानता है। समाज के तय मानकों के मुताबिक भी पंजाब की कुल आबादी में करीब 37-38% हिंदू हैं। हिंदू दलित करीब 12-13% हैं।’

‘इसलिए सिख हों या हिंदू हर घर में वाल्मीकि रामायण पहुंचेगी। इसमें सवर्ण और दलित जातियां दोनों होगी, इसलिए भेदभाव दूर होगा। दलित संतों से ब्लॉक स्तर पर अखंड वाल्मीकि रामायण के पाठ कराए जा रहे हैं। इनकी संख्या बढ़ाने का प्लान है।’

रामलीला के लिए वाल्मीकि स्थल से जाएगी ज्योति: वाल्मीकि तीर्थ स्थल बोर्ड के प्रमुख बाल जोगी संत प्रगट नाथ जी महाराज कहते हैं, ‘पिछले 4 साल में विश्व हिंदू परिषद भारत के कई राज्यों में रामलीला के लिए यहां से ज्योति लेकर गई। इनमें जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, यूपी, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्य शामिल हैं। यहां रामलीला के मंचन से पहले टोलियां आईं और ज्योति लेकर गईं।’

क्या इसका पंजाब के दलितों पर कोई प्रभाव पड़ा है? बाल जोगी कहते हैं, ‘हां, ये हाशिए पर खड़ी कम्युनिटी के बीच सम्मान पैदा करती है। मैं खुद दलित हूं, इसलिए बेहतर महसूस कर सकता हूं।’

3. संत रविदास की 650वीं जयंती पर पूरे साल उत्सव पंजाब में संघ के प्रचार विभाग के मुताबिक, संत रविदास जयंती इस साल जून से अगले साल जून तक मनाई जाएगी। ब्लॉक स्तर पर जयंती उत्सव होगा। संघ हर मंदिर में वाल्मीकि और रविदास की मूर्ति या फोटो लगाने का अभियान चला रहा है।

PM मोदी ने संत रविदास की 649वीं जयंती पर 1 फरवरी को जालंधर में आदमपुर हवाई अड्डे का नाम बदलकर 'श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा, आदमपुर' करने का ऐलान किया।

PM मोदी ने संत रविदास की 649वीं जयंती पर 1 फरवरी को जालंधर में आदमपुर हवाई अड्डे का नाम बदलकर ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा, आदमपुर’ करने का ऐलान किया।

4. पिछले 4 साल में दलित संतों का नेटवर्क तैयार हो रहा गुरुदासपुर की दलित कम्युनिटी से आने वाले संघ कार्यकर्ता कहते हैं, ‘संघ, दलित कम्युनिटी के संतों का नेटवर्क बना रहा है। इनका काम रामकथा और लवकुश कथा सुनाना है। लवकुश के वंशज पंजाब में बेदी और सोढ़ी हैं। लवकुश के वंशजों का पंजाब में होने का सीधा मतलब है कि सिख हिंदू हैं।‘

फिर ये तो सवर्ण जाति के सिख हुए?, जवाब मिला- ‘हां, पहली बात ये कि सिख हिंदू हैं। दूसरी बात, जब दलित संत लवकुश की कथा सुनाएंगे, तभी दलितों को अपनापन महसूस होगा। वो ये भी बताएंगे कि लवकुश का जन्म दलित संत वाल्मीकि के आश्रम में हुआ यानी हिंदू धर्म में कोई भेदभाव नहीं है।‘

‘दलित संत बताएंगे कि कबीरदास, रैदास (रविदास) और वाल्मीकि जैसे न जाने कितने संत हिंदू धर्म का हिस्सा हैं। संत रविदास पंजाब के दलित सिखों और दलित हिंदुओं के बीच सबसे ज्यादा स्वीकार्य हैं। रविदास कम्युनिटी से जुड़े डेरा सचखंड बल्लां का जालंधर में हेडक्वॉर्टर है। संत निरंजन दास डेरे के मुखिया हैं। 25 जनवरी 2026 को उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला। ये भी संघ के अभियान में मददगार साबित होगा।‘

ये अमृतसर में लवकुश मंदिर की तस्वीर है, जिसे वाल्मीकि तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है।

ये अमृतसर में लवकुश मंदिर की तस्वीर है, जिसे वाल्मीकि तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है।

