सेंसेक्स 243 अंक गिरकर 72,529 पर बंद, निफ्टी भी 64 अंक फिसला; शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट जारी

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 29 सितंबर 2026 को बिकवाली का दबाव स्पष्ट रूप से देखा गया और प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 243 अंकों की गिरावट दर्ज करते हुए 72,529 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स भी 64 अंक नीचे आया। इस गिरावट के साथ ही भारतीय इक्विटी बाजारों में लगातार आठवें हफ्ते भी नकारात्मक रुझान जारी रहा, जो मौजूदा बाजार धारणा की कमजोरी और निवेशकों के बीच व्याप्त अनिश्चितता को रेखांकित करता है।
कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और दिन के मध्य में सेंसेक्स ने 500 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की थी। एक समय पर सेंसेक्स 72,250 के निचले स्तर तक फिसल गया था, जबकि निफ्टी में भी करीब 150 अंकों की गिरावट देखी गई थी। हालांकि, कारोबार के अंतिम घंटों में कुछ रिकवरी आई, जिससे सूचकांक अपने दिवसीय निम्नतम स्तर से ऊपर बंद होने में सफल रहे, लेकिन समाप्ति पर नुकसान स्पष्ट था। यह आंतरिक सुधार बाजार में मौजूद अस्थिरता और खरीदारी के अवसर तलाशने वाले कुछ निवेशकों की सक्रियता का संकेत देता है, लेकिन समग्र रुझान अभी भी मंदी वाला बना हुआ है।
शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते की गिरावट एक महत्वपूर्ण सांख्यिकीय और मनोवैज्ञानिक पहलू है। आमतौर पर बाजार में इतनी लंबी अवधि तक लगातार गिरावट दुर्लभ होती है और यह संस्थागत निवेशकों तथा खुदरा निवेशकों दोनों की सतर्कता को दर्शाती है। पिछले दो महीनों से जारी इस नकारात्मक क्रम ने कई स्टॉक्स के मूल्यांकन को प्रभावित किया है और पोर्टफोलियो रिटर्न पर असर डाला है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जब तक कोई ठोस सकारात्मक उत्प्रेरक या नीतिगत स्पष्टता सामने नहीं आती, तब तक इस प्रवृत्ति में त्वरित बदलाव की संभावना कम दिखाई देती है।
आज के कारोबार में गिरावट के पीछे कई कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने घरेलू बाजार की धारणा को कमजोर किया है। इसके अलावा, आगामी तिमाही नतीजों से पहले कंपनियों की आय वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मुद्रास्फीति के आंकड़ों और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर भी बाजार में चिंताएं बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर इक्विटी मूल्यांकन पर पड़ रहा है। ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की आशंका ने विशेष रूप से रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं जैसे ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बनाया हुआ है।
क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो आज के सत्र में अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और आईटी सेक्टर में बिकवाली का दबाव अधिक रहा, क्योंकि ये भारी वजन वाले स्टॉक्स हैं और इनमें गिरावट का असर समग्र सूचकांक पर तुरंत दिखाई देता है। दूसरी ओर, कुछ डिफेंसिव सेक्टर्स और कम मार्केट कैप वाली कंपनियों में सीमित खरीदारी देखी गई, लेकिन यह खरीदारी बाजार को हरित निशान पर लाने के लिए पर्याप्त नहीं थी। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई, जो यह दर्शाता है कि जोखिम लेने की क्षमता (रिस्क एपेटाइट) वर्तमान में सभी श्रेणियों में कम है।
तकनीकी दृष्टिकोण से, सेंसेक्स का 72,529 पर बंद होना और निफ्टी का 64 अंक नीचे आना महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों के निकट है। यदि आने वाले सत्रों में ये स्तर टूटते हैं, तो बाजार में और गहराई तक सुधार की संभावना बढ़ सकती है। इसके विपरीत, यदि बाजार इन स्तरों पर स्थिरता दिखाता है और वॉल्यूम के साथ खरीदारी आती है, तो यह एक अल्पकालिक राहत रैली का संकेत हो सकता है। हालांकि, मौजूदा ट्रेंड लाइन और मूविंग एवरेज अभी भी मंदी की ओर इशारा कर रहे हैं, इसलिए किसी भी तेजी को फिलहाल ‘डेड कैट बाउंस’ या तकनीकी सुधार के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि प्रवृत्ति परिवर्तन के रूप में।
निवेशकों के लिए मौजूदा परिस्थितियों में सतर्कता और अनुशासन आवश्यक है। बाजार में अस्थिरता अधिक है और इंट्राडे स्विंग्स बड़े हैं, इसलिए बिना उचित जोखिम प्रबंधन के ट्रेडिंग करना हानिकारक हो सकता है। दीर्घकालिक निवेशकों को गुणवत्तापूर्ण स्टॉक्स में चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करने की सलाह दी जाती है, लेकिन उन्हें भी अपनी होल्डिंग्स की नियमित समीक्षा करनी चाहिए। अल्पकालिक कारोबारियों को तकनीकी स्तरों और वॉल्यूम पैटर्न पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। कुल मिलाकर, 29 सितंबर 2026 का कारोबारी सत्र इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय शेयर बाजार अभी भी एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है और लगातार आठवें हफ्ते की गिरावट ने निवेशकों के धैर्य की परीक्षा जारी रखी हुई है। बाजार की अगली दिशा वैश्विक संकेतों, कॉर्पोरेट नतीजों और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी।

