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Thu, Oct 8, 2026Updated 6:40 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र में राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने उठाया वित्तीय बोझ का मुद्दा: विकासशील देशों पर बढ़ रहे दबाव को लेकर जताई चिंता, सदस्य देशों से समय पर अंशदान देने की अपील

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न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित बजटीय समिति की बैठक में भारत ने सदस्य देशों के अंशदान और विकासशील राष्ट्रों पर पड़ रहे वित्तीय बोझ का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने संयुक्त राष्ट्र की बजटीय समिति में भारत का पक्ष रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि सभी सदस्य देशों को अपने निर्धारित अंशदान का भुगतान समय पर करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में भारत जैसे विकासशील देशों पर संयुक्त राष्ट्र के वित्तीय भार का असमान अनुपात में दबाव बढ़ रहा है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से हस्तक्षेप किया। उनके द्वारा उठाया गया यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिरता और इसके संचालन के लिए अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है। गुर्जर ने समिति के सदस्यों के समक्ष यह तथ्य रखा कि संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट और शांति अभियानों के वित्तपोषण के लिए सदस्य देशों का समय पर योगदान देना संगठन की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। जब बड़े या सक्षम देश अपने भुगतान में देरी करते हैं या बकाया रखते हैं, तो उसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव विकासशील देशों पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें अपनी सीमित संसाधनों के बावजूद संगठन की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय तनाव झेलना पड़ता है।

राज्यसभा सांसद ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि संयुक्त राष्ट्र का बजटीय ढांचा सभी सदस्य देशों की ‘भुगतान क्षमता’ (Capacity to Pay) के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा मूल्यांकन पैमाने में सुधार की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर उनका वास्तविक आर्थिक सामर्थ्य से अधिक बोझ न डाला जाए। भारत का यह रुख संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 19 और अन्य संबंधित वित्तीय नियमों के अनुरूप है, जो सदस्य देशों के बीच समानता और न्यायसंगत वितरण की वकालत करता है। गुर्जर ने स्पष्ट किया कि भारत संयुक्त राष्ट्र के बहुपक्षीय ढांचे के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अपने सभी वित्तीय दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करता रहा है, लेकिन साथ ही यह भी अपेक्षा करता है कि अन्य सदस्य देश भी अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करेंगे।

बैठक के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वर्तमान में कई जटिल वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें शांति स्थापना, सतत विकास लक्ष्य और मानवीय सहायया शामिल हैं। ऐसे में, यदि संगठन की वित्तीय नींव कमजोर होती है, तो इन महत्वपूर्ण कार्यों की प्रगति बाधित हो सकती है। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने इस संदर्भ में कहा कि वित्तीय संकट का समाधान केवल तकनीकी समायोजन से नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना से ही संभव है। उन्होंने विकासशील देशों की आवाज को मुखर करते हुए कहा कि ये देश वैश्विक शासन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए वित्तीय योगदान के निर्धारण में उनकी वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं और विकास संबंधी जरूरतों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

भारतीय प्रतिनिधि द्वारा उठाए गए इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र की बजटीय समिति में मौजूद अन्य विकासशील और विकसित देशों के प्रतिनिधियों ने भी ध्यान से सुना। यह हस्तक्षेप ऐसे समय में हुआ है जब संयुक्त राष्ट्र अपने भविष्य के बजट और सुधारों पर व्यापक चर्चा कर रहा है। भारत का यह स्पष्ट संदेश है कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता उसके वित्तीय स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। राज्यसभा सांसद गुर्जर ने अपने वक्तव्य के माध्यम से यह स्थापित करने का प्रयास किया कि वित्तीय अनुशासन एक सामूहिक दायित्व है और किसी एक वर्ग के देशों पर इसका असमान बोझ लादना दीर्घकालिक रूप से संगठन के हित में नहीं है।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र की पांचवीं समिति (प्रशासनिक और बजटीय) संगठन के बजट, कर्मचारियों और प्रशासनिक मामलों पर विचार-विमर्श करने वाली मुख्य समिति है। इस समिति में भारत द्वारा उठाया गया यह मुद्दा न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों को दर्शाता है, बल्कि यह ‘ग्लोबल साउथ’ की सामूहिक चिंताओं को भी मंच प्रदान करता है। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर का यह कथन कि ‘सदस्य देश समय पर पूरा अंशदान दें’, संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय तरलता बनाए रखने के लिए एक व्यावहारिक और तत्काल आवश्यक कदम है। भारत ने यह दोहराया है कि वह एक जिम्मेदार सदस्य राष्ट्र के रूप में संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाने की दिशा में रचनात्मक योगदान देता रहेगा, लेकिन इसके साथ ही वह एक अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ वित्तीय ढांचे की मांग को लेकर भी दृढ़ है।

इस बैठक में भारत के हस्तक्षेप से यह स्पष्ट होता है कि नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र सुधारों और वित्तीय प्रबंधन के मुद्दों पर सक्रिय और स्पष्ट रुख अपनाने के लिए तैयार है। विकासशील देशों पर बढ़ रहे वित्तीय बोझ की चिंजा व्यक्त करते हुए, भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग और समझदारी का आह्वान किया है ताकि संयुक्त राष्ट्र अपनी स्थापना के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर द्वारा न्यूयॉर्क में दिए गए इस बयान को भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और वैश्विक शासन में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है।