सीधी का मुक्तिधाम अब बदलेगा अपना स्वरूप: पार्क बनेगा, दाह संस्कार के लिए लकड़ी भी मिलेगी, जनसहयोग से होगा विकास

सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित मुक्तिधाम को अब एक सर्वसुविधायुक्त और आदर्श स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत करते हुए सीधी जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा ने रविवार को प्रशासनिक टीम के साथ मुक्तिधाम का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान रेनोवेशन यानी पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण की योजना पर गहन चर्चा की गई। प्रशासन की ओर से तैयार की जा रही इस योजना के तहत मुक्तिधाम के समग्र स्वरूप को बदला जाएगा, ताकि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें एक शांत, स्वच्छ तथा व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
रविवार को कलेक्टर विकास मिश्रा ने अपने प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ मुक्तिधाम पहुंचकर मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पूरे परिसर का भ्रमण किया और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन किया। इस निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर रेनोवेशन की विस्तृत योजना पर चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि मुक्तिधाम के विकास का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि आमजन को बेहतर सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जा सकें। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह स्थल केवल दाह संस्कार की जगह नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा स्थान है जहां लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देते हैं, इसलिए यहां की गरिमा और साफ-सफाई बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
मुक्तिधाम के आधुनिकीकरण की इस योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल किए गए हैं। सबसे प्रमुख बात यह है कि मुक्तिधाम परिसर में एक सुंदर और हरा-भरा पार्क विकसित किया जाएगा। इस पार्क के बन जाने से परिसर का संपूर्ण स्वरूप बदल जाएगा और वहां का वातावरण अधिक शांत तथा अनुकूल हो जाएगा। इसके अलावा, परिजनों को होने वाली एक बड़ी समस्या का समाधान करते हुए यह व्यवस्था की जाएगी कि दाह संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी अब मुक्तिधाम परिसर में ही उपलब्ध रहेगी। अक्सर देखा जाता है कि किसी के निधन के बाद परिजन शोक में डूबे होते हैं और ऐसे समय में दाह संस्कार के लिए लकड़ी की व्यवस्था करना उनके लिए एक अतिरिक्त भारी बोझ होता है। प्रशासन की इस नई पहल से परिजनों को इस कठिनाई से राहत मिलेगी और उन्हें अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी।
इस पूरे विकास कार्यों को जनसहयोग से संपन्न करने की योजना बनाई गई है। कलेक्टर विकास मिश्रा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मुक्तिधाम जैसे सार्वजनिक और धार्मिक महत्व के स्थलों का विकास केवल सरकारी खजाने या प्रशासनिक प्रयासों से ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी से ही पूर्ण रूप से संभव है। उन्होंने स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और दानदाताओं से अपील की है कि वे इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। जनसहयोग से किए जाने वाले इस विकास कार्य में लोगों को आर्थिक सहयोग के साथ-साथ अन्य प्रकार की मदद देने का भी अवसर प्राप्त होगा। प्रशासन का मानना है कि जब समाज खुद अपने श्मशान घाट और मुक्तिधाम के विकास में जुड़ेगा, तो उसकी देखरेख और रखरखाव भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।
मुक्तिधाम के रेनोवेशन के तहत पार्क के निर्माण और लकड़ी की उपलब्धता के अलावा अन्य कई बुनियादी सुविधाओं को भी दुरुस्त किया जाएगा। हालांकि, अभी तक प्रशासन की ओर से अन्य विशिष्ट सुविधाओं की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह तय है कि परिसर में साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और बैठने की उचित जगह जैसी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशासनिक टीम ने निरीक्षण के दौरान उन सभी बिंदुओं को चिह्नित किया है जहां तत्काल सुधार की आवश्यकता है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विकास की एक विस्तृत रूपरेखा तैयार करें, जिसमें लागत, समय सीमा और कार्य की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए।
सीधी शहर के मुक्तिधाम के इस आधुनिकीकरण अभियान को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध दिखाई दे रहा है। कलेक्टर विकास मिश्रा की इस पहल से न केवल मुक्तिधाम का कायाकल्प होगा, बल्कि शहर के निवासियों को भी एक आदर्श और सुविधाजनक स्थल मिलेगा। यह कदम प्रशासन की जनहितैषी सोच और सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है। आने वाले दिनों में इस रेनोवेशन योजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है और जनसहयोग जुटाने के लिए भी प्रशासन द्वारा जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। सीधी के मुक्तिधाम का यह नया स्वरूप अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे जनभागीदारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति से सार्वजनिक स्थलों को आदर्श रूप में विकसित किया जा सकता है।

