Sikkim India Merger History Facts Explained; Nehru – Indira Gandhi

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PM मोदी आज सिक्किम विलय की सालगिरह पर राजधानी गंगटोक जा रहे हैं।

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1947 में आजादी मिलने के 28 साल बाद तक सिक्किम भारत का पूर्ण राज्य नहीं, सिर्फ प्रोटेक्टर स्टेट था। 1975 तक वहां नामग्याल राजवंश का शासन था और भारत सिर्फ विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े मामले देखता था।

1970 के दशक में सिक्किम के राजा की अमेरिकी पत्नी ने भारत से दार्जिलिंग लेने की ख्वाहिश जताई। इंदिरा गांधी इसके खतरे समझ गईं। उन्होंने RAW चीफ से पूछा- कुछ हो सकता है?

आइए, जानते हैं सिक्किम के भारत में विलय की रोचक कहानी…

अंग्रेजों ने सिक्किम को नेपाल से बचाया, तो राजा ने दार्जिलिंग दे दिया

1642 में सिक्किम में बौद्ध राजतंत्र की स्थापना हुई। पहले चोग्याल बने फुंटसोग नामग्याल। सिक्किम में चोग्याल का मतलब ‘धर्म से शासन करने वाला राजा’ होता है।

19वीं सदी में भारत से तिब्बत में व्यापार करने के लिए अंग्रेजों को सिक्किम रूट की जरूरत थी। इधर सिक्किम के दाईं तरफ नेपाल की गोरखा आर्मी लगातार अपना विस्तार कर रही थी। 1814 से 1816 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल की गोरखा आर्मी के बीच एंग्लो-गोरखा युद्ध हुआ।

सिक्किम ने सोचा कि गोरखाओं के हमले बंद करवाने के लिए लड़ाई में अंग्रेजों का साथ देना चाहिए। जंग में गोरखा हार गए, तो सिक्किम में कब्जाई सारी जमीन अंग्रेजों को लौटा दी।

अंग्रेजों ने यह जमीन सिक्किम को लौटा दी और सुरक्षा की गारंटी भी दी। बदले में सिक्किम के रास्ते तिब्बत से व्यापार करने का अधिकार ले लिया। धीरे-धीरे सिक्किम के अंदरूनी मामलों में भी अंग्रेजों का दखल होने लगा।

1975 में भारत का हिस्सा बनने से पहले सिक्किम करीब 300 सालों तक आजाद रियासत रहा।

1975 में भारत का हिस्सा बनने से पहले सिक्किम करीब 300 सालों तक आजाद रियासत रहा।

1828 में ब्रिटिश ऑफिसर कैप्टन लॉयड दार्जिलिंग गए थे। उस समय दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का नहीं बल्कि सिक्किम का हिस्सा था। उन्हें यह जगह गर्मियों में सैनिकों के आराम और तिब्बत के ट्रेड रूट पर नजर रखने के लिए जरूरी लगी।

इधर सिक्किम को भी नेपाल से सुरक्षा के लिए अंग्रेजों की जरूरत थी। इसलिए 1835 में चोग्याल ने अंग्रेजों को दार्जिलिंग तोहफे में दे दिया। बदले में उन्हें हथियार और कई तरह के तोहफे मिले। 1841 से अंग्रेजों ने सिक्किम को हर साल 3,000 रुपए का मुआवजा देना शुरू किया, जो बाद में बढ़कर 6,000 रुपए हो गया।

1889 में अंग्रेजों ने सिक्किम में नेपाली मजदूरों को आने की इजाजत दे दी। 1941 तक इनकी आबादी 75% तक पहुंच गई। सिक्किम में पहले से रह रहा भूटिया समुदाय 11% और लेपचा समुदाय सिर्फ 14% तक सीमित हो गया था।

अंग्रेज गए तो नेहरू ने कहा- ‘हम सिक्किम की सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे’

भारत की आजादी के समय 600 प्रिंसली स्टेट में से एक सिक्किम भी था लेकिन चोग्याल भारत में विलय के लिए तैयार नहीं थे। ‘सिक्किम: डॉन ऑफ डेमोक्रेसी’ किताब में जी. बी. एस. सिद्धु लिखते हैं, ‘सरदार पटेल सिक्किम के साथ बाकी भारतीय रियासतों की तरह ही व्यवहार करना चाहते थे। लेकिन नेहरू के विचार सिक्किम के साथ अलग व्यवहार करने के थे।’

