ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले को 5 दिन हो गए। एक हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। 10 और देश इस जंग की जद में हैं। इजराइल के धुरविरोधी विपक्षी नेता भी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ईरान पर 8 महीने में दूसरी बार किए हमले का समर्थन कर रहे हैं।
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दैनिक भास्कर ने इजराइल के विपक्षी दल येश अतीद की सांसद शैली टाल मेरोन से बात की। प्रधानमंत्री नेतन्याहू लिकुद पार्टी के हैं, जो दक्षिणपंथी रुझान रखती है। येश अतीद सेंटर लेफ्ट लिबरल पार्टी है। इजराइल की खासियत यही है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर यहां सेंटर, लेफ्ट, राइट नहीं देखा जाता। देखिए और पढ़िए इजराइल की विपक्षी सांसद शैली से खास बातचीत…

सवाल: इजराइल ने एक साल में दूसरी बार ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा है, वजह न्यूक्लियर हथियार होना बताया। इस संघर्ष का अंतिम लक्ष्य क्या है, ये हमेशा के लिए कब रुकेगा? जवाब: एक दिन पहले ही हमने देखा कि एक ईरानी मिसाइल सिनागॉग (यहूदियों की इबादतगाह) पर गिरी और वो जगह तबाह हो गई। 9 लोगों की मौत हुई और कई घायल हो गए। मैंने खुद वहां का दौरा किया और देखा कि एक बैलेस्टिक मिसाइल कितनी तबाही करती है। हमें ये समझना होगा कि सिर्फ न्यूक्लियर बम ही हमारे लिए खतरा नहीं है, बल्कि बैलेस्टिक मिसाइल भी बड़ा खतरा है।
हमें दूसरी बार ईरान पर ऑपरेशन अमेरिका के साथ मिलकर इसलिए करना पड़ा ताकि हम ईरान को न्यूक्लियर बम बनाने से रोक पाएं या बैलेस्टिक मिसाइल प्लान पर काम करने से रोक पाएं। ईरान के पास 20 हजार बैलेस्टिक मिसाइल बताई जाती हैं। और अगर इतनी मिसाइल हैं, तो ये एक तरह से परमाणु बम ही है।
इजराइल ईरान की दोनों क्षमताओं को खत्म करेगा। हमें ईरानी लोगों से नफरत नहीं है, वे हमारे भाई-बहन की तरह हैं। हम उनकी भलाई की कामना करते हैं।

हमारा मानना है कि अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता हटेगी और फिर ईरान शांतिप्रिय देश बनेगा। खामेनेई की सत्ता ने अपने ही 30 हजार लोगों की हत्या की है। आप सोच सकते हैं कि वो दूसरे देश के लोगों के साथ क्या करते हैं। हम पिछले 5 दिन से देख रहे हैं कि वे अपने अरब पड़ोसियों पर ही हमले कर रहे हैं। ये सिर्फ इजराइल-अमेरिका की बात नहीं, पूरी दुनिया की बात है।
सवाल: कभी न्यूक्लियर प्रोग्राम, कभी सरकार बदलना, और अब मिसाइल प्रोग्राम खत्म करना, बार-बार लक्ष्य बदल रहा है, ऐसा क्यों? जवाब: हम एक साथ कई सारी चीजों पर काम कर रहे हैं। मिलिट्री के स्तर पर न्यूक्लियर और बैलेस्टिक मिसाइल ठिकानों को स्ट्राइक कर तबाह करना है। ये मिलिट्री एक्शन हम इसलिए कर रहे हैं, ताकि ये ईरान के लोगों के लिए सत्ता पलटने की जमीन तैयार करे।

इजराइल का सत्ता पलटने में पूरी तरह नियंत्रण नहीं है, लेकिन ईरान के लोगों के पास सत्ता पलटने के लिए सारा इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, ताकि वे नई सरकार के साथ आम जिंदगी जी सकें। ऐसी सरकार जो लोगों की मदद करें, न कि उन्हें प्रदर्शन करते हुए मार दे। एक तरफ हम मिलिट्री एक्शन कर रहे हैं, दूसरा काम वहां के लोगों को करना है।
सवाल: इजराइल-अमेरिका की स्ट्राइक से ईरान में सत्ता बदलने के लिए माहौल बनेगा? जवाब: हमें यही उम्मीद है, लेकिन मैं अपने स्तर पर ये बात नहीं कह सकती कि सत्ता परिवर्तन होगा या नहीं। हमें लगता है कि ईरान में खामेनेई का न होना ईरान के लिए बेहतर भविष्य होगा।
सवाल: युद्ध में इजराइल और ईरान के साथ पश्चिम एशिया के अलग-अलग मुल्कों में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है। आपको नहीं लगता कि अगर युद्ध आगे खिंचा, तो बड़े पैमाने पर नुकसान होगा? जवाब: आम नागरिकों के मारे जाने पर मुझे बहुत दुख होता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। अमेरिका और इजराइल ने जानबूझकर नागरिकों पर हमला नहीं किया। हमारा लक्ष्य मिलिट्री और सत्ता के ठिकाने हैं। ईरान सिर्फ नागरिकों पर ही हमला कर रहा है। वो इजराइल को खत्म करना चाहता है।

