बेंगलुरु में शुक्रवार को आयोजित एक समारोह में, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारतीय वायुसेना और नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण विमानों की डिलीवरी की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू समारोह में शामिल हुए, जहां HAL ने भारतीय वायुसेना को दो लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट टू-सीटर ट्रेनर तेजस विमान और चार बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 (HTT-40) सौंपे। साथ ही, पवन हंस लिमिटेड को चार नेक्स्ट जेनरेशन ध्रुव NG हेलिकॉप्टर भी सौंपे गए, जो पहली बार सिविल सर्टिफाइड ध्रुव NG को नागरिक उड्डयन क्षेत्र में शामिल करेंगे।
भारतीय वायुसेना को सौंपे गए दो HTT-40 विमानों में से एक को ‘अंकुर’ नाम दिया गया है, जो स्वदेशी रूप से विकसित बेसिक ट्रेनर है। 2023 में वायुसेना द्वारा 70 HTT-40 विमानों का एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट किया गया था, जिसके तहत सितंबर 2025 से डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, डिलीवरी में लगभग एक साल की देरी हुई है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि प्रत्येक अंकुर विमान का 57 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बनाया गया है, जो देश के आत्मनिर्भरता अभियान को मजबूत करता है।
HAL ने भारतीय वायुसेना को दो LCA FOC ट्रेनर विमान भी सौंपे, जिससे FOC कॉन्ट्रैक्ट के तहत चार ट्विन-सीटर विमानों की डिलीवरी पूरी हो गई। इन विमानों में उन्नत रडार सिस्टम, ऑटोपायलट क्षमताएं, उन्नत ईंधन प्रणाली, सुरक्षित संचार के लिए सॉफ्टवेयर-परिभाषित रेडियो और हवा से हवा में ईंधन भरने के लिए प्रोब जैसी विशेषताएं शामिल हैं। ये विशेषताएं आधुनिक प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने और पायलटों को वास्तविक परिदृश्यों के लिए तैयार करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
पवन हंस को सौंपे गए चार ध्रुव NG हेलिकॉप्टर 5.5 टन के हल्के ट्विन-इंजन मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर हैं, जिन्हें HAL द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह पहली बार है जब सिविल सर्टिफाइड ध्रुव NG को नागरिक उड्डयन क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है, जो देश के नागरिक विमानन बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय वायुसेना के लिए स्वदेशी प्रशिक्षण क्षमताओं का यह विकास कोई नई पहल नहीं है। इससे पहले भी, IAF ने स्वदेशी HAL HPT-32 ‘दीपक’ जैसे ट्रेनर विमानों का उपयोग किया है। नए HTT-40 और तेजस ट्रेनर विमानों की डिलीवरी से पायलटों के पास प्रशिक्षण के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे विदेशी निर्मित विमानों पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी एयरोस्पेस उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
70 HTT-40 विमानों के कॉन्ट्रैक्ट के तहत मौजूदा हैंडओवर डिलीवरी की शुरुआत है, जो भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती पायलट प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा दिए गए इस कॉन्ट्रैक्ट का उद्देश्य भारतीय वायुसेना को आधुनिक और विश्वसनीय प्रशिक्षण उपकरणों से लैस करना है, जो देश की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करेगा।
HAL द्वारा आयोजित इस समारोह ने बेंगलुरु को देश के एयरोस्पेस निर्माण में एक प्रमुख केंद्र के रूप में फिर से स्थापित किया है। यह डिलीवरी न केवल भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों के साथ संरेखित होती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे स्वदेशी डिजाइन और निर्माण क्षमताएं भारतीय वायुसेना और नागरिक उड्डयन क्षेत्र दोनों को आवश्यक विमानों की आपूर्ति कर सकती हैं।
भविष्य में, जैसे-जैसे HTT-40 विमानों की डिलीवरी जारी रहेगी, भारतीय वायुसेना को अपने प्रशिक्षण बेड़े का आधुनिकीकरण करने और स्वदेशी रूप से निर्मित प्लेटफॉर्म पर अपने पायलटों को प्रशिक्षित करने में और अधिक आत्मनिर्भरता हासिल करने की उम्मीद है। साथ ही, पवन हंस के बेड़े में ध्रुव NG हेलिकॉप्टर शामिल होने से नागरिक विमानन क्षेत्र में मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर क्षमताओं में वृद्धि होगी, जो आपातकालीन प्रतिक्रिया, परिवहन और अन्य नागरिक सेवाओं का समर्थन कर सकती हैं।
यह विकास भारत के रणनीतिक विमानन क्षेत्र में प्रगति को दर्शाता है, जहां सरकारी स्वामित्व वाले एयरोस्पेस निर्माता लगातार उन्नत विमानों का उत्पादन कर रहे हैं, जो देश की सुरक्षा और नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। जैसे-जैसे परियोजनाएं आगे बढ़ेंगी, वे न केवल भारतीय वायुसेना की प्रशिक्षण क्षमताओं को बढ़ाएंगी, बल्कि देश के एयरोस्पेस उद्योग के विकास में भी योगदान देंगी।


