नेहरू चाहते थे कि जैसे भूटान के साथ भारत ने मित्रता की संधि की है, वैसे ही सिक्किम के साथ भी हो जाए। 1950 में भारत-सिक्किम शांति समझौता हुआ। इसके तहत सिक्किम भारत का प्रोटेक्टर स्टेट यानी संरक्षित राज्य बना।

अब सिक्किम की सुरक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी भारत की थी। भारत वहां सेना तो तैनात कर सकता था, लेकिन सिक्किम के आंतरिक मामलों में दखल नहीं कर सकता था। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, ‘अगर सिक्किम या भूटान पर कोई दूसरा देश हमला करता है, तो हम उनकी सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे।’

भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 16 सितंबर 1958 को सिक्किम का दौरा किया था। इस दौरान वे सिक्किम के 11वें चोग्याल ताशी नामग्याल से मिले। Courtesy: The Nehru Archive

भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 16 सितंबर 1958 को सिक्किम का दौरा किया था। इस दौरान वे सिक्किम के 11वें चोग्याल ताशी नामग्याल से मिले। Courtesy: The Nehru Archive

इधर भारत की आजादी के समय सिक्किम की अंदरूनी राजनीति में उथल-पुथल मची थी। जो लोग सिक्किम का भारत में विलय चाहते थे, उन्होंने सिक्किम स्टेट कांग्रेस पार्टी बनाई। काजी लेहेंडप दोरजी इसके अध्यक्ष बने। आगे चलकर उन्होंने सिक्किम नेशनल कांग्रेस बनाई। वहीं सिक्किम की आजादी चाहने वालों ने सिक्किम नेशनल पार्टी बनाई।

सिक्किम की रानी दार्जिलिंग वापस चाहती थीं, राजा ने आजाद राज्य की मांग की

सिक्किम की सीमा भारत के साथ-साथ चीन से भी लगती है। 1962 में चीन से युद्ध हारने के बाद भारत ने सिक्किम में भी अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी, ताकि चीन को भारत में घुसने से रोका जा सके।

5 साल बाद 1 अक्टूबर, 1967 को चीनी सेना ने नाथू-ला के रास्ते सिक्किम में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय आर्मी इस हमले को रोकने में सफल रही, लेकिन अभी इस सीमा को और मजबूत करने की जरूरत थी।

दूसरी तरफ सिक्किम के चोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल 1950 की संधि को बदलकर, सिक्किम को भूटान जैसा दर्जा देने की मांग करने लगे। वह सिक्किम को भारत से अलग पहचान दिलाना चाहते थे और लगातार विदेश यात्राएं कर रहे थे।

चोग्याल की पत्नी होप कूक अमेरिकी नागरिक थीं, कई लोग उन्हें अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट भी मानते थे। उन्होंने एक आर्टिकल में लिखा, ‘1835 में सिक्किम के राजपरिवार ने अंग्रेजों को दार्जिलिंग लीज पर दिया था। राजपरिवार दार्जिलिंग को वापस मांग सकता है।’

गैंगटोक में एक कार्यक्रम के दौरान नेपाल की चोग्याल पाल्डेन थोंडुप और रानी होप कुक अपनी बेटी के साथ। Courtesy: Alice S Kandell

गैंगटोक में एक कार्यक्रम के दौरान नेपाल की चोग्याल पाल्डेन थोंडुप और रानी होप कुक अपनी बेटी के साथ। Courtesy: Alice S Kandell

चोग्याल भारत से आजादी चाहते थे, लेकिन सिक्किम की जनता चोग्याल से। 1960 और 70 के दशक में सिक्किम में राजशाही का विरोध बढ़ने लगा। देश की 75% से ज्यादा नेपाली आबादी चोग्याल पर भेदभाव के आरोप लगा रही थी। चुनाव में गड़बड़ी के आरोप भी लग रहे थे। ये सिक्किम को भारत में शामिल करने का सबसे सही मौका था।