सवाल: ईरान कह रहा है कि इजराइल ने अपने हित के लिए अमेरिका को युद्ध में खींच लिया। आपका इस पर क्या कहना है? जवाब: ईरान झूठ बोल रहा है। हम उसके किसी भी आरोप को गंभीरता से नहीं लेते। ईरान ने पूरी दुनिया में प्रॉक्सी खड़े किए हैं। हूती, हिजबुल्ला और हमास जैसे सभी आतंकी संगठन ईरानी सत्ता से ही चलते हैं। ईरानी सत्ता सरकार नहीं है, बल्कि आतंकी सरगना है, जो दुनियाभर मे आतंकी संगठन तैयार कर रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इजराइल ने अमेरिका का साथ दिया, न कि अमेरिका ने इजराइल का साथ दिया। ईरान तेजी से बैलेस्टिक मिसाइल बना रहा था। वो तेजी से यूरेनियम का भंडारण कर रहे थे। ईरान की पहुंच एशिया से लेकर यूरोप तक हो चुकी थी। मैं अमेरिका के प्रशासन और ट्रम्प का धन्यवाद करती हूं। इजराइल और अमेरिका मिलकर दुनिया बचाने की कोशिश में लगे हैं।
सवाल: पिछले साल जून में इजराइल ने ईरान पर हमला किया था, तब और इस बार के युद्ध में क्या फर्क दिख रहा है? जवाब: इजराइल के लोग धाकड़ लोग हैं। हम जानते हैं कि युद्ध में कैसे एकजुट रहना है। दोनों ऑपरेशन पेचीदा रहे हैं, लेकिन हमने बहादुरी दिखाई है। पिछली बार वे एक ही बार में ज्यादा मिसाइलें दाग रहे थे। इस बार वे कई बार में थोड़ी-थोड़ी मिसाइलें दाग रहे हैं। हमने इजराइल में ईरान और हिजबुल्ला दोनों तरफ से एक साथ, एक ही समय में मिसाइलें झेली हैं।
इस बार दुनिया समझ गई है कि ये लड़ाई हमें कामयाबी के साथ खत्म करनी है। हमें परमाणु बम-बैलेस्टिक मिसाइल का खात्मा और सत्ता परिवर्तन दोनों ही करना है।

ईरान ने इस युद्ध में अपने साथ हिजबुल्ला को उतार दिया है। हम लेबनान के लोगों से भी कहेंगे कि हम उनके साथ हैं। हिजबुल्ला लेबनान को जंग में ले जा रहा है।

सवाल: क्या आपको नहीं लगता कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए बूट्स ऑन द ग्राउंड मतलब सैनिकों को जमीन पर उतारकर लड़ाई लड़नी होगी। क्या इजराइल-अमेरिका जमीनी ऑपरेशन के लिए तैयार हैं? जवाब: मैं अमेरिका की तरफ से बात नहीं कर सकती। वे खुद अपना फैसला लेंगे। मैं इंटरव्यू में नहीं बता सकती कि जमीन पर लड़ाई के लिए सैनिक उतारने होंगे कि नहीं। हम ये चर्चा अंदरूनी स्तर पर करेंगे और वक्त आने पर अमेरिका के साथ करेंगे। आर्मी हर तरह की चुनौती के लिए तैयार है।
सवाल: ईरान कह रहा है कि वो 6 महीने के युद्ध के लिए तैयार हैं। 6 महीने नहीं, लेकिन एक महीने भी जंग चलती है, तो इजराइल को भी बहुत नुकसान होगा? जवाब: मैं इस ऑपरेशन के लिए समयसीमा नहीं बता सकती। मुझे नहीं पता कि क्या होगा। मुझे लगता है कि हमें अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए वक्त चाहिए। कोई लंबा युद्ध नहीं चाहता। इजराइल ने युद्ध में बहुत कुछ खोया है। भविष्य के लिए जो भी जरूरी होगा, हम वो करेंगे।
सवाल: युद्ध शुरू होने के लिए दो दिन पहले ही PM मोदी इजराइल में स्टेट विजिट पर थे। युद्ध के बीच इजराइल में भारत को लेकर क्या बात हो रही है? जवाब: पीएम मोदी का दौरा ऐतिहासिक रहा है। हमने उन्हें संसद में सम्मान दिया। उन्होंने शानदार भाषण दिया। हमने ट्रेड, स्पेस, मिलिट्री, एआई, एग्रीकल्चर जैसे मुद्दों पर सहयोग का वादा किया है। दोनों देश एक दूसरे की मदद के लिए खड़े हैं।

सवाल: इस युद्ध में भारत अमेरिका और इजराइल के साथ खड़ा दिख रहा है। युद्ध के बीच आप भारत के लोगों और सरकार से क्या कहेंगी? जवाब: भारत के लोग इजराइल का दर्द समझ सकते हैं, क्योंकि हम दोनों ही आतंक से परेशान हैं। 1948 में इजराइल बनने के बाद से हम पर आतंक का साया रहा। हम आतंक के खिलाफ और लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं। हमारी टेरर को लेकर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। हमें इस पर एकजुट रहना चाहिए। मैं भारत के साथ के लिए शुक्रिया अदा करती हूं।
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ईरान के थिंक टैंक डिप्लोमैटिक हाउस के डायरेक्टर हामिद रेजा गोलामजादेह कहते हैं कि ईरान ने 6 महीने जंग की तैयारी कर रखी है। अमेरिका अभी से नेवी पीछे हटाने लगा है। अभी ईरान पुरानी मिसाइलें ही इस्तेमाल कर रहा है, मॉडर्न मिसाइलें तो बाकी हैं। पढ़िए पूरी खबर…
2. ईरान पर अजरबैजान में ड्रोन हमले का आरोप, अजरबैजानी राष्ट्रपति बोले- माफी मांगो

अजरबैजान ने खुद पर हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा कि इस घटना पर ईरान को माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार एक ड्रोन नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन से टकराया। एयरपोर्ट टर्मिनल को नुकसान पहुंचा है। पढ़िए पूरी खबर…















