Thu, 08 Oct 20266:40 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 6:40 PM IST
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शहडोल: एकलव्य विद्यालय के 200 छात्र प्राचार्य की शिकायत लेकर कलेक्टर से मिलने 15 किमी पैदल निकले, प्रशासन ने रास्ते में भेजीं दो बसें

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शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में बुधवार को एकलव्य आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने एक अनोखा और चर्चित विरोध प्रदर्शन किया। जैतपुर क्षेत्र में स्थित बिरौड़ी एकलव्य आवासीय विद्यालय के लगभग 200 विद्यार्थी स्कूल के प्राचार्य से जुड़ी अपनी शिकायतों को लेकर सीधे जिला कलेक्टर से मिलने के लिए पैदल ही निकल पड़े। इन विद्यार्थियों ने बिना किसी हिचकिचाहट के करीब 15 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने का निर्णय लिया, ताकि वे अपनी समस्याओं को जिला प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी के समक्ष रख सकें। इस घटना ने पूरे जिले में प्रशासनिक हलकों और आम जनता के बीच गहरी चर्चा का विषय बना दिया है।

बुधवार सुबह जब विद्यालय के करीब 200 छात्र-छात्राएं अचानक स्कूल परिसर से बाहर निकले और कलेक्ट्रेट कार्यालय की ओर पैदल मार्च शुरू कर दिया, तो यह खबर तेजी से पूरे इलाके में फैल गई। विद्यार्थियों का स्पष्ट कहना था कि वे अपनी समस्याओं और शिकायतों को अब किसी मध्यस्थ के जरिए नहीं, बल्कि सीधे जिला कलेक्टर के सामने रखना चाहते हैं। छात्रों ने बताया कि उनकी शिकायतें मुख्य रूप से विद्यालय के प्राचार्य से संबंधित हैं। हालांकि, छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों या शिकायतों की सटीक और विस्तृत प्रकृति के बारे में अभी तक पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो पाई है। विद्यार्थियों ने इस बात पर जोर दिया कि उनके साथ जो भी समस्याएं हैं, उनका निराकरण केवल कलेक्टर स्तर पर ही संभव है, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

विद्यार्थियों के इस अचानक पैदल मार्च की सूचना जैसे ही जिला प्रशासन तक पहुंची, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। आदिवासी बहुल क्षेत्र में संचालित होने वाले एकलव्य विद्यालयों के छात्रों का इस प्रकार सड़क पर उतरना प्रशासन के लिए एक संवेदनशील मामला था। छोटे-छोटे बच्चों को 15 किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय करते देख उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की जाने लगी। मौसम और सड़क पर यातायात के लिहाज से भी विद्यार्थियों का इस तरह पैदल चलना जोखिम भरा माना जा रहा था।

स्थिति की गंभीरता और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की। प्रशासन ने विद्यार्थियों के मार्ग में ही दो बसें भेजने का निर्णय लिया। इन बसों को इसलिए भेजा गया ताकि थके हुए विद्यार्थियों को आगे की यात्रा पैदल न करनी पड़े और उन्हें सुरक्षित तरीके से कलेक्ट्रेट या संबंधित अधिकारियों के पास पहुंचाया जा सके। प्रशासन की इस पहल के बाद विद्यार्थियों को रास्ते में ही बसों में बैठाया गया। यह कदम प्रशासन द्वारा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टालने की दिशा में उठाया गया।

बिरौड़ी एकलव्य आवासीय विद्यालय शहडोल जिले के जैतपुर क्षेत्र में स्थित है। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरवी) केंद्र और राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जनजाति के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। ये विद्यालय विशेष रूप से दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं, जहां बच्चों को रहने, खाने और पढ़ने की सभी सुविधाएं एक ही परिसर में दी जाती हैं। ऐसे में, जब किसी एकलव्य विद्यालय के इतनी बड़ी संख्या में छात्र अपने ही प्राचार्य के खिलाफ शिकायत लेकर सड़क पर उतरते हैं, तो यह सीधे तौर पर विद्यालय के आंतरिक प्रबंधन और वहां के शैक्षणिक माहौल पर सवाल खड़े करता है।

इस पूरे मामले में अभी तक विद्यालय के प्राचार्य या स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्राचार्य पर छात्रों ने ठीक-ठीक क्या आरोप लगाए हैं और विद्यालय प्रबंधन इस पूरे घटनाक्रम को किस नजरिए से देख रहा है। वहीं, जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय की ओर से भी इस मामले में अभी तक कोई औपचारिक और विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी अज्ञात है कि बसों से लाए गए विद्यार्थियों की शिकायतों पर कलेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की है या इस मामले की जांच के लिए किसी अन्य अधिकारी या समिति को नियुक्त किया गया है।

विद्यार्थियों के इस विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का मानना है कि यदि विद्यालय में छात्रों की शिकायतों के निवारण की उचित व्यवस्था होती, तो बच्चों को 15 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर के पास जाने की नौबत नहीं आती। छात्रों का यह कदम दर्शाता है कि उन्होंने पहले भी अपनी बात रखने का प्रयास किया होगा, लेकिन संभवतः उन्हें उचित समाधान नहीं मिल पाया। फिलहाल, पूरे शहडोल जिले की नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या जांच करता है और विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है। आदिवासी वर्ग के बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए प्रशासन से पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।