तीन फेज में सिक्किम का भारत में विलय हुआ

पहला फेज: सिक्किम में हो रहे विरोध को समर्थन, विपक्षी पार्टियों से हाथ मिलाया

इंदिरा गांधी सिक्किम की समस्या का हल चाहती थीं। उन्होंने मुख्य सचिव पी. एन. धर से कहा, ‘मेरे पिता ने सिक्किम के लोगों की भारत में शामिल होने की इच्छा न मानकर गलती की।’

इंदिरा ने खुफिया एजेंसी R&AW के चीफ आर. एन. काओ से पूछा- ‘क्या आप सिक्किम के मामले में कुछ कर सकते हैं?’ काओ ने कलकत्ता में R&AW और IB के रीजनल ऑफिस के इंचार्ज पी. एन. बनर्जी और गंगटोक में क्रॉस बॉर्डर इंफॉर्मेशन जुटाने के लिए तैनात ऑफिसर अजीत सिंह स्याली से बात की। सिक्किम को भारत में मिलाने के लिए 5 काम तय हुए…

  1. सिक्किम में चल रहे विरोध को हवा देना, जिससे चोग्याल भारत से मदद लेने के लिए मजबूर हो जाएं।
  2. लोकल अखबारों के विरोध को सिक्किम की जनता तक पहुंचाना।
  3. विरोध बढ़ने पर भारतीय सेना को सिक्किम में मार्च के लिए भेजना, जिससे लोगों को लगे कि भारत उनके साथ है।
  4. 4 अप्रैल 1973 को चोग्याल के 50वें जन्मदिन के दिन बड़ा प्रोटेस्ट आयोजित करना।
  5. विपक्षी पार्टियों को यह आश्वासन दिलाना कि भारत किसी भी स्थिति में चोग्याल के खिलाफ उनका समर्थन नहीं छोड़ेगा।

बनर्जी और स्याली ने 1973 में सिक्किम में ऑपरेशन – ‘जनमत’ और ‘ट्विलाइट’ शुरु किया। यह सिक्किम नेशनल कांग्रेस के काजी और जनता कांग्रेस के के. सी. प्रधान के कोडनेम थे। इन दोनों ने चोग्याल के खिलाफ लड़ाई में साथ आकर जॉइंट एक्शन कमेटी बनाई थी।

दूसरा फेज: भारत ने चोग्याल के गार्ड्स हटाए, सिक्किम में चुनाव कराए

  • भारत से सोचा कि सिक्किम में हालात बिगड़ने लगेंगे, तो चोग्याल के पास भारत की मदद लेने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा। इंदिरा भी इसके लिए तैयार थीं।
दिल्ली में सिक्किम के चोग्याल और रानी के साथ भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी।

दिल्ली में सिक्किम के चोग्याल और रानी के साथ भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी।

  • सिक्किम में चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के तौर पर तैनात रहे बी. एस. दास अपनी किताब ‘द सिक्किम सागा’ में लिखते हैं, ‘विदेश सचिव का ऑफिस ऑपरेशन रूम बन गया था। हर आधे घंटे में सिक्किम की स्थिति पर लंबी रिपोर्ट आ रही थी।’
  • 8 अप्रैल 1973 को चोग्याल के पास एक ड्राफ्ट भेजा गया। इसमें लिखा था, ‘चोग्याल भारत सरकार से सिक्किम का प्रशासन संभालने, सिक्किम गार्ड्स यानी राजमहल के गार्ड्स और पुलिस कमिश्नर को भारतीय आर्मी की 17वीं माउंटेन डिवीजन में तैनात करने की विनती करते हैं।’
  • चोग्याल ने पहले कहा- ‘मैं सिक्किम गार्ड्स को कभी भारतीय आर्मी में तैनात नहीं करूंगा।’ बाद में सलाहकारों ने उन्हें समझाया और वे ड्राफ्ट पर साइन करने के लिए तैयार हो गए।
  • एक महीने बाद भारत, चोग्याल और सिक्किम के राजनीतिक दलों के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ, जिससे चोग्याल का पद तो रहा लेकिन शक्तियां कम हो गईं।
  • समझौते के बाद सिक्किम में चुनाव होने थे। चोग्याल के खिलाफ प्रदर्शन भी कम हो गए थे। यह भी भारत की स्ट्रैटेजी ही थी ताकि लगे कि भारत के कारण सिक्किम में स्थिति सुधरी है।
  • काओ ने बनर्जी को निर्देश दिए- ‘सिक्किम की जनता को दार्जिलिंग और पश्चिम बंगाल के दूसरे जिलों में हुए विकास के बारे में बताया जाए, जिससे वे भारत में शामिल होने की मांग करें।’
  • चुनाव के बीच एक दिन चोग्याल ने साउथ और वेस्ट सिक्किम जाने की इच्छा जताई। ‘द सिक्किम सागा’ के मुताबिक, ‘पहले चोग्याल को देखकर लोग सड़कों पर लाइन लगा लेते थे और उनका स्वागत करते थे। इस बार जब वे लोगों के बीच गए, तो उन्हें अपने पोस्टर पर जूते लटके हुए दिखाई दिए।’
  • भारत, काजी और प्रधान को चुनाव के लिए भी पूरा सपोर्ट कर रहा था। काओ ने निर्देश दिया था- ‘कोशिश ऐसी होनी चाहिए कि चुनाव में कम-से-कम 70% सीट हमारे उम्मीदवार जीतें।’ नतीजे आए, तो काजी ने 32 में से 31 सीटें जीत लीं और सिक्किम के मुख्यमंत्री बन गए।
  • उन्होंने विधानसभा में ‘द गवर्नमेंट ऑफ सिक्किम एक्ट, 1974’ पास कराया, जिससे सिक्किम को भारत के एसोसिएट स्टेट का दर्जा मिला।
  • 25 जून 1974 को चोग्याल सिक्किम का भारत से अलग राज्य का दर्जा बनाए रखने की बात करने भारत आए, लेकिन इस बातचीत से स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।

