CJP Political Future; Cockroach Janta Party Protest Impact | Abhijeet Dipke

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कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर 7.30 बजे आ गए थे, लेकिन बाहर आने में डेढ़ घंटे से ज्यादा वक्त लगा। सुबह 9 बजे के बाद बाहर निकले। सीधे गाड़ी में बैठे और जंतर-मंतर पहुंच गए। यहां पार्टी

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5 अप्रैल, 2011 इसी जंतर-मंतर पर एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने आमरण अनशन से करप्शन के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। तब नारे लगे थे- मैं भी अन्ना। इस बार आंदोलन का मकसद एजुकेशन सिस्टम में बदलाव है। नारा है- मैं हूं कॉकरोच।

पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स हैं। जंतर-मंतर पर उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं आई, लेकिन पहली बार पार्टी जमीन पर दिखाई दी।

शुरुआत में जंतर-मंतर पर करीब एक हजार लोग ही पहुंचे थे। अनुमान है कि दोपहर 2 बजे तक ये करीब 2 हजार हो गए।

शुरुआत में जंतर-मंतर पर करीब एक हजार लोग ही पहुंचे थे। अनुमान है कि दोपहर 2 बजे तक ये करीब 2 हजार हो गए।

सवाल है कि पार्टी को प्रोटेस्ट से क्या हासिल हुआ…

1. मीम पार्टी का टैग हटा, पेपर लीक का मुद्दा दोबारा ट्रेंड में लाए

15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं।’

इसी से कॉकरोच जनता पार्टी ऑनलाइन मूवमेंट के तौर पर शुरू हुई। हर दिन लाखों लोग जुड़ने लगे। कहा गया कि पार्टी सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित है। 6 जून के प्रोटेस्ट से पार्टी ये साबित कर गई कि वो जमीन पर भी मौजूद है।

इस प्रोटेस्ट में हर उम्र के लोग शामिल हुए। देश के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग आए। पार्टी जमीन पर भले बहुत भीड़ नहीं जुटा पाई, लेकिन सोशल मीडिया पर NEET और पेपर लीक के मुद्दे को फिर से ट्रेंड करा दिया।

2. अभिजीत ही पार्टी का चेहरा, सबसे ज्यादा एक्टिव रहे

स्टेज पर सबसे ज्यादा अभिजीत दीपके ही एक्टिव दिखे। हालांकि चीफ स्पोक्सपर्सन सौरव दास और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी कुछ देर स्पीच दी। अभिजीत के टारगेट पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान रहे। उन्होंने मंच से शिक्षा मंत्री को रिजाइन करने का अल्टीमेटम दिया। ऐसा नहीं होने पर अगले शनिवार को दोबारा प्रोटेस्ट की बात कही।

30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले हैं। पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स कर रहे हैं।

30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले हैं। पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स कर रहे हैं।

3. अन्ना आंदोलन जैसी कोशिश, लेकिन उतने असरदार नहीं

सीनियर रिपोर्टर निखिल वाथ कहते हैं कि लोग इस प्रदर्शन में अन्ना आंदोलन की झलक ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि हालात में कुछ समानताएं हैं। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, NEET और CBSE एग्जाम में गड़बड़ी जैसे आरोप लग रहे हैं। अगले चुनाव में 3 साल बचे हैं। अन्ना आंदोलन के वक्त भी चुनाव में तीन साल बाकी थे। लोगों में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा था। फिर भी ये प्रोटेस्ट अन्ना आंदोलन जितना असरदार नहीं है।

आगे क्या होगा… निखिल कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट के दौरान कोई बड़ी घटना नहीं हुई। कुछ लोग प्रोटेस्ट का विरोध करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया ताकि टकराव न हो। प्रोटेस्ट में किसी भी तरह का ड्रामा नहीं हुआ, जिससे लोगों के बीच इसकी रिकॉल वैल्यू कम हो सकती है। अगर शनिवार को दोबारा प्रदर्शन होता है, तो और भीड़ जुटानी होगी, नहीं तो आंदोलन लोगों के जेहन से जल्दी ही उतर सकता है।’

पार्टी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

1. फॉलोअर्स को वोटर्स में बदलना

जंतर-मंतर की कम भीड़ ने साबित किया कि पार्टी को अभी सोशल मीडिया से निकलकर जमीनी स्तर पर ब्लॉक और जिला कमेटियां बनानी होंगी। पार्टी के पास पॉलिटिक्स का बिल्कुल अनुभव नहीं है। सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की ताकत तो है, लेकिन सवाल है कि अगर वे चुनाव में उतरते हैं तो क्या इसे वोट बैंक में बदल पाएंगे।

2. अन्ना आंदोलन जैसा मददगार कैडर नहीं

2011 के अन्ना आंदोलन की कामयाबी के पीछे अलग-अलग संगठनों का समर्थन था। कॉकरोच जनता पार्टी के पास कैडर नहीं है। उसका पूरा आधार क्लिक एक्टिविज्म पर टिका है। इंस्टाग्राम पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स होना डिजिटल उपलब्धि तो है, लेकिन इस वर्चुअल कैडर के पास न लीडर हैं और न ही बूथ मैनेजमेंट की कोई समझ।

3. सिंगल पॉइंट एजेंडा नहीं

कामयाब राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन की पहली शर्त सिंगल पॉइंट एजेंडा है। अन्ना आंदोलन का एक साफ मकसद था- लोकपाल बिल। इससे लोग जुड़ गए। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में आए लोगों में कोई मणिपुर की बात कर रहा था, कोई टैक्स और पानी के संकट की, तो कोई करप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर की। पार्टी को स्पष्ट राष्ट्रीय नीति और एजेंडा सामने रखना होगा।

प्रोटेस्ट में पहुंचे लोगों की बात हमने प्रोटेस्ट में आए लोगों से समझने की कोशिश की कि उन्हें इससे क्या उम्मीदें हैं। चेहरे पर कॉकरोच का मास्क लगाकर आए गोल्डी 30 साल के हैं। दिल्ली के राजौरी गार्डन में रहते हैं। आंदोलन में आने की वजह बताते हैं, ‘22 लाख बच्चे नीट का एग्जाम दे रहे थे, पेपर लीक हो गया, SSC में 50 लाख बच्चे एग्जाम दे रहे थे, CBSE की साइट कोलेप्स हो गई। सरकार कर क्या रही है।’

जंतर-मंतर पर पार्टी के समर्थक कॉकरोच का मास्क पहनकर आए। उनका कहना था कि चेहरा मायने नहीं रखता, पार्टी मायने रखती है।

जंतर-मंतर पर पार्टी के समर्थक कॉकरोच का मास्क पहनकर आए। उनका कहना था कि चेहरा मायने नहीं रखता, पार्टी मायने रखती है।

‘अनपढ़ हूं, लेकिन जानता हूं बच्चों को कॉकरोच नहीं बोलना चाहिए’

दिल्ली के तीमारपुर से आए 68 साल के बुजुर्ग बोले, ‘हमारे बच्चों के साथ बार-बार खिलवाड़ हो रहा है। इसका हमें भी दर्द होता है। आप उन्हें कीड़े-मकोड़े बोल रहे हो। ये बोलने का अधिकार किसने दिया। इसलिए जरूरी है कि हम जवाब दें। मैं अनपढ़ हूं, लेकिन जानता हूं कि बच्चों को कॉकरोच नहीं बोलना चाहिए।’

असम से आईं जून अभी दिल्ली में रहती हैं। वे कहती हैं, ‘नॉर्थ ईस्ट में मणिपुर जल रहा है। सरकार कुछ नहीं कर रही है। वहां के युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है। यहां भी भविष्य दांव पर है। कॉकरोच जनता पार्टी का अभी जमीन पर तो असर नहीं दिख रहा है, लेकिन जिस तरह ये सोशल मीडिया पर हैं, उससे लग रहा है कि बदलाव होगा।’

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प्रोटेस्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा, अगले शनिवार फिर जंतर-मंतर पर जुटने का ऐलान

NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा था कि मंत्री आज शाम 5 बजे तक इस्तीफा दें, नहीं तो पूरे देश में प्रदर्शन किया जाएगा। अगले शनिवार, यानी 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन करेंगे। पढ़ें पूरी खबर…



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