उज्जैन: CMHO डॉ. विक्रम रघुवंशी ने कार्यभार ग्रहण करते ही जारी किए सख्त निर्देश, लापरवाही और अनियमितताओं पर होगी कड़ी कार्रवाई

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में नवनियुक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. विक्रम रघुवंशी ने पदभार ग्रहण करते ही स्वास्थ्य विभाग में सुधार और अनुशासन को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। कार्यभार संभालते ही डॉ. रघुवंशी ने अस्पताल प्रबंधन, निजी अस्पतालों, मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। नए CMHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा जारी किए गए निर्देश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनका क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा।
डॉ. विक्रम रघुवंशी ने व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सबसे पहले मरीजों की सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि बाह्य रोगी विभाग (OPD), जांच, दवा वितरण, भर्ती प्रक्रिया और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मरीजों को इधर-उधर भटकना न पड़े। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को एक सेवा से दूसरी सेवा तक पहुंचने में काफी समय और परेशानी का सामना करना पड़ता है। डॉ. रघुवंशी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया है कि वे ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करें जिससे मरीजों को सभी आवश्यक सेवाएं एक ही स्थान पर या सुगमता से उपलब्ध हो सकें। मरीजों के समय और सम्मान का ध्यान रखना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है और इसमें कोई कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।
नए CMHO ने शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया है कि मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों के समाधान के लिए एक प्रभावी और पारदर्शी प्रणाली स्थापित की जाए। यदि कोई मरीज या आमजन स्वास्थ्य सेवाओं से असंतुष्ट है या उसे किसी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो उसकी शिकायत का त्वरित और निष्पक्ष निराकरण किया जाना चाहिए। शिकायतों को दबाने या उन पर ध्यान न देने की प्रवृत्ति पर अब लगाम लगाई जाएगी। डॉ. रघुवंशी का मानना है कि जनता का विश्वास जीतने के लिए जवाबदेही और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है।
निजी अस्पतालों और बिना लाइसेंस संचालित हो रहे स्वास्थ्य केंद्रों के खिलाफ भी नए CMHO ने सख्त रुख अपनाया है। उज्जैन जैसे धार्मिक और पर्यटन नगर में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन यह जरूरी है कि वे सभी नियमों और मानकों का पालन करें। डॉ. रघुवंशी ने स्पष्ट किया है कि जो निजी अस्पताल या क्लीनिक बिना वैध लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं या निर्धारित मानकों की अवहेलना कर रहे हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रूप से निरीक्षण और अनुश्रवण करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अवैध या अनियमित संचालन पर तत्काल अंकुश लगाया जा सके।
स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति भी डॉ. रघुवंशी का संदेश स्पष्ट है। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्यकर्मी समाज सेवा के पुनीत कार्य में लगे हैं और उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। हालांकि, यह भी अपेक्षा की गई है कि विभाग उनकी समस्याओं और सुझावों को भी गंभीरता से सुनेगा। लेकिन साथ ही, ड्यूटी में लापरवाही, अनुपस्थिति या मरीजों के प्रति असंवेदनशील व्यवहार को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा। अनुशासन और सेवाभाव दोनों का संतुलन बनाए रखना ही विभाग का लक्ष्य है।
डॉ. विक्रम रघुवंशी ने पदभार ग्रहण के तुरंत बाद जो तेवर दिखाए हैं, उससे स्पष्ट है कि उज्जैन के स्वास्थ्य तंत्र में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। उनका यह बयान कि ‘निर्देश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे’, विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब कार्यसंस्कृति में वास्तविक परिवर्तन की अपेक्षा है। मरीजों को बेहतर सेवाएं मिलें, शिकायतों का समय पर निदान हो, और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई हो—ये तीन स्तंभ अब उज्जैन स्वास्थ्य विभाग की नई कार्ययोजना के आधार होंगे। आने वाले दिनों में इन निर्देशों का व्यावहारिक क्रियान्वयन कैसे होता है और इससे आमजन को कितना लाभ मिलता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, नए CMHO की सक्रियता और स्पष्ट नीति से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जगी है।

