पैर की एक नस में बना खून का थक्का, खामोशी से बहते हुए फेफड़े तक पहुंचा और 13 मई की सुबह अचानक सपा मुखिया अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निकला- ‘पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म’। उनके शरीर में 6 जगह चोट के निशान भी म
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पल्मोनरी एम्बोलिज्म कैसी बीमारी है और इसका प्रतीक के शरीर पर मिले चोट के निशान से क्या कोई कनेक्शन है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला? जवाब: मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना के बेटे प्रतीक की 13 मई की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। लखनऊ के सिविल अस्पताल में चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डीसी पांडेय के मुताबिक- जब प्रतीक को लाया गया, तब उनकी पल्स पूरी तरह डाउन थी। दिल भी रुक चुका था।
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, यानी KGMU में प्रतीक का पोस्टमॉर्टम हुआ। 13 मई की शाम जारी शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया कि प्रतीक के फेफड़ों में बड़ी मात्रा में खून के थक्के जम गए थे। जिससे दिल और फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया।

प्रतीक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट। मेडिकल टर्म में मौत की वजह लिखी है- ‘Cardiorespiratory collapse due to massive pulmonary Thromboembolism.’
सवाल-2: आखिर क्या है पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म? जवाब: प्रतीक की मौत के पीछे जो बीमारी बताई गई, उसमें 3 टर्म हैं- पल्मोनरी, यानी फेफड़े से जुड़ी दिक्कत, थ्रॉम्बो, यानी खून का थक्का और एम्बोलिज्म, यानी शरीर की धमनियों में कोई रुकावट।
‘पल्मोनरी थ्रॉम्बो-एम्बोलिज्म’ को डॉक्टरी जुबान में PE कहा जाता है। इसमें शरीर के किसी दूसरे हिस्से से खून का थक्का फेफड़े के अंदर या फेफड़े तक जाने वाली नसों तक पहुंच जाता है और खून के फ्लो को ब्लॉक कर देता है। इससे फेफड़े काम नहीं कर पाते और ऑक्सीजन शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंच पाती। इससे कार्डियक अरेस्ट आता है और मौत हो जाती है।
आम तौर पर ये थक्का पैर या पेल्विस के इलाके की नसों में बनना शुरू होता है। फिर ये टूटकर खून के फ्लो के साथ-साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है। ग्राफिक में पूरा प्रॉसेस देख लीजिए-

अमेरिका के मेडिकल सेंटर क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, PE के चलते अमेरिका में हर साल कम से कम एक लाख लोगों की मौत होती है। हालांकि भारत में इस बीमारी से मौतों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
सवाल-3: ये बीमारी कैसे हो जाती है? जवाबः PE के ज्यादातर मामलों की शुरुआत DVT, यानी ‘डीप वेन थ्रॉम्बोसिस’ से होती है। इसमें आमतौर पर पैर की नस में खून का थक्का बनने लगता है। DVT 4 बड़ी वजहों से हो सकती है…
1. लंबे समय तक निष्क्रिय रहना
- ट्रेन, फ्लाइट या कार से लंबा सफर करने, ऑफिस में लगातार बैठकर काम करने या हॉस्पिटल में कई दिनों तक बिस्तर पर रहने से DVT हो सकता है।
2. कोई सर्जरी या चोट लगना
- कोई बड़ी सर्जरी जैसे कूल्हे या पैरों की सर्जरी, बेहोशी की दवाएं या नसों के आसपास चोट लगने पर नसों में खून का थक्का बन सकता है।
3. खून में थक्का बनने के डिसऑर्डर
- लिवर से बनने वाली प्रोथ्रॉम्बिन नाम की प्रोटीन खून में क्लॉटिंग के लिए जिम्मेदार होती है। अगर ये ज्यादा बनने लगे तो, DVT हो सकता है।
- खून में थक्का बनने से जुड़े कई डिसऑर्डर भी होते हैं, जैसे- फैक्टर वी. लीडेन। इनमें या तो थक्का ज्यादा बनने लगता है या फिर पुराने थक्के टूटने में दिक्कत आने लगती है।
4. कैंसर या कुछ और बीमारियां
- कैंसर या कैंसर के इलाज के दौरान DVT और PE का खतरा बढ़ जाता है। कैंसर रोगियों में मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह DVT और PE ही होती है।
हॉर्मोन थेरेपी और कुछ गर्भनिरोधक गोलियों से भी PE का खतरा हो सकता है। इसके अलावा मोटापे, किडनी की बीमारी, नसों की बीमारी ‘वैरिकोज वेंस’, परिवार में किसी को DVT या PE होने, स्टेरॉयड्स जैसी कुछ दवाएं लेने, धूम्रपान और किसी तरह के इन्फेक्शन से भी DVT और PE हो सकता है।
सवाल-4: इस बीमारी में अचानक मौत होना कितना कॉमन है? जवाब: आमतौर पर PE के लक्षण अचानक ही नजर आते हैं। कुछ मामलों में पैरों में दर्द, सूजन और गर्मी महसूस हो सकती है। क्लीवलैंड के मुताबिक, PE की चपेट में आए करीब एक-तिहाई लोगों की कुछ ही घंटे के अंदर मौत हो जाती है। अक्सर इलाज मिलने से पहले ही।

