संसदीय समितियों के पुनर्गठन में TMC को बड़ा झटका, दो प्रमुख समितियों की अध्यक्षता से हाथ धोया; सुधांशु त्रिवेदी बने वाणिज्य समिति के प्रमुख

नई दिल्ली। भारतीय संसद की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संसदीय समितियों का शनिवार को नई दिल्ली में पुनर्गठन किया गया। इस फेरबदल के बाद पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है। ताजा बदलावों के तहत टीएमसी ने दो अत्यंत महत्वपूर्ण संसदीय समितियों की अध्यक्षता खो दी है। इनमें से एक वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति है, जिसके अध्यक्ष पद पर अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को नियुक्त किया गया है। उन्होंने टीएमसी की सांसद डोला सेन की जगह ली है, जो अब तक इस समिति की अध्यक्षता कर रही थीं।
संसदीय समितियों के गठन और उनके अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया भारतीय लोकतंत्र की संसदीय व्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है। संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों, नीतियों और सरकारी कार्यों की गहन जांच-पड़ताल इन्हीं समितियों द्वारा की जाती है। इसलिए किसी भी राजनीतिक दल के लिए प्रमुख संसदीय समितियों की अध्यक्षता प्राप्त करना उसकी संसदीय ताकत और प्रभाव का प्रतीक माना जाता है। शनिवार को हुए इस पुनर्गठन ने स्पष्ट कर दिया कि संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या सीमित होने के कारण उसे अपने पहले के कुछ महत्वपूर्ण पदों से हाथ धोना पड़ा है।
वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति देश के व्यापार, वाणिज्य और औद्योगिक नीतियों से जुड़े मामलों की समीक्षा करने वाली एक अत्यंत प्रभावशाली समिति है। इस समिति की अध्यक्षता से टीएमसी सांसद डोला सेन का हटना और भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी का नए अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करना, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। सुधांशु त्रिवेदी भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों और मीडिया प्रवक्ताओं में गिने जाते हैं। राज्यसभा में उनकी सक्रियता और कानूनी तथा संवैधानिक मामलों की गहरी समझ के आधार पर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी ओर, डोला सेन टीएमसी की उन नेताओं में शामिल रही हैं जिन्होंने संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन समितियों के पुनर्गठन की अनिवार्य प्रक्रिया और संसद में दलीय संख्याबल के गणित के कारण उन्हें यह पद गंवाना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम को संसद के दोनों सदनों में तृणमूल कांग्रेस की मौजूदा संख्याबल की स्थिति के संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को मिलाकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के कुल सांसदों की संख्या मात्र 16 है। संसदीय नियमों और परंपराओं के अनुसार, विभिन्न संसदीय समितियों के अध्यक्ष पदों का आवंटन आमतौर पर सदन में पार्टियों की ताकत और उनके सांसदों की संख्या के अनुपात में किया जाता है। जब किसी पार्टी के पास दोनों सदनों में मिलाकर बहुत कम सांसद होते हैं, तो उसके लिए प्रमुख समितियों की अध्यक्षता बनाए रखना संसदीय गणित के लिहाज से कठिन हो जाता है। टीएमसी के 16 सांसदों का आंकड़ा इस बात की पुष्टि करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर संसद के भीतर पार्टी का संख्याबल उतना विशाल नहीं है जितना कि पश्चिम बंगाल की राज्य राजनीति में है।
शनिवार को हुए इस पुनर्गठन में केवल वाणिज्य समिति ही नहीं, बल्कि दो बड़ी समितियों की अध्यक्षता टीएमसी से गई है। हालांकि, दूसरी समिति का नाम और उससे जुड़े अन्य सांसदों के बारे में उपलब्ध जानकारी में विस्तृत विवरण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन यह तय है कि टीएमसी को एक साथ दो मोर्चों पर संसदीय समितियों के अध्यक्ष पद गंवाने पड़े हैं। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब संसदीय कार्यवाही और विभिन्न विधेयकों पर चर्चा के लिए समितियों की भूमिका और अधिक प्रासंगिक हो गई है।
संसदीय समितियों का पुनर्गठन एक नियमित प्रक्रिया है, जो समय-समय पर होती रहती है। इसमें सांसदों के इस्तीफे, सदस्यता समाप्त होने, या दलीय संख्याबल में बदलाव जैसे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन टीएमसी के लिए यह बदलाव इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि वह विपक्षी दलों के गठबंधन में एक प्रमुख भूमिका निभाती रही है। राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी की पार्टी की मुखरता को देखते हुए, संसदीय समितियों में उनके प्रभाव का कम होना राजनीतिक विश्लेषकों की नजरों में एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
भाजपा के लिए यह पुनर्गठन अपनी संसदीय पकड़ को और मजबूत करने का अवसर है। सुधांशु त्रिवेदी जैसे अनुभवी नेताओं को वाणिज्य जैसी महत्वपूर्ण समितियों की कमान सौंपकर पार्टी ने संसदीय कार्यप्रणाली में अपनी नीतियों और दृष्टिकोण को अधिक प्रभावी ढंग से रखने की रणनीति पर काम किया है। वाणिज्य समिति का अध्यक्ष होने के नाते सुधांशु त्रिवेदी अब देश के व्यापारिक कानूनों, निर्यात-आयात नीतियों और वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा में अहम भूमिका निभाएंगे।
कुल मिलाकर, शनिवार को नई दिल्ली में हुए संसदीय समितियों के पुनर्गठन ने संसद के भीतर राजनीतिक दलों के प्रभाव का नया खाका पेश किया है। तृणमूल कांग्रेस के लिए दो प्रमुख समितियों की अध्यक्षता खोना और सुधांशु त्रिवेदी का डोला सेन की जगह वाणिज्य समिति का प्रमुख बनना, संसदीय गणित और राजनीतिक यथार्थ का स्पष्ट संदेश है। दोनों सदनों में मात्र 16 सांसदों की ताकत के साथ टीएमसी को आने वाले समय में संसदीय समितियों में अपनी भूमिका को लेकर नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। यह फेरबदल संसदीय लोकतंत्र की उसी परंपरा का हिस्सा है जहां संख्याबल और नियमों के आधार पर जिम्मेदारियों का बंटवारा होता है।

