यमन सरकार ने हूती विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए शुरू किया बड़ा सैन्य अभियान, पश्चिमी तट पर कब्जा वापस लेने की रणनीति

यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने देश में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़ा और निर्णायक सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। इस व्यापक सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों को वापस हासिल करना है, जिन पर हूती विद्रोहियों ने अपना कब्जा जमा रखा है। सरकारी बलों ने विशेष रूप से यमन के पश्चिमी तटीय इलाकों को फिर से अपने नियंत्रण में लाने के लिए यह अभियान चलाया है। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे वापस लेना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
यमन में राष्ट्रपति राशाद अल-अलीमी के नेतृत्व वाली सरकार ने हूती विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए अपनी फौज को मैदान में उतार दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में हूती विद्रोहियों के कब्जे में यमन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। हालांकि, भौगोलिक रूप से यह एक-तिहाई हिस्सा जनसांख्यिकीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यमन की कुल आबादी का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों में निवास करता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि देश की अधिकांश जनता अभी भी हूती विद्रोहियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में जीवन यापन करने को मजबूर है।
यमन में चल रहा यह गृहयुद्ध पिछले कई वर्षों से जारी है और इसने देश की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना को गहराई से क्षतिग्रस्त कर दिया है। हूती विद्रोहियों ने देश के कई प्रमुख शहरों और रणनीतिक ठिकानों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर रखा है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है और हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाइयों में लगातार सहयोग प्रदान कर रहा है। अब सरकार द्वारा पश्चिमी तट पर खोए हुए इलाके को वापस लेने के लिए जो नया सैन्य अभियान शुरू किया गया है, वह इस लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष में एक नया मोड़ ला सकता है।
पश्चिमी तटीय क्षेत्र यमन के लिए इसलिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं पर देश की प्रमुख व्यापारिक गतिविधियां और समुद्री मार्ग स्थित हैं। यदि सरकार इन क्षेत्रों को हूती विद्रोहियों से मुक्त कराने में सफल होती है, तो उसे न केवल सैन्य बल्कि आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर भी भारी बढ़त मिल सकती है। हूती विद्रोही भी इन क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच संघर्ष की तीव्रता बढ़ गई है।
इस सैन्य अभियान के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। चूंकि हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों में देश की 80 प्रतिशत आबादी रहती है, इसलिए किसी भी बड़े सैन्य ऑपरेशन का सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ना स्वाभाविक है। युद्ध के कारण पहले से ही यमन की जनता गंभीर मानवीय संकट से जूझ रही है। बुनियादी सुविधाओं, खाद्य सामग्री और चिकित्सा सेवाओं की भारी कमी ने स्थिति को और अधिक विकट बना दिया है। ऐसे में नए सिरे से शुरू हुआ यह सैन्य अभियान वहां रहने वाले लाखों लोगों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
राष्ट्रपति राशाद अल-अलीमी की सरकार का स्पष्ट लक्ष्य हूती विद्रोहियों के प्रभाव को समाप्त करके पूरे देश में सरकार का पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है। सऊदी समर्थित सेना ने इस अभियान के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और पश्चिमी तट की ओर अपनी बढ़त जारी रखी हुई है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, सरकार की योजना केवल क्षेत्रीय कब्जा वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमताओं को भी कमजोर करना इस अभियान का एक प्रमुख हिस्सा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यमन के इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठन समय-समय पर यमन में शांति बहाली और संघर्ष विराम की अपील करते रहे हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी और सत्ता संघर्ष के कारण शांति वार्ताओं को कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच यह टकराव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है।
यमन का यह संघर्ष केवल एक आंतरिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसमें क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। सऊदी अरब का सरकार को समर्थन और हूती विद्रोहियों का डटे रहना इस बात का संकेत है कि यह जंग अभी और लंबी खिंच सकती है। फिलहाल, सरकार द्वारा शुरू किए गए इस ताजा और बड़े सैन्य अभियान के परिणामों का इंतजार किया जा रहा है। यदि पश्चिमी तट पर सरकार को सफलता मिलती है, तो यह हूती विद्रोहियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है और यमन के भविष्य की राजनीतिक दिशा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