आखिरी फेज: सिक्किम के लोगों ने भारत में शामिल होने पर किया वोट, चोग्याल की सत्ता खत्म

  • फरवरी 1975 में चोग्याल नेपाल के राजा की ताजपोशी के लिए काठमांडू पहुंचे। यहां उन्होंने सिक्किम के हालात पर संयुक्त राष्ट्र जाने की बात कह दी।
  • सिक्किम के मुद्दे पर दूसरे देश अड़ंगा डालें, इससे पहले भारत सिक्किम का विलय कर लेना चाहता था। चोग्याल को कमजोर करने के लिए सिक्किम गार्ड्स को निशस्त्र करने की योजना बनी।
  • एक प्रदर्शन के दौरान सिक्किम गार्ड्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं और ग्रेनेड फेंक दिए। काजी ने सिक्किम में तैनात चीफ एग्जीक्यूटिव को तुरंत पत्र लिखकर सिक्किम गार्ड्स को निशस्त्र करने की अपील की।
  • 9 अप्रैल 1975 को भारतीय सेना की 64 माउंटेन ब्रिगेड राजमहल पहुंची। एक सैनिक ने उन्हें रोकनी की कोशिश की तो उसे गोली मार दी गई।
  • नितिन ए. गोखले अपनी किताब, ‘आर. एन. काओ- जेंटलमेंट स्पायमास्टर’ में बताते हैं, ’20 मिनट से भी कम समय में भारतीय सेना ने सिक्किम गार्ड्स को निशस्त्र कर दिया।’ चोग्याल को हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
  • नाराज चोग्याल ने भारत को पत्र लिखकर अपने गार्ड्स को निशस्त्र करने का कारण पूछा। भारत ने जवाब में कहा, ‘चोग्याल की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी था। उन्हें सिक्किम के नाराज लोगों से जान का खतरा था।’
  • अगले दिन 10 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। 3 हजार से ज्यादा लोग विधानसभा के बाहर चोग्याल के खिलाफ नारे लगा रहे थे। बिना किसी विरोध के चोग्याल को हटाने और सिक्किम को भारत का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ।
  • 14 अप्रैल को सिक्किम में एक रिफरेंडम कराया गया, इसमें सिक्किम के लोगों ने भारत में शामिल होने या न होने के लिए वोटिंग की। 97.5% यानी 59,637 लोगों ने भारत में शामिल होने के पक्ष में वोट किए जबकि सिर्फ 1,496 लोगों ने इसका विरोध किया।
  • 26 अप्रैल को सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने के लिए संसद में 36वां संविधान संशोधन बिल पास किया गया।
  • 16 मई को इस पर राष्ट्रपति के दस्तखत करने के साथ ही सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया।

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