धनबाद साहित्य जगत में शोक की लहर: वरिष्ठ साहित्यकार नारायण सिंह का निधन

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धनबाद: हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित अनुवादक, लेखक और बीसीसीएल की गृह पत्रिका ‘कोयला भारती’ के लगभग तीन दशक तक संपादक रहे वरिष्ठ साहित्यकार नारायण सिंह का शनिवार को पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके देहांत से धनबाद कोयलांचल तथा देश के साहित्यिक समुदाय में गहरा शोक छा गया है।

बिहार के छपरा (बलिया) के मूल निवासी नारायण सिंह ने लगभग 45 वर्षों तक साहित्य सेवा में अद्वितीय योगदान दिया। उनकी 50 कहानियां, 157 निबंध, लेख और समीक्षाएं विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में प्रकाशित हुईं। उनकी 17 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है और साहित्य को समर्पित उनके कार्यों ने उन्हें बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।

‘आवाज’, ‘प्रभात खबर’, ‘रांची एक्सप्रेस’, ‘हिंदुस्तान’ जैसे कई प्रमुख समाचार पत्रों ने उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित किया था। गांधीवादी विचारों से प्रभावित नारायण सिंह को साहित्य जगत में एक विद्वान विचारक के रूप में जाना जाता था।

उनके निधन की खबर से धनबाद में गहरा शोक व्याप्त है। सामाजिक साहित्यकार जागरूकता मंच, धनबाद की ओर से एक शोकसभा आयोजित की गई, जिसमें अनेक साहित्यकारों, शिक्षकों और पत्रकारों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में राजेश राय, डॉ. संगीता नाथ, डॉ. नीरा प्रसाद, डॉ. रत्ना वर्मा, रविंद्र उपाध्याय, प्रमिला श्री तिवारी, रिंकू दुबे ‘वैष्णवी’, उमेश तिवारी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

साहित्यिक समुदाय का मानना है कि नारायण सिंह का योगदान अमिट है और उनकी रचनाएँ तथा विचार सदैव साहित्य जगत को मार्गदर्शन देते रहेंगे।

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