Vande Bharat News
होम› देश› समाचार

बोरीवली गरबा विवाद: बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय ने मुस्लिमों के लिए रखी शर्त, कहा- तिलक लगाकर देवी की पूजा करनी होगी; मंत्री राणे ने था विरोध

मुंबई के बोरीवली उपनगर में होने वाले एक गरबा समारोह में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्यक्रम में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर शर्तें रखी गई हैं, जिससे सामाजिक और राजनीतिक चर्चा गर्माई में है। बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय ने इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान देते […]
बोरीवली गरबा विवाद: बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय ने मुस्लिमों के लिए रखी शर्त, कहा- तिलक लगाकर देवी की पूजा करनी होगी; मंत्री राणे ने था विरोध
शेयर करेंFacebookX

मुंबई के बोरीवली उपनगर में होने वाले एक गरबा समारोह में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्यक्रम में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर शर्तें रखी गई हैं, जिससे सामाजिक और राजनीतिक चर्चा गर्माई में है। बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय ने इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान देते हुए कहा है कि गरबा में शामिल होने वाले मुस्लिमों को तिलक लगाना होगा और देवी की पूजा करनी होगी। यह शर्त रखते हुए उपाध्याय ने धार्मिक सहभागिता को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

शारदीय नवरात्रि के महत्वपूर्ण पावन अवसर पर आयोजित होने वाले इस गरबा कार्यक्रम ने ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि यह पारंपरिक रूप से एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सव मनाया जाता है जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग भाग लेते हैं। बोरीवली मुंबई का एक ऐतिहासिक और बहुसांस्कृतिक उपनगर है, जहां नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों को विशेष महत्व दिया जाता है। इस स्थिति में किसी विशेष समुदाय के लिए धार्मिक शर्तें लगाना सामाजिक सद्भाव पर सवाल उठाता है। भारतीय संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है और किसी भी नागरिक को अपने धर्म का पालन करने या किसी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने का अधिकार है, साथ ही किसी धार्मिक गतिविधि में भाग न लेने का भी अधिकार है। ऐसे में किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भागीदारी के लिए धार्मिक शर्तें लगाना संवैधानिक अधिकारों को लेकर गंभीर प्रश्न उठाता है।

इससे पहले भी महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री का विरोध किया था। राणे का यह विरोध नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की उपस्थिति को लेकर तब भी व्यापक चर्चा का केंद्र बना था। उनके इस रवैये को समर्थन और विरोध दोनों दृष्टिकोणों से देखा गया था। मंत्री राणे ने तब यह जोर दिया था कि गरबा एक हिंदू धार्मिक परंपरा है और इसमें अन्य धर्मों के लोगों की भागीदारी को लेकर संदेह है। इस बार बीजेपी विधायक उपाध्याय का बयान इसी ही धारा में है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में धार्मिक बाधाएं लगाई जा सकती हैं।

इस साल शारदीय नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक चलेगी। नवरात्रि के इन नौ दिनों में देवी दुर्गा की विभिन्न अवतारों की पूजा की जाती है और इसी दौरान रात्रि भर गरबा और डांडिया नृत्य होता है। मुंबई में इस साल भी अलग-अलग जगहों पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें लाखों लोग भाग लेने की उम्मीद है। बोरीवली में भी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है, जिससे शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग एकत्रित होंगे। गरबा एक ऐसी लोक नृत्य परंपरा है जो गुजरात में उत्पन्न हुई और बाद में पूरे देश, विशेषकर महाराष्ट्र में गहरी जड़ें बना ली। नवरात्रि के इन नौ दिनों में यह नृत्य देवी की पूजा का हिस्सा माना जाता है और इसमें आमतौर पर सभी की भागीदारी होती है।

बोरीवली का माहौल भी इस विवाद को देखने योग्य बनाता है। यह क्षेत्र विविध धर्मीय और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के रहने का स्थान है। यहां के विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव और सहअस्तित्व की परंपरा रही है। ऐसे में किसी धार्मिक उत्सव में भागीदारी के लिए किसी विशेष समुदाय को धार्मिक रूपांतरण या धार्मिक अनुष्ठान करने की शर्त लगाना सामाजिक सद्भाव को चुनौती देता है। इस विवाद ने सोशल मीडिया और स्थानीय समुदायों में गहरी चर्चा शुरू कर दी है। पिछले कुछ वर्षों से गरबा जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर धार्मिक पहचान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस मुद्दे पर अलग-अलग रवैया अपनाते हैं, जिससे सांस्कृतिक कार्यक्रम राजनीतिक मुद्दे में बदल जाते हैं।

विधायक उपाध्याय के इस बयान के बाद कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। कुछ लोग इसे सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण के नाम पर देख सकते हैं, जबकि दूसरे इसे समावेशी समाज के विपरीत एक कदम मान सकते हैं। धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के बीच संतुलन एक जटिल मुद्दा है, जिसे लोकतांत्रिक दृष्टि से देखना आवश्यक है। किसी भी नागरिक को धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए मजबूर किया नहीं जा सकता, यह भारतीय संविधान का मूल सिद्धांत है। इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि गरबा कार्यक्रम अक्सर विभिन्न राजनीतिक दलों और समुदायों के नेताओं द्वारा संबोधित किए जाते हैं। ऐसे में किसी विशेष समुदाय को बाहर रखने या उसे शर्तें लगाने का प्रयास राजनीतिक रूप से प्रयोग किया जा सकता है। भारत में धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता के मूल्य सर्वोच्च हैं, और किसी भी नागरिक को धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने से नहीं रोका जा सकता।

नवरात्रि के इन दिनों में मुंबई पुलिस और प्रशासन भी विशेष सतर्क रहते हैं। बड़े पैमाने पर गरबा और डांडिया आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बोरीवली में भी इस विवादित कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए उपाय किए जा सकते हैं। स्थानीय प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह धार्मिक कट्टरता और सामाजिक तनाव को रोकने के लिए उचित कदम उठाए। संक्षेप में, बोरीवली गरबा विवाद धार्मिक सहभागिता और सांस्कृतिक परंपरा के बीच तनाव को उजागर करता है। बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय की टिप्पणी और मंत्री नितेश राणे का पूर्व विरोध इस बात का संकेत है कि नवरात्रि उत्सवों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। शारदीय नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में यह विवाद और गहरा हो सकता है, जिससे मुंबई की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सद्भाव पर प्रश्नचिह्न उठ सकता है।

खबर लगातार अपडेट हो रही है। इस विवाद पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया या कोई और जानकारी सामने नहीं आई है। यह देखना रह जाएगा कि कार्यक्रम के आयोजक और स्थानीय प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। नवरात्रि के इन दिनों में मुंबई के विभिन्न हिस्सों में लाखों लोग गरबा और डांडिया में भाग लेने के लिए उमड़ेंगे, और इस बार बोरीवली का कार्यक्रम विशेष रूप से ध्यान में रहेगा।

Advertisement

आपके लिए और खबरें