Thu, 08 Oct 20266:41 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 6:41 PM IST
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पटना सैटेलाइट सिटी भूमि मुआवजा विवाद: राकेश टिकैत ने बिहार सरकार पर साधा निशाना, 2013 के सर्किल रेट को बताया अस्वीकार्य

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पटना। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को पटना में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी सैटेलाइट सिटी परियोजना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि के मुआवजे का निर्धारण वर्ष 2013 के पुराने सर्किल रेट के आधार पर करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। टिकैत ने मांग की है कि सरकार किसानों को उनकी जमीन का उचित और वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा प्रदान करे, अन्यथा किसान समुदाय इस फैसले का पुरजोर विरोध करेगा।

बुधवार को पटना पहुंचने पर राकेश टिकैत ने स्थानीय सांसद सुधाकर सिंह के आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य रूप से पटना सैटेलाइट सिटी निर्माण योजना में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार द्वारा किसानों की जमीन लेने के लिए जिस दर का प्रस्ताव किया गया है, वह न केवल अपर्याप्त है बल्कि यह आज की आर्थिक स्थिति और भूमि के वास्तविक मूल्य से भी मेल नहीं खाती। टिकैत ने तर्क दिया कि पिछले एक दशक में भूमि की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और ऐसे में दस साल से अधिक पुराने सर्किल रेट को लागू करना किसानों के साथ अन्याय होगा।

किसान नेता ने अपनी बात रखते हुए यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी विकास कार्य के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत पर किसानों का शोषण सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट सिटी जैसी बड़ी परियोजनाएं राज्य के विकास के लिए आवश्यक हो सकती हैं, लेकिन इन परियोजनाओं की नींव किसानों की सहमति और उन्हें मिलने वाले न्यायोचित लाभ पर टिकी होनी चाहिए। यदि सरकार 2013 के दरों पर ही मुआवजा देने पर अड़ी रहती है, तो इससे प्रभावित किसान परिवारों की आजीविका और भविष्य गंभीर संकट में पड़ जाएगा। टिकैत ने चेतावनी दी कि अगर किसानों की मांगों को नहीं माना गया तो वे इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राकेश टिकैत ने सांसद सुधाकर सिंह की उपस्थिति में अपनी चिंताओं को व्यक्त किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पटना के आसपास सैटेलाइट सिटी विकसित करने की योजना को लेकर स्थानीय किसानों में पहले से ही असंतोष बना हुआ है। किसानों का कहना है कि सरकारी विभाग जिस रेट पर जमीन लेना चाहते हैं, उस रेट पर आज के समय में उसी क्षेत्र में जमीन खरीदना भी संभव नहीं है। इसलिए, मुआवजे की राशि इतनी होनी चाहिए कि विस्थापित होने वाले किसान कहीं और सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें या वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें। टिकैत ने इसी असंतोष को अपनी प्रेस वार्ता के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

उन्होंने सरकार से अपील की कि भूमि अधिग्रहण संबंधी सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी हों और किसानों को विश्वास में लिया जाए। टिकैत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता, विशेषकर किसानों की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि प्रशासन द्वारा सकारात्मक पहल नहीं की जाती है, तो भारतीय किसान यूनियन इस मुद्दे को लेकर आगामी दिनों में अपनी रणनीति तय करेगी। हालांकि, उन्होंने अभी किसी विशिष्ट आंदोलन की तिथि या स्वरूप की घोषणा नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका संगठन किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी अनुचित निर्णय को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा।

पटना सैटेलाइट सिटी परियोजना बिहार सरकार की शहरी विकास योजनाओं का एक अहम हिस्सा मानी जाती है, जिसका उद्देश्य राजधानी पटना पर बढ़ते दबाव को कम करना और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित करना है। लेकिन इस परियोजना के क्रियान्वयन में भूमि अधिग्रहण सबसे संवेदनशील चरण रहा है। राकेश टिकैत का बयान इस संवेदनशीलता को और अधिक रेखांकित करता है और यह दर्शाता है कि किसान संगठन अब केवल मौखिक आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। वे ठोस कार्रवाई और लिखित गारंटी चाहते हैं कि उनकी जमीन का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से किया जाएगा।

इस पूरे मामले में अब प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। देखना यह होगा कि क्या बिहार सरकार और संबंधित विभाग टिकैत द्वारा उठाए गए मुद्दों पर पुनर्विचार करते हैं या फिर अपने पूर्व निर्धारित मानकों पर ही कायम रहते हैं। फिलहाल, किसान नेता के इस बयान ने सैटेलाइट सिटी परियोजना से जुड़े भूमि विवाद को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना किसानों की संतुष्टि के इस परियोजना का सुचारू रूप से आगे बढ़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।