सवाल-5: क्या प्रतीक की अचानक मौत के पीछे PE ही इकलौती वजह है? जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतीक करीब 5 साल से हाई ब्लड प्रेशर और DVT से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। प्रतीक की पत्नी अपर्णा की करीबी मित्र रीना सिंह ने बताया कि 4 महीने पहले उन्हें पता चला था कि प्रतीक को फेफड़े में इन्फेक्शन हुआ है, जिसका ऑपरेशन हुआ था।
30 अप्रैल को भी प्रतीक सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द की शिकायत के चलते एडमिट हुए थे। 3 दिन में उन्हें थोड़ा आराम मिला। रिपोर्ट्स हैं कि वो अपनी मर्जी से बिना छुट्टी लिए घर चले गए।
मेदांता हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रुचिता शर्मा ने बताया,
प्रतीक हमारे पुराने मरीज थे। मैं काफी समय से उनके हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन और DVT जैसी दिक्कतों के लिए देख रही थी। कुछ ही दिन पहले, उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने के बाद सांस फूलने के चलते यहां एडमिट किया गया था।

दरअसल, PE के इलाज के लिए कुछ दिनों तक खून को पतला करने वाली ‘ब्लड थिनर’, यानी एंटीकोगुलेंट दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामला हो तो ऑपरेशन या सर्जरी करके भी थक्के को निकाला जाता है। कुछ मामलों में पेट की एक बड़ी नस में एक जाल डाल दिया जाता है, ताकि थक्का फेफड़े तक न पहुंचे।
डॉ. रुचिता शर्मा के मुताबिक, प्रतीक खून पतला करने वाली और बीपी की दवाइयां रेगुलर ले रहे थे। इस बार क्या हुआ, ये कहना मुश्किल है।
उत्तर प्रदेश में लाइफलाइन हॉस्पिटल के संचालक और सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. सतीश कुमार कहते हैं,
PE के मरीजों को अस्पताल में रखकर इलाज करना जरूरी है, ताकि कंडीशन लगातार मॉनिटर की जा सके। अगर PE का इलाज पूरा न हो पाए, तो कुछ खून के थक्के बचे रह सकते हैं। DVT के चलते भी दोबारा थक्के बन सकते हैं और PE हो सकता है।

डॉ. सतीश के मुताबिक, हो सकता है कि प्रतीक की थेरेपी पूरी न हुई और उन्होंने बिना पूरी डोज लिए अस्पताल से डिस्चार्ज ले लिया। ऐसे में सबसे प्रबल संभावना है कि उन्हें अचानक PE हुआ, जिससे उनके फेफड़े और फिर दिल ने काम करना बंद कर दिया।

