CJP Membership Scam; Cockroach Janta Party Join Fraud Prevention Methods

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6 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का बज बना हुआ है। साइबर ठग इसकी पॉपुलैरिटी का फायदा उठा रहे हैं। हाल ही में लुधियाना पुलिस ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर वीडियो जारी कर इस स्कैम के बारे में जानकारी दी है।

ठग CJP के नाम पर वॉट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए फर्जी मैसेज भेजते हैं। इनमें पार्टी की सदस्यता लेने, सिस्टम बदलने की मुहिम से जुड़ने और युवाओं के लिए बड़े अवसर के दावे किए जाते हैं।

मैसेज के साथ एक फिशिंग लिंक होता है। इस लिंक पर क्लिक करने से यूजर की पर्सनल डिटेल्स चोरी हो सकती है, मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इससे ठगी का रिस्क हो सकता है।

आज ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में हम CJP के नाम पर हो रहे स्कैम की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • कॉकरोच जनता पार्टी के नाम पर स्कैम कैसे हो रहा है?
  • इस तरह के स्कैम से बचने के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर स्कैम कैसे हो रहा है?

जवाब- साइबर ठग CJP के नाम पर फर्जी वॉट्सएप मैसेज और फिशिंग लिंक भेजते हैं। इनमें लोगों को सदस्यता लेने और बदलाव की मुहिम से जुड़ने का लालच दिया जाता है। ऐसे लिंक पर क्लिक करने और उसमें अपनी डिटेल भरने से साइबर ठगी का रिस्क हो सकता है। नीचे ग्राफिक से स्कैम का पूरा खेल समझिए-

सवाल- साइबर ठग लोगों को कैसे फंसा रहे हैं?

जवाब- साइबर ठग लोगों की भावनाओं, विचारों और उम्मीदों का फायदा उठाते हैं।

  • वे ऐसे मैसेज भेजते हैं, जो लोगों को किसी बड़े बदलाव या अभियान का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित करते हैं।
  • वे ‘सिस्टम बदलने’, ‘देशहित में जुड़ने’, ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने’ और ‘युवाओं के लिए बड़े अवसर’ जैसे मैसेज भेजते हैं। इससे लोगों में भरोसा पैदा हो जाता है।
  • भावनात्मक अपील और तुरंत एक्शन के दबाव में लोग बिना जांच-पड़ताल किए लिंक पर क्लिक कर देते हैं। इससे वे साइबर ठगों के जाल में फंस जाते हैं।

सवाल- फिशिंग लिंक पर क्लिक करने के क्या रिस्क हो सकते हैं?

जवाब- इससे पर्सनल डिटेल्स, बैंकिंग डिटेल्स और मोबाइल सिक्योरिटी खतरे में पड़ सकती है। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या सिर्फ लिंक पर क्लिक करने से पैसा कट सकता है?

जवाब- आमतौर पर लिंक पर क्लिक करने से पैसा नहीं कटता, लेकिन ठगी का रिस्क होता है।

  • कई फिशिंग लिंक यूजर को ऐसी वेबसाइट पर ले जाते हैं, जहां OTP, बैंक डिटेल्स, यूपीआई PIN या लॉगिन डिटेल्स मांगी जाती हैं। इसे भरने से ठगी हो सकती है।
  • कुछ मामलों में लिंक के जरिए मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इससे आर्थिक नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है।

सवाल- साइबर ठग इस स्कैम में किन लोगों को निशाना बना रहे हैं?

जवाब- ठग मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बना रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं और राजनीतिक या सामाजिक मुद्दों में रुचि रखते हैं। जैसे-

  • युवा, स्टूडेंट्स।
  • पॉलिटिकली एक्टिव लोग।
  • सोशल मीडिया यूजर्स।
  • वॉट्सएप ग्रुप के मेंबर्स।
  • वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटिजंस)।
  • जिन्हें बदलाव के अभियान से जुड़ने में रुचि है।
  • जो डिजिटली अवेयर नहीं हैं।

सवाल- कैसे पहचानें कि लिंक फर्जी है?

जवाब- फर्जी या फिशिंग लिंक के URL और डोमेन में अक्सर स्पेलिंग की गलतियां होती हैं। इसके अलावा और भी कई संकेत हैं, जिनसे फर्जी लिंक की पहचान की जा सकती है। इन्हें ग्राफिक में देखिए-

सवाल- इस तरह के स्कैम से बचने के लिए क्या करें?

जवाब- इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका ये है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने या पर्सनल डिटेल्स शेयर करने से पहले उसे वेरिफाई जरूर करें। स्कैम से बचने के सभी उपाय ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर गलती से लिंक पर क्लिक हो जाए तो क्या करें?

जवाब- ऐसे में घबराएं नहीं, तुरंत जरूरी एक्शन लें। जितनी जल्दी कार्रवाई करेंगे, नुकसान का रिस्क उतना ही कम होगा और रिकवरी की संभावना भी बढ़ेगी। सभी जरूरी एक्शन ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर बैंकिंग डिटेल्स शेयर हो गई हो तो क्या करें?

जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई करें। देरी करने पर साइबर ठग खाते से पैसे उड़ा सकते हैं। इसलिए तुरंत कुछ एक्शन लें-

  • बैंक हेल्पलाइन पर तुरंत कॉल करें।
  • डेबिट/क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कराएं।
  • UPI सर्विस अस्थायी रूप से बंद करवाएं।
  • नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के पासवर्ड बदलें।
  • खाते के ट्रांजैक्शन चेक करें। संदिग्ध ट्रांजैक्शन की तुरंत रिपोर्ट करें।
  • साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
  • जरूरत पड़ने पर नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।

सवाल- राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन के नाम पर आने वाले मैसेज को कैसे वेरिफाई करें?

जवाब- किसी भी मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसका वेरिफिकेशन जरूर करें। सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट या वॉट्सएप फॉरवर्ड मैसेज में दिए किसी लिंक पर क्लिक न करें।

  • संबंधित संगठन की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
  • वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट चेक करें।
  • वेबसाइट का URL और डोमेन ध्यान से चेक करें।
  • मैसेज में किए गए दावों को क्रॉस वेरिफाई करें।
  • अगर शक हो तो लिंक पर क्लिक करने से बचें।
  • किसी भी लिंक या मैसेज को बिना जांचे-परखे फॉरवर्ड न करें।

……………… ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- पत्रकार के साथ ठगी: वॉट्सएप हैक कर मांगे पैसे, दोस्त के नंबर से पैसे मांगने का मैसेज आए तो सावधान, करें ये काम

हाल ही में एक जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार ने फेसबुक पोस्ट में अपने साथ हुए एक स्कैम के बारे में बताया। पत्रकार के एक परिचित का वॉट्सएप अकाउंट हैक कर साइबर ठगों ने QR कोड के जरिए उनसे कई बार पैसे ट्रांसफर करवा लिए। आगे पढ़िए…

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