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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:47 PM IST
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सिवनी: कुरई वन क्षेत्र में मवेशी चराने गए 62 वर्षीय बुजुर्ग पर बाघ ने किया जानलेवा हमला, मौके पर ही हुई दर्दनाक मौत; वन विभाग और पुलिस ने शुरू की जांच

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वन्दे भारत न्यूज़, सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित कुरई वन क्षेत्र से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां सोमवार दोपहर को मवेशियों को चराने के लिए जंगल गए एक 62 वर्षीय बुजुर्ग पर एक बाघ ने अचानक हमला कर दिया। इस भयानक हमले में बुजुर्ग की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और कुरई थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची तथा घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह घटना जिले के पिंडरई बीट क्षेत्र में हुई, जो वन्यजीवों की गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।

मृतक की पहचान सिवानकन्हार ग्राम पंचायत के रमपुरी गांव निवासी सुम्मर लाल (62 वर्ष) के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुम्मर लाल सोमवार की दोपहर अपने मवेशियों को चराने के लिए घर से निकले थे। वे रोजमर्रा की तरह अपने पशुओं को लेकर पिंडरई बीट क्षेत्र की ओर गए, जहां आमतौर पर ग्रामीण अपने मवेशियों को चराने ले जाते हैं। दोपहर के समय जब सुम्मर लाल अपने मवेशियों की देखरेख कर रहे थे, तभी अचानक एक बाघ ने उन पर पीछे से या झाड़ियों की ओट से हमला बोल दिया। बाघ का हमला इतना ताकतवर और अचानक था कि बुजुर्ग सुम्मर लाल खुद को बचा नहीं पाए और उनकी मौके पर ही प्राणपखेरू उड़ गए।

इस घटना के बाद जंगल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जब सुम्मर लाल काफी देर तक घर नहीं लौटे और अन्य ग्रामीणों या मवेशियों के झुंड के बिना रखवाले के वापस आने की खबर मिली, तो परिजनों और गांव वालों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद ग्रामीणों द्वारा खोजबीन शुरू की गई। खोजबीन के दौरान पिंडरई बीट क्षेत्र में सुम्मर लाल का शव बरामद हुआ, जिस पर बाघ के हमले के स्पष्ट निशान मौजूद थे। यह दृश्य देखकर ग्रामीणों में दहशत फैल गई।

घटना की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन, कुरई थाना पुलिस और वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की एक टीम, साथ ही कुरई थाने की पुलिस फोर्स तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई। दोनों विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और उन्होंने पूरे घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। वन विभाग की टीम ने बाघ के पगमार्क (पैरों के निशान) और अन्य साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया ताकि यह पुष्टि की जा सके कि हमला करने वाला वन्यजीव बाघ ही था और उसकी दिशा क्या रही होगी। वहीं, कुरई थाना पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर पंचनामा तैयार किया और मामले की जांच शुरू कर दी।

सिवनी जिला मध्य प्रदेश के उन क्षेत्रों में आता है जो कान्हा टाइगर रिजर्व और पेंच टाइगर रिजर्व जैसे प्रमुख व्याघ्र अभयारण्यों के बफर और कॉरिडोर क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। इन क्षेत्रों में बाघों की अच्छी खासी आबादी पाई जाती है। हालांकि वन्यजीवों की बढ़ती संख्या संरक्षण के लिहाज से एक उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन इसके साथ ही जंगल से सटे गांवों में मवेशी चराने जाने वाले ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच आमना-सामना होने की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। कुरई वन क्षेत्र और पिंडरई बीट ऐसे ही इलाकों में शामिल हैं, जहां ग्रामीणों को अपने मवेशियों को चराने के लिए जंगल की सीमा में प्रवेश करना पड़ता है, जिससे उनके जीवन और संपत्ति को लगातार खतरा बना रहता है।

बुजुर्ग सुम्मर लाल की मौत से रमपुरी गांव और सिवानकन्हार ग्राम पंचायत क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। सुम्मर लाल अपने परिवार के लिए मवेशी पालन और खेती-बाड़ी के जरिए आजीविका का साधन जुटाते थे। उनकी अचानक हुई इस दर्दनाक मौत ने परिवार की आर्थिक और भावनात्मक स्थिति को गहरा धक्का पहुंचाया है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश और दहशत दोनों देखने को मिल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों को अपने दैनिक कार्यों के लिए जंगल में जाना ही पड़ता है, लेकिन वन विभाग की ओर से उन्हें सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं सुझाए जाते।

वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और बाघ की गतिविधियों का सटीक पता नहीं चल जाता, तब तक ग्रामीणों को विशेष रूप से दोपहर और शाम के समय अकेले जंगल में न जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, मवेशियों को चराने ले जाते समय समूह में जाने और शोर मचाने वाले उपकरण साथ रखने की हिदायत दी गई है।

मृतक सुम्मर लाल के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के सही कारणों की चिकित्सकीय पुष्टि हो सके। वन विभाग के नियमानुसार, वन्यजीव के हमले में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को सरकारी मुआवजा दिए जाने का प्रावधान होता है। हालांकि, अभी तक मुआवजे की राशि या इसकी प्रक्रिया को लेकर कोई औपचारिक घोषणा प्रशासन की तरफ से नहीं की गई है। कुरई थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वन विभाग के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई कर रही है। यह घटना एक बार फिर इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष और जंगल से सटे गांवों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।