Baby Burping Importance; How To Burp Newborn ? – Positions, Benefits

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12 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सवाल- मैं एक नई मां हूं और मेरा 2 महीने का बच्चा है। दूध पिलाने के बाद कई बार वह सो जाता है, तो समझ नहीं आता कि उसे हर बार डकार दिलाना जरूरी है या ऐसे ही सुला देना ठीक है?

लोग कहते हैं कि डकार न दिलाने से गैस, पेट दर्द या उल्टी की समस्या हो सकती है। इसका सही तरीका क्या है?

एक्सपर्ट: डॉ. बेजी जैसन, पीडियाट्रिशियन, MD, MRCPCH (मेंबरशिप ऑफ द रॉयल कॉलेज ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ)

जवाब- सबसे पहले तो आपको मां बनने की बधाई। एक नई मां के रूप में आपके मन में ऐसे सवाल आना स्वाभाविक हैं। इस समय आसपास के लोग तरह-तरह की सलाह देते हैं। इससे कन्फ्यूजन और बढ़ जाता है। इसलिए सही जानकारी हाेना जरूरी है।

‘शिशु को डकार दिलाना सही या गलत’, पेरेंटिंग से जुड़ा ये कॉमन सवाल बहुत से पेरेंट्स के मन में आता है। इसका सीधा जवाब है कि ज्यादातर मामलों में दूध पिलाने के बाद शिशु को डकार दिलाना जरूरी होता है। अब आइए इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं।

डकार और शिशु के हेल्थ के बीच कनेक्शन

दरअसल नवजात शिशुओं का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता है। वे सिर्फ मां के दूध पर निर्भर होते हैं। कई बार वे फीडिंग के दौरान दूध के साथ हवा भी निगल लेते हैं।

  • जब यह हवा बाहर नहीं निकलती तो पेट में प्रेशर बनाती है, जिससे असहजता हो सकती है। यही कारण है कि कई बार बच्चा फीडिंग के बाद रोता है।
  • डकार दिलाने से यह प्रेशर कम होता है और बच्चा तुरंत रिलैक्स महसूस करता है।
  • डकार शिशु के कम्फर्ट, पाचन और नींद तीनों से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

शिशु को डकार दिलाना क्यों जरूरी?

डकार दिलाने से पेट में जमा हवा बाहर निकल जाती है और शिशु को आराम महसूस होता है। नीचे ग्राफिक में शिशु को डकार दिलाने के सभी कारण समझिए-

डकार न दिलाने के संभावित रिस्क

डकार न दिलाने से पेट में गैस जमा हो सकती है। इससे शिशु को पेट फूलने, दर्द और चिड़चिड़ापन हो सकता है। कुछ मामलों में बच्चा दूध भी उलट सकता है या उसकी नींद बार-बार टूट सकती है। नीचे ग्राफिक में डकार न दिलाने के सभी संभावित हेल्थ रिस्क देखिए-

शिशु को डकार कैसे दिलाएं?

शिशु को डकार बहुत सावधानी से दिलाना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि शिशु को हमेशा सीधी पोजिशन में रखें, ताकि उसके पेट में फंसी हवा आसानी से बाहर निकल सके।

डकार दिलाते समय जल्दबाजी या जोर लगाने की जरूरत नहीं होती।

  • हल्के-हल्के थपथपाने या धीरे-धीरे रगड़ने से ही शिशु को आराम मिल जाता है।
  • हर शिशु का रिएक्शन अलग होता है। किसी को तुरंत डकार आ जाती है तो किसी को थोड़ा समय लगता है।
  • ध्यान रखें कि डकार दिलाते समय शिशु का सिर और गर्दन पूरी तरह सपोर्टेड हो, क्योंकि शिशुओं का कंट्रोल पूरी तरह विकसित नहीं होता।
  • अगर डकार दिलाते समय थोड़ा दूध बाहर आ जाए तो यह सामान्य है। इसलिए कंधे या गोद में कपड़ा रखना बेहतर है।
  • हालांकि ये जरूरी नहीं है कि हर बार डकार न दिलाने से समस्या पैदा ही हो।

नीचे ग्राफिक में डकार दिलाने के सुरक्षित तरीके दिए गए हैं। आप अपने शिशु की सुविधा के अनुसार इनमें से कोई भी तरीका अपना सकते हैं।

कितनी देर तक डकार दिलानी चाहिए?

आमतौर पर शिशु को डकार दिलाने के लिए 1-3 मिनट का समय पर्याप्त होता है। इतने समय में ज्यादातर शिशुओं के पेट में गई हवा बाहर निकल जाती है।

  • अगर इस दौरान डकार नहीं आती, तो घबराने की जरूरत नहीं है। हर बार डकार आना जरूरी नहीं होता।
  • कुछ शिशु कम हवा निगलते हैं, इसलिए उन्हें हर बार डकार की जरूरत नहीं पड़ती है।
  • ध्यान रखें कि अगर बच्चा कम्फर्ट महसूस कर रहा है या सो गया है तो उसे जबरदस्ती डकार दिलाने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर वह असहज दिखे डकार दिलाएं।

डकार दिलाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

डकार हमेशा सही तरीके और सावधानी के साथ दिलानी चाहिए। इस दौरान छोटी-सी गलती भी शिशु को असहज महसूस करा सकती है, क्योंकि नवजात शिशु का शरीर बेहद नाजुक होता है।

सबसे जरूरी है कि शिशु को हमेशा सुरक्षित और सपोर्टेड पोजिशन में रखें, ताकि उसकी गर्दन और सिर पर कोई दबाव न पड़े। डकार दिलाते समय बहुत हल्के हाथों का इस्तेमाल करें। जोर से थपथपाना या हिलाना नुकसानदायक हो सकता है। इस दौरान कुछ बातों का खास ख्याल रखें।

अंत में यही कहूंगी कि शिशु को डकार दिलाना बहुत जरूरी है, जो उसके पाचन, आराम और नींद से जुड़ा है। शिशु के संकेतों को समझना सबसे जरूरी है। अगर आप धैर्य और सही तरीके से यह प्रक्रिया अपनाते हैं, तो शिशु ज्यादा सहज और खुश रहेगा।

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