Thu, 08 Oct 20261:47 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 1:47 PM IST
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पंजाब मानहानि मामला: मजीठिया और खैहरा ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, एक्स-पार्टी अंतरिम रