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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:46 PM IST
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रतलाम: लॉ कॉलेज विवाद में बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग, कलेक्ट्रेट परिसर में पढ़ी हनुमान चालीसा

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रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में डॉ. कैलाश नाथ काटजू विधि महाविद्यालय (लॉ कॉलेज) में गणेशोत्सव के दौरान हुए विवाद को लेकर उत्पन्न तनाव अभी भी जारी है। इस मामले में पुलिस द्वारा विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों सहित तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के विरोध में सोमवार को संगठन ने उग्र प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने रतलाम कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर न केवल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की, बल्कि सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग अपने साथियों पर दर्ज की गई प्राथमिकी को तत्काल वापस लेने की थी, जिसे वे झूठा और बदले की भावना से प्रेरित मान रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद गणेशोत्सव के आयोजन को लेकर शुरू हुआ था। डॉ. कैलाश नाथ काटजू विधि महाविद्यालय परिसर में गणेशोत्सव के दौरान कुछ ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई और हंगामा हो गया। इस हंगामे और विवाद के संबंध में रतलाम पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बजरंग दल के दो पदाधिकारियों और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस की इस कार्रवाई को ही अब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने अपना निशाना बनाया है। संगठन का आरोप है कि उनके कार्यकर्ताओं को जानबूझकर फंसाया गया है और उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।

सोमवार को हुए प्रदर्शन की तीव्रता इस बात से स्पष्ट होती है कि कार्यकर्ताओं ने अपनी आस्था और विरोध दोनों को एक साथ प्रदर्शित किया। कलेक्ट्रेट परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ करना इस आंदोलन का एक प्रतीकात्मक और धार्मिक पहलू था, जिसका उद्देश्य न केवल प्रशासनिक दबाव बनाना था, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं के प्रति एकजुटता और धार्मिक भावनाओं का प्रदर्शन करना भी था। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान स्पष्ट किया कि यदि उनके पदाधिकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। उनका कहना है कि गणेशोत्सव एक धार्मिक अनुष्ठान था और उसमें हुई किसी भी अप्रिय घटना के लिए उनके कार्यकर्ताओं को एकतरफा तरीके से दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं है।

इस विवाद ने रतलाम शहर में कानून व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों को लेकर संवेदनशीलता को भी उजागर किया है। लॉ कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान होने वाले विवाद अक्सर साम्प्रदायिक या राजनीतिक रंग ले लेते हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन के सामने चुनौतियां बढ़ जाती हैं। पुलिस ने हालांकि कानून व्यवस्था बनाए रखने और हंगामे के आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है, लेकिन संगठन इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यदि कोई विवाद हुआ भी था, तो उसकी जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और बिना पूर्वाग्रह के तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए, न कि सीधे विशिष्ट संगठन के पदाधिकारियों को लक्षित किया जाए।

रतलाम प्रशासन और पुलिस के समक्ष अब यह चुनौती है कि वे कैसे इस विवाद का समाधान निकालें ताकि कानून व्यवस्था भी बनी रहे और किसी पक्ष की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को भी ठेस न पहुंचे। फिलहाल, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने अपनी मांगों को लेकर रुख सख्त कर लिया है। सोमवार के प्रदर्शन और हनुमान चालीसा पाठ के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़े हैं और एफआईआर वापसी की मांग पूरी होने तक वे शांत नहीं बैठेंगे।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में हाल के वर्षों में धार्मिक आयोजनों और शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले विवादों को लेकर कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है। ऐसे में रतलाम का यह मामला भी उसी श्रृंखला का एक हिस्सा प्रतीत होता है, जहां धार्मिक आस्था, कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों की सक्रियता आपस में टकरा रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले की विवेचना जारी है और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, संगठन का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और विकास होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

डॉ. कैलाश नाथ काटजू विधि महाविद्यालय में गणेशोत्सव के दौरान क्या वास्तव में हंगामा हुआ था या यह केवल एक साधारण विवाद था जिसे बाद में बड़ा रूप दे दिया गया, इस पर अभी तक स्पष्टता नहीं आई है। पुलिस रिपोर्ट और संगठन के दावों में अंतर है, जो इस मामले की जटिलता को दर्शाता है। सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में हुई घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह विवाद अब केवल लॉ कॉलेज या पुलिस स्टेशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जिला स्तरीय प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। सभी पक्षों से संयम और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की अपेक्षा की जा रही है ताकि रतलाम में शांति और सद्भाव बना रहे।