प्रतीक की हॉस्पिटल में एडमिट रहने के दौरान की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है, ये तस्वीर कब की है, ये स्पष्ट नहीं है।
सवाल-6: क्या प्रतीक के शरीर पर चोट के निशान से इसका कोई कनेक्शन है? जवाब: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतीक की छाती, दाएं हाथ, कोहनी, बाएं हाथ सहित कुल 6 जगहों पर चोट के निशान पाए गए…
- छाती के सामने दाहिने निपल के नीचे 14×7 सेंटीमीटर की चोट थी, जिसका रंग बीच में लाल-भूरा और किनारों पर नीला-पीला था।
- दाहिने हाथ के पिछले हिस्से पर 19×12 सेंटीमीटर की थी।
- दाएं हाथ पर कोहनी से कलाई तक 24×8 सेंटीमीटर की चोट पाई गई।
- दाएं हाथ पर 6×4 सेंटीमीटर की चोट।
- दाईं दाहिनी कोहनी के पीछे 12×6 सेंटीमीटर की चोट।
- बाएं हाथ की कलाई पर 3×2 सेंटीमीटर की चोट दर्ज की गई।
इन सभी को ‘कन्ट्यूजन’, यानी अंदरूनी चोट का निशान बताया गया है। साथ ही सभी चोटों के नीचे एकीमॉसिस, यानी खून जमने के निशान पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी चोटें मौत लगने से पहले की हैं। पहली, दूसरी और तीसरी चोट 5 से 7 दिन, जबकि चौथी, पांचवीं और छठी चोट करीब 1 दिन पुरानी है।
डॉ. सतीश कुमार के मुताबिक, ‘पैर पर तो PE या DVT के चलते चोट का निशान हो सकता है, लेकिन जिस तरह के निशान प्रतीक के शरीर पर हैं, उनका इस बीमारी से संबंध होना मुश्किल है। इस तरह के निशान किसी और मेडिकल कंडीशन, एलर्जी या दवाइयों के चलते भी हो सकते हैं।’
सवाल-7: प्रतीक की मौत पर किन सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले? जवाब: प्रतीक के शरीर पर चोट के निशान उनकी मौत के पहले के हैं। ये निशान कैसे पड़े, अभी इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। प्रतीक की मौत पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने पहले बयान में संकेत दिया था कि प्रतीक फाइनेंशियल स्थितियों के चलते तनाव में थे।
19 जनवरी को प्रतीक ने अचानक इंस्टाग्राम पोस्ट पर अपर्णा से तलाक की घोषणा करते हुए कहा था- अपर्णा ने मेरी जिंदगी नरक बना दी।’ हालांकि, 9 दिन बाद दोनों में सुलह हो गई थी। प्रतीक ने अपर्णा के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- ‘All is Good’, यानी सब अच्छा है।

ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग कई सवाल उठा रहे हैं….
- क्या तनाव के चलते प्रतीक ने कोई ऐसा जहर लेकर सुसाइड किया, जिससे उनके शरीर पर निशान पड़ गए?
- क्या प्रतीक को कोई जहर देकर हत्या की गई है? सपा के सीनियर नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि प्रतीक के शरीर पर चोट के निशान थे और शरीर में जहर की मात्रा थी। सामान्य मृत्यु पर पोस्टमार्टम नहीं होता है। संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के चलते उनका पोस्टमार्टम करवाया गया।
- जब गंभीर बीमारी के चलते प्रतीक इलाज पर थे, तो इस बीच अपर्णा यादव उनके साथ क्यों नहीं थीं?
- 13 मई की सुबह प्रतीक को दिक्कत होने पर सीधे हॉस्पिटल क्यों नहीं ले जाया गया? सिविल हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल सुपरिन्टेन्डेंट देवेंद्र पांडेय ने बताया कि सुबह 5:30 बजे यादव का ड्राइवर मदद के लिए अस्पताल पहुंचे। इसके बाद एक मेडिकल ऑफिसर को उनके घर भेजा गया। वो प्रतीक यादव को सुबह 5:55 बजे अस्पताल लेकर आए, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
- क्या प्रतीक के साथ किसी तरह की मारपीट हुई थी? दरअसल, कोई ब्लंट इंजरी, यानी गिरना, धक्का लगना आदि हो, तो शरीर में सूजन और खून का थक्का बनने की टेंडेंसी बढ़ जाती है। पोस्ट ट्रॉमेटिक, यानी चोट लगने के करीब एक हफ्ते बाद PE हो सकता है। अगर पेल्विस एरिया या पैरों के आसपास चोट लगी होती है, तो DVT भी ट्रिगर हो सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स में भी शरीर का रंग नीला पड़ने की बात दर्ज की गई है।
पूरे हार्ट और फेफड़ों के थ्रोम्बोएम्बोलिक मटेरियल, यानी थक्के वाले हिस्सों को आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा विसरा, यानी अंदरूनी अंगों के सैंपल भी सुरक्षित किए गए हैं, ताकि किसी जहर या केमिकल की पुष्टि की जा सके। सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने मांग की है कि हाई कोर्ट के किसी पूर्व जज से प्रतीक की मौत की जांच करवाई जाए।
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