कांग्रेस नेता शशि थरूर ने गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी को बर्थडे विश किया था। इस पोस्ट में थरूर ने ‘on his 76th birthday’ की जगह ‘in his 76th birthday’ लिख दिया था। इसके बाद एक X यूजर ने थरूर के पोस्ट में टैग करते हुए लिखा, ‘शशि जी मेड अ ग्रामर मिस्टेक, ईवन इफ इट इज फैट फिंगर यानि शशि जी से ग्रामर की गलती हो गई, भले ही यह टाइपिंग की गलती हो।’ इस पर थरूर ने शुक्रवार को अपने पोस्ट में जवाब देते हुए कहा, ‘हां, ‘ऑन हिज बर्थडे’ की जगह ‘इन’ लिख दिया। ऐसा अक्सर होता रहता है।’ इस बात की सराहना के साथ उन्होंने स्वीकार कर लिया।
शशि थरूर का यह एक ऐसा मामला है जो सोशल मीडिया पर उनके भाषा के उपयोग को लेकर पहले भी चर्चा में रहा है। इंग्लिश लैंग्वेज पर अपनी पकड़ और कठिन शब्दों के इस्तेमाल के लिए थरूर कभी-कभी सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करते हैं। पिछले महीने नेपाल बाढ़ पर ड्रामा शब्द लिखने के बाद थरूर को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। थरूर ने लिखा था, ‘कल काठमांडू के लिए रवाना हुआ था, पहाड़ों में ड्रामा और उससे हुई भारी तबाही से पूरी तरह अनजान था।’ ड्रामा शब्द के इस्तेमाल पर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या ऐसी स्थिति के लिए इस शब्द का इस्तेमाल सही है। इसके बाद थरूर ने अपने शब्द का बचाव करते हुए सफाई दी।
एक और उदाहरण में, जुलाई 2025 में एक X पोस्ट में थरूर ने ‘आइ वॉज आस्किंग इनएविटेबल क्वेश्चन’ लिखा था। यूजर्स ने ग्रामर की गलती बताई थी। थरूर ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने पोस्ट बोलकर लिखवाई थी। वॉइस ट्रांसक्रिप्शन में ‘आस्क्ड एन’ की जगह ‘आस्किंग’ हो गया। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में वे पोस्ट को प्रूफरीड नहीं कर पाए।
इस समय तक थरूर ने अपनी गलतियों के सामने आकार उठाया है और उन्हें स्वीकार कर लिया है। उनके इस व्यवहार में एक स्पष्ट तकनीक है—आलोचना के सामने समर्थन देना और गलतियों को गोपनीय रूप से सुलझावना। हालांकि, इस तरह की बातचीत सामाजिक मीडिया पर तेज़ी से फैलती है और कई बार व्यक्तियों के सामाजिक समीक्षा का विषय बन जाती है।
शशि थरूर के बारे में जानकारी के अनुसार, वे भारत के प्रमुख राजनैतिक कारणकारी हैं और अक्सर अपने विचारों को सार्वजनिक करते हैं। उनका भाषा का उपयोग और विवादास्पद टिप्पणीय शैली कई बार उन्हें आकर्षण और आलोचना दोनों का सामना करती है। इस मामले में एक सामाजिक मीडिया उपयोगकर्ता ने उनकी ग्रामर की गलती को उजागर किया, जो एक सामान्य तकनीकी त्रुटि के रूप में गिनी जा सकती है। हालांकि, इसे सार्वजनिक रूप से चर्चा किया जाना उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के बीच संबंधित हो सकता है।
इस प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर थरूर के बारे में एक विशाल चर्चा शुरू हो गई है। कई उपयोगकर्ता ने उनके शब्द चयन के बारे में टिप्पणी की है, जबकि कुछ लोग उनके सामान्य जीवन में होने वाली गलतियों को स्वीकार कर उन्हें प्रशंसा की है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, ‘भले ही ग्रामर में गलती हो, लेकिन यह एक मानव जैसा बना है।’ दूसरे एक उपयोगकर्ता ने कहा, ‘उनकी भाषा के प्रयोग को लेकर आलोचना करना सामान्य है, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से चिथड़ाना उचित नहीं है।’
इस मामले में एक और मुद्दा उठता है कि सार्वजनिक चेहरे के राजनेता कितने आसानी से सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करते हैं। इंटरनेट पर तुरंत प्रतिक्रिया की संस्कृति कई बार गलतियों को तेज़ी से उभार देती है। इस परिप्रेक्ष्य में थरूर का जवाब देना एक सकारात्मक कदम हो सकता है, क्योंकि उन्होंने गलती को स्वीकार कर लिया और इसे एक सामान्य माहौल के रूप में प्रस्तुत किया।
शशि थरूर के बारे में एक अन्य पहलू भी उभरता है। उनका व्यक्तिगत जीवन और राजनीतिक दृष्टिकोण कई बार विवादास्पद होते हैं। उनके शब्दों का इस्तेमाल करने वाले समूहों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रतिक्रियाएं आती हैं। इस मामले में एक सामान्य प्रश्न उठता है कि क्या सार्वजनिक चेहरे को ग्रामर की गलतियों के कारण पीड़ित किया जाना चाहिए।
अंत में, यह भी स्पष्ट है कि थरूर की ग्रामर मिस्टेक केवल एक छोटे वाक्य की त्रुटि नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक मुद्दे का प्रतीक बन गई है। इससे सीख क्या है? संभवतः, सार्वजनिक चेहरे को समय के साथ एक अधिक संवेदनशील और सटीक व्यक्ति के रूप में प्रदर्शित किया जाना चाहिए। हालांकि, थरूर का जवाब उनके सामने आए इस मामले को एक साधारण बात में बदल देता है।
इस प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर थरूर के बारे में एक विशाल चर्चा शुरू हो गई है। कई उपयोगकर्ता ने उनके शब्द चयन के बारे में टिप्पणी की है, जबकि कुछ लोग उनके सामान्य जीवन में होने वाली गलतियों को स्वीकार कर उन्हें प्रशंसा की है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, ‘भले ही ग्रामर में गलती हो, लेकिन यह एक मानव जैसा बना है।’ दूसरे एक उपयोगकर्ता ने कहा, ‘उनकी भाषा के प्रयोग को लेकर आलोचना करना सामान्य है, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से चिथड़ाना उचित नहीं है।’


















