Wed, 07 Oct 202611:33 AM
Wed, Oct 7, 2026Updated 11:33 AM IST
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शाजापुर मंडी में सोयाबीन खरीदी अचानक बंद होने पर किसानों का हंगामा, गेट पर जड़ा ताला और किया चक्काजाम; विधायक अरुण भीमावत से की शिकायत

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शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में स्थित कृषि उपज मंडी में मंगलवार को अचानक सोयाबीन की खरीदी बंद हो जाने के कारण किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिला। खरीदी प्रक्रिया बीच में ही रोक दिए जाने से नाराज किसानों ने मंडी के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान किसानों ने स्थानीय विधायक अरुण भीमावत तक अपनी शिकायत पहुंचाई और खरीदी प्रक्रिया को तत्काल फिर से शुरू करने की मांग की।

मंगलवार को शाजापुर कृषि उपज मंडी में सुबह से ही सोयाबीन की खरीदी चल रही थी। किसान अपने-अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली और वाहनों में सोयाबीन भरकर मंडी पहुंचे थे। कई किसानों ने अपनी फसल को मंडी प्रांगण में उतार लिया था और नीलामी व तौल की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, दिन के दौरान अचानक सोयाबीन की खरीदी प्रक्रिया को रोक दिया गया। खरीदी बंद होने की सूचना मिलते ही मंडी में मौजूद किसानों में हड़कंप मच गया। जो किसान दूर-दराज के गांवों से अपनी फसल लेकर आए थे, वे अचानक खरीदी बंद होने से परेशान हो गए। उनके सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि भारी मात्रा में लाए गए सोयाबीन को वापस कैसे ले जाया जाए या मंडी में ही छोड़ दिया जाए।

खरीदी अचानक बंद होने से नाराज किसान एकजुट हो गए और उन्होंने मंडी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित किसानों ने मंडी के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया, जिससे मंडी के अंदर और बाहर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया। इसके बाद किसानों ने मंडी के बाहर सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम के कारण उस मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। किसानों का कहना था कि बिना किसी पूर्व सूचना के खरीदी बंद करना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे अपनी मेहनत की फसल को बेचने के लिए मंडी पहुंचे हैं, तो उन्हें बिना खरीदी किए वापस नहीं लौटना चाहिए।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने इस पूरे मामले की शिकायत क्षेत्रीय विधायक अरुण भीमावत से की। किसानों ने विधायक को बताया कि मंडी में किस प्रकार अचानक खरीदी रोक दी गई और उन्हें कितनी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने विधायक अरुण भीमावत से मांग की कि वे तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करें ताकि मंडी में सोयाबीन की खरीदी प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जा सके और उनका अटका हुआ माल बिक सके। विधायक से शिकायत करते हुए किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और व्यवस्था में सुधार की गुहार लगाई।

शाजापुर जिला मध्य प्रदेश के प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में से एक है और यहां सोयाबीन की फसल बड़े पैमाने पर बोई जाती है। सोयाबीन इस क्षेत्र के किसानों की आय का सबसे बड़ा साधन माना जाता है। ऐसे में मंडी में खरीदी प्रक्रिया का अचानक बाधित होना किसानों के लिए बड़ी आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बनता है। किसानों को अपनी फसल की बुआई, कटाई और ढुलाई में काफी खर्च करना पड़ता है। जब वे मंडी पहुंचते हैं तो उन्हें उम्मीद होती है कि उनकी फसल की उचित कीमत मिलेगी और वे समय पर घर लौट सकेंगे। लेकिन खरीदी बंद होने से उनकी इन उम्मीदों को झटका लगा।

इस पूरे घटनाक्रम में मंडी प्रशासन की ओर से खरीदी बंद किए जाने के स्पष्ट कारणों की जानकारी स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि खरीदी तकनीकी कारणों से रोकी गई, अधिक आवक के कारण रोकी गई, या किसी अन्य प्रशासनिक वजह से इस पर रोक लगाई गई। हालांकि, किसानों के तीव्र विरोध और चक्काजाम के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मंडी गेट पर ताला लगने और सड़क जाम होने से आम जनता और व्यापारियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा।

किसानों का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि कृषि उपज मंडियों में खरीदी व्यवस्था को लेकर किसानों में कितनी संवेदनशीलता है। विशेषज्ञों और किसान संगठनों का मानना है कि यदि खरीदी बंद करनी भी हो, तो किसानों को पहले से सूचित किया जाना चाहिए ताकि वे अनावश्यक रूप से अपनी फसल लेकर मंडी तक का सफर तय न करें। बिना सूचना के खरीदी बंद होने से किसानों के समय, ईंधन और श्रम की हानि होती है।

शाजापुर मंडी में मंगलवार को हुए इस हंगामे ने एक बार फिर कृषि उपज मंडियों में खरीदी व्यवस्था की सुचारू कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधायक अरुण भीमावत से की गई शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और किसानों की मांगों का समाधान किस प्रकार किया जाता है। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी समस्या का निराकरण नहीं होता और खरीदी सुचारू रूप से शुरू नहीं होती, उनका आक्रोश बना रहेगा।