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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:45 PM IST
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सागर: काम में लापरवाही पर कलेक्टर की सख्त कार्रवाई, बंडा तहसीलदार को नोटिस और बीएओ की सैलरी रोकी गई

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सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सागर कलेक्टर द्वारा अपने कार्यालय में आयोजित समय सीमा की बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के कार्यप्रदर्शन की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान काम में ढिलाई और निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यों को पूरा न करने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण समय सीमा बैठक में जिले के विभिन्न प्रशासकीय विभागों से जुड़े मामलों, लंबित जन शिकायतों, स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति और भू-अर्जन से संबंधित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान जब विभागीय कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सामने आई, तो कई अधिकारियों के कामकाज में कमी पाई गई। इसी क्रम में बंडा तहसीलदार द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में की जा रही लापरवाही का मामला संज्ञान में आया। कलेक्टर ने बंडा तहसीलदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में समयबद्ध तरीके से काम क्यों नहीं किया।

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान भी गंभीर अनियमितताएं और लापरवाही सामने आईं। बैठक में यह पाया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में कुछ अधिकारी अपना दायित्व ठीक से नहीं निभा रहे हैं। इस पर कलेक्टर ने कड़ा संज्ञान लेते हुए ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) यानी बीएओ की सैलरी रोकने के निर्देश दिए हैं। वेतन रोकने की यह कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि संबंधित अधिकारी द्वारा स्वास्थ्य योजनाओं और नियमित कार्यों की मॉनिटरिंग में उदासीनता बरती जा रही थी। इसके अलावा, टीबी अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कई कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मामलों में लापरवाही को जिला प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है।

समय सीमा की बैठक का मुख्य उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को निर्धारित समय के भीतर पूर्ण करना होता है। इस बैठक में जन शिकायतों के निराकरण की स्थिति पर विशेष रूप से चर्चा हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान गुणवत्तापूर्ण तरीके से और तय समय सीमा के भीतर किया जाना चाहिए। यदि कोई जन शिकायत बिना ठोस कारण के लंबित पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बैठक में पाया गया कि कुछ विभागों में जन शिकायतों के निपटारे की गति संतोषजनक नहीं थी, जिसके बाद कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए।

भू-अर्जन से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा भी इस बैठक का एक अहम हिस्सा था। जिले में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की गई। भू-अर्जन के मामलों में किसानों और भूमि स्वामियों को मिलने वाले मुआवजे तथा कानूनी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और तेज गति से पूरा करने के निर्देश राजस्व विभाग के अधिकारियों को दिए गए। किसी भी प्रकरण में अनावश्यक विलंब न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर ने कहा कि नियमित रूप से फाइलों की समीक्षा की जाए और बाधा उत्पन्न करने वाले बिंदुओं को तुरंत दूर किया जाए।

सागर कलेक्टर द्वारा की गई इस व्यापक कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। बंडा तहसीलदार को नोटिस थमाने, बीएओ की सैलरी रोकने और टीबी अधिकारी समेत अन्य पर कार्रवाई के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि जिला प्रशासन अब कामकाज में शिथिलता को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है। बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी विभागाध्यक्षों और अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे अपने-अपने विभागों की लंबित कार्यों की सूची तैयार करें और अगली समय सीमा बैठक तक उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं। जो अधिकारी या कर्मचारी भविष्य में भी अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ और भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यह पहली बार नहीं है जब सागर जिला प्रशासन ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर सख्ती दिखाई हो, लेकिन एक साथ इतने अधिकारियों पर कार्रवाई और वेतन रोकने जैसे कदम ने यह संदेश दे दिया है कि शासन की मंशा के अनुरूप काम न करने वालों के लिए जिले में कोई जगह नहीं है। समय सीमा बैठकें प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का सबसे सशक्त माध्यम मानी जाती हैं, और सागर कलेक्टर द्वारा इस बैठक में लिए गए निर्णयों से जिले की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।