5. न लालच, न दबाव, सम्मान देकर दलितों की घर वापसी क्या कुछ दलित हिंदुओं और सिखों की घर वापसी हुई है? गुरदासपुर के एक कार्यकर्ता कहते हैं, ‘हां कोशिश जारी है।’

कोई डेटा है क्या? वे कहते हैं, ‘हमारे पास आंकड़े भी हैं, लेकिन इन्हें साझा करना संघ के नियम के खिलाफ है। पिछले 4-5 साल में धर्मांतरण रुका है। लाखों न सही हजारों की तादाद में लोगों ने धर्म बदला भी है।’

‘मिशनरीज बच्चों के एजुकेशन का लालच देकर सबसे ज्यादा धर्म बदलवाती हैं। पंजाब में विद्या भारती नाम से संघ के 150 से ज्यादा स्कूल हैं। यहां आर्थिक रूप कमजोर बैकग्राउंड के ऐसे बच्चों को एडमिशन में प्राथमिकता मिलती है। यहां करीब 7-8 हजार बच्चे पढ़ते हैं।‘

पंजाब के बॉर्डर वाले इलाकों में धर्मांतरण ज्यादा पंजाब के गुरदासपुर जिले में ईसाई आबादी सबसे तेजी से बढ़ी है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां दलित आबादी 7.68% यानी 1.77 लाख थी, जो अब बढ़कर अनुमानित तौर पर 4 लाख से ज्यादा हो गई है। यहां की 6 विधानसभा सीटों में से 4 पर कांग्रेस और दो पर AAP के विधायक हैं।

वैसे धर्म परिवर्तन का ट्रेंड पूरे पंजाब में है, लेकिन बार्डर इलाकों में ज्यादा है। इनमें गुरदासपुर के साथ अमृतसर, पठानकोट, फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, लुधियाना, कपूरथला, बठिंडा और जालंधर जिले शामिल हैं।

दलित वोटों के हिसाब से BJP कमजोर पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में दलितों का वोट शेयर देखें तो BJP कमजोर दिखती है। दलित सिखों का सबसे ज्यादा 46% वोट AAP को और सबसे कम 3% ही BJP को मिला। हिंदू दलितों का वोट शेयर देखें तो कांग्रेस को 32% और AAP को 32% वोट मिले, जबकि BJP का वोट शेयर 10% ही रहा।

इस बार चुनाव से उम्मीदों को लेकर जिला स्तर के एक स्वयंसेवक कहते हैं, ‘अभी पंजाब में माहौल AAP के खिलाफ है। दिल्ली में करप्शन के चार्ज और पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर खराब हाल में है। AAP की खिसकती जमीन और हिंदुओं पर मंडराते खतरे के बीच लोग दक्षिणपंथी विचारधारा की तरफ मुड़ रहे हैं।’

‘RSS पांच साल के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए काम करता है। त्रिपुरा, ओडिशा जैसे राज्यों में संघ ने कई दशक खपाए, तब चुनाव में नतीजे नजर आए।’

AAP बोली- अगर धर्मांतरण की चिंता है, तो एंटी कन्वर्जन लॉ लाएं RSS और BJP के लिए भी धर्मांतरण बड़ा मुद्दा है। क्या ये AAP के एजेंडे में है? इस पर पंजाब में आम आदमी पार्टी के स्पोक्सपर्सन नील गर्ग कहते हैं, ‘अगर RSS और BJP को धर्म परिवर्तन की इतनी ही चिंता है, तो केंद्र इसके खिलाफ एंटी कन्वर्जन लॉ क्यों नहीं लाती। ये हर राज्य में सिलेक्टिव राजनीति करना चाहते हैं। इन्हें धर्म परिवर्तन की चिंता नहीं है। इन्हें इस बात की चिंता है कि कैसे धर्म के नाम पर राजनीति करें।’

AAP के एजेंडे में धर्म परिवर्तन है या नहीं? नील कहते हैं, ‘मैं इस पर न भी नहीं कहूंगा और हां भी नहीं कहूंगा। ये तय है कि पिछले मेनिफेस्टो में इसका जिक्र नहीं था। अभी जो हम चुनाव प्रचार कर रहे हैं, उसमें भी नहीं है। हमारे लिए स्वास्थ्य, बिजली, शिक्षा और नशे के खिलाफ अभियान चलाना प्राथमिकता है, न कि धर्म के नाम पर मुद्दे खोजकर उसका राजनीतिकरण करना।’

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