धनबाद : जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज के पौत्र श्री नीलमणि जी ने तृतीय दिवस के प्रवचन में किया “महापुरुष तत्व” पर प्रकाश

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धनबाद, 12 नवंबर 2025 —विश्व के पंचम मूल जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज के पौत्र श्री नीलमणि जी महाराज ने तृतीय दिवस के प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं को “महापुरुष तत्व” पर विस्तृत रूप से मार्गदर्शन दिया।प्रवचन के दौरान श्री नीलमणि जी ने कहा कि जैसा कि पिछले दो दिनों में बताया गया, विश्व का प्रत्येक जीव ईश्वर का अंश है, क्योंकि वेदों में कहा गया है कि “आनंद ही ईश्वर है” — वह केवल आनंदमय नहीं, बल्कि स्वयं आनंद स्वरूप है। इसी कारण प्रत्येक जीव आनंद की ही तलाश में रहता है और उसी की प्राप्ति से वह पूर्णता का अनुभव कर सकता है।

उन्होंने कहा कि जब जीव ईश्वर को जानने का प्रयास करता है तो उसे ज्ञात होता है कि ईश्वर इन्द्रिय, मन और बुद्धि से परे हैं, और उन्हें समझ पाना महानतम बुद्धिमानों के लिए भी संभव नहीं। परंतु शास्त्र बताते हैं कि भगवान की कृपा से ही भगवान को जाना जा सकता है, और यह कृपा केवल शरणागति से प्राप्त होती है।

श्री नीलमणि जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को सबसे पहले एक श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष की शरण में जाना चाहिए। उनकी कृपा से ही ईश्वर-ज्ञान संभव है। उन्होंने समझाया कि जैसी भक्ति भगवान के प्रति होती है, वैसी ही परा भक्ति यदि गुरु के प्रति हो जाए, तो साधक वेदांत में वर्णित ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त कर सकता है।प्रवचन के अंत में उन्होंने यह भी कहा कि महापुरुषों के कर्म का कर्ता स्वयं भगवान होते हैं, इसलिए उनका प्रत्येक कार्य दिव्य और प्रेरणादायक होता है।इस दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और श्री नीलमणि जी महाराज के उपदेशों को सुनकर भाव-विभोर हो उठे। वातावरण “राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठा।

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