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एअर इंडिया एक्सप्रेस: दुबई-अमृतसर फ्लाइट के 8 क्रू सदस्यों को सस्पेंड, 4 पायलट शामिल; तय समय से देरी पर ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट

एअर इंडिया एक्सप्रेस ने हाल ही में हुई एक नियम उल्लंघन की घटना के बाद दुबई-अमृतसर फ्लाइट के 8 क्रू सदस्यों को तीन महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। इन सस्पेंड्ड में से चार पायलट भी शामिल हैं। इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि अनिवार्य पोस्ट-फ्लाइट ब्रीथ एनालाइजर (अल्कोहल) टेस्ट में निर्धारित समय सीमा के भीतर […]
एअर इंडिया एक्सप्रेस: दुबई-अमृतसर फ्लाइट के 8 क्रू सदस्यों को सस्पेंड, 4 पायलट शामिल; तय समय से देरी पर ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट
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एअर इंडिया एक्सप्रेस ने हाल ही में हुई एक नियम उल्लंघन की घटना के बाद दुबई-अमृतसर फ्लाइट के 8 क्रू सदस्यों को तीन महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। इन सस्पेंड्ड में से चार पायलट भी शामिल हैं। इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि अनिवार्य पोस्ट-फ्लाइट ब्रीथ एनालाइजर (अल्कोहल) टेस्ट में निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा न करना रहा है।

मामला 2 अगस्त को हुई दुबई से अमृतसर की उड़ान से जुड़ा है। जब यह विमान अमृतसर के श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग करा, तो क्रू सदस्यों को 2 घंटे के भीतर ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट कराना अनिवार्य था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, क्रू सदस्य पहले होटल की ओर बढ़ गए और बाद में एयरपोर्ट लौटकर टेस्ट कराया। टेस्ट लैंडिंग के लगभग 2 घंटे 35 मिनट बाद हुआ, जो निर्धारित समय सीमा से बाहर था।

गंभीर बात यह है कि सभी 8 क्रू सदस्यों के ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट के परिणाम नेगेटिव आए, अर्थात उनके शरीर में कोई भी अल्कोहल की निशानी नहीं मिली। इसके बावजूद, तय समयसीमा के भीतर टेस्ट न कराने को नियमों का उल्लंघन माना गया। एयरलाइंस ने इस मामले की पूरी जानकारी एविएशन सेफ्टी बॉडी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को सौंपी और सभी 8 सदस्यों को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया गया।

इस घटना के पृष्ठभूमि में एक और गंभीर घटना का उल्लेख करना जरूरी है। एअर इंडिया सभी अपने पायलटों की स्क्रीनिंग तब शुरू करेगी जब 4 अगस्त को फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के दौरान विमान को अचानक 300 फीट नीचे उतरने की घटना हुई। उस घटना में मुख्य पायलट का ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट पॉजिटिव आया था। इस घटना के बाद एअर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की प्रतिबंधित पदार्थों और दवाओं के लिए अतिरिक्त जांच की प्रक्रिया शुरू की है।

एअर इंडिया के मुताबिक, यह स्क्रीनिंग प्रशिक्षण और पोस्ट-फ्लाइट के बाद की जाती है। एयरलाइंस ने अपने सभी पायलटों और अन्य कर्मचारियों से साइकोएक्टिव पदार्थों के उपयोग या उनकी निर्भरता की जानकारी स्वेच्छा से देने की अपील की है। एयरलाइंस का कहना है कि ऐसी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और जरूरत के अनुसार मेडिकल, एचआर और फ्लाइट सेफ्टी अधिकारियों के साथ केवल साझा की जाएगी।

एविएशन सेक्टर में पायलटों के लिए DGCA के नियम बेहद सख्त हैं। एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 24 के तहत, किसी भी पायलट या क्रू मेंबर को उड़ान से 12 घंटे पहले तक किसी भी तरह के मादक पदार्थ या अल्कोहल का सेवन करने से पूर्णतः प्रतिबंधित है। उड़ान के दौरान भी इसका सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। एविएशन सेक्टर में पायलटों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाती है, जिसका अर्थ है कि पायलट के शरीर में अल्कोहल का लेवल शून्य होना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, पायलटों के लिए अनिवार्य मेडिकल जांच भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। क्लास 2 मेडिकल स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) के लिए जरूरी है और फ्लाइट ट्रेनिंग शुरू करने से पहले अनिवार्य है। जबकि क्लास 1 मेडिकल कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) और एयरलाइन पायलटों के लिए अनिवार्य है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, विजन, हियरिंग और हार्ट से जुड़ी व्यापक जांच की जाती है।

ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट भी एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है, जिसके तहत फ्लाइट से पहले और लैंडिंग के बाद पायलटों का ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पायलट के शरीर में अल्कोहल का स्तर शून्य हो। इसके साथ-साथ, पायलटों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस या नशीले पदार्थों की जांच भी अनिवार्य है, जिसके तहत रैंडम ड्रग टेस्टिंग की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पायलट किसी भी प्रतिबंधित दवा या नशीले पदार्थ के प्रभाव में नहीं हैं। ड्रग टेस्ट पॉजिटिव होने पर पायलट के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

यह पूरी स्थिति एविएशन सुरक्षा के महत्व को और भी उजागर करती है और एयरलाइंस पर कठोर नियमों का पालन सुनिश्चित करने की उनकी जिम्मेदारी को दर्शाती है।

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