Thu, 08 Oct 20269:59 AM
Thu, Oct 8, 2026Updated 9:59 AM IST
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रतलाम: डोडाचूरा तस्करी की कार छोड़ने के मामले में दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच, ग्रामीण ASP विवेक कुमार करेंगे जांच

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मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में नारकोटिक्स और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर पुलिस विभाग की सख्ती के बीच नामली थाना क्षेत्र से जुड़े एक संवेदनशील मामले में विभागीय कार्रवाई की गई है। रतलाम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने नामली थाने पर पदस्थ दो पुलिस कर्मियों को उनके संदिग्ध आचरण के चलते तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई डोडाचूरा से भरी एक संदिग्ध कार को बिना उचित वैधानिक प्रक्रिया के छोड़े जाने के आरोपों और उससे उत्पन्न हुई विवादित स्थिति के बाद की गई है। पुलिस महकमे में इस घटनाक्रम को गंभीरता से लिया गया है और मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की जिम्मेदारी रतलाम ग्रामीण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) विवेक कुमार को सौंपी गई है।

पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन दो कर्मियों के विरुद्ध यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, उनमें हेड कॉन्स्टेबल दिलीप रावत और कॉन्स्टेबल माखनसिंह शामिल हैं। ये दोनों ही अधिकारी नामली थाने में पदस्थ थे और इन पर ड्यूटी के दौरान बरती गई कथित लापरवाही और संदिग्ध व्यवहार का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, नामली थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक ऐसी गाड़ी को रोका गया था जिसमें भारी मात्रा में डोडाचूरा होने की आशंका थी। हालांकि, इस वाहन को जब्त करने या उस पर वैधानिक मामला दर्ज करने के बजाय उसे मौके से छोड़ दिया गया। पुलिस बल द्वारा अवैध मादक पदार्थों से लदे संदिग्ध वाहन को इस प्रकार छोड़े जाने की घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर खलबली मचाई, बल्कि यह मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी पहुंचा, जिसके बाद एसपी अमित कुमार ने त्वरित निर्णय लेते हुए संबंधित कर्मियों को लाइन हाजिर करने का आदेश जारी किया।

‘लाइन अटैच’ का पुलिस विभाग में विशेष महत्व होता है। यह एक प्रारंभिक अनुशासनात्मक उपाय है जिसके तहत संबंधित कर्मचारी को अपनी नियमित ड्यूटी और जनसंपर्क से हटाकर पुलिस लाइन में रिपोर्ट करना होता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जांच पूरी होने तक आरोपी कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग न कर सके, गवाहों को प्रभावित न करे और सबूतों से छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश न रहे। हेड कॉन्स्टेबल दिलीप रावत और कॉन्स्टेबल माखनसिंह को लाइन अटैच करने का निर्णय इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, ताकि ग्रामीण एएसपी द्वारा की जाने वाली जांच पूरी तरह से स्वतंत्र और बाधा रहित हो सके। रतलाम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि किसी भी पुलिसकर्मी का आचरण संदिग्ध पाया जाता है या वह अपराधियों के प्रति नरमी बरतता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मामले की जांच की कमान संभाल रहे ग्रामीण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार अब इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल करेंगे। उनकी जांच का दायरा केवल कार को छोड़े जाने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इस बात की भी तफ्तीश की जाएगी कि आखिर किस परिस्थिति में और किन कारणों से डोडाचूरा से भरी संदिग्ध कार को जाने दिया गया। जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या इसमें किसी प्रकार की सांठगांठ, आर्थिक लेनदेन या फिर महज अवहेलना का पहलू सामने आता है। एएसपी विवेक कुमार को अपनी रिपोर्ट में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करनी होगी और यह बताना होगा कि क्या दोनों पुलिसकर्मियों का आचरण वास्तव में संदिग्ध था और क्या उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही या आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की आवश्यकता है।

रतलाम जिला, विशेष रूप से नामली और इसके आसपास के क्षेत्र, ऐतिहासिक रूप से डोडाचूरा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के मार्गों पर स्थित रहे हैं। ऐसे में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जब स्वयं पुलिस कर्मियों पर तस्करों को लाभ पहुंचाने या अवैध गतिविधियों पर पर्दा डालने के आरोप लगते हैं, तो यह न केवल विभाग की छवि को धूमिल करता है, बल्कि समाज में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करता है। एसपी अमित कुमार द्वारा की गई यह कार्रवाई पुलिस बल के भीतर शुचिता और जवाबदेही बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा है। फिलहाल, जांच रिपोर्ट आने तक दोनों पुलिसकर्मी लाइन अटैच रहेंगे और उनके भविष्य का फैसला जांच में सामने आने वाले ठोस तथ्यों के आधार पर ही लिया जाएगा। पुलिस विभाग ने अभी तक कार में मौजूद डोडाचूरे की सटीक मात्रा या वाहन के मालिक के बारे में कोई आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, क्योंकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और तथ्यों की पुष्टि होना शेष है।