WhatsApp SIM Binding Rule Jan 2027 Update

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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ के नियमों को लागू करने की डेडलाइन को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया है। यानी नए नियम अब 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए सरकार ने ये कदम उठाया है।

नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी।

6 सवालों के जवाब से समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर?

सवाल 1. क्या है सिम बाइंडिंग?

जवाब. सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ ‘लॉक’ कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।

सवाल 2. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा?

जवाब. जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा।

सवाल 3. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया?

जवाब. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है।

उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।

सवाल 4. 1 जनवरी से यूजर्स को क्या करना होगा?

जवाब. यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग एप काम करना बंद कर सकता है।

सवाल 5. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है?

जवाब. इंडस्ट्री एसोसिएशन (IAMAI) ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉगआउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा। साथ ही उन यूजर्स को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं।

सवाल 6. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी?

जवाब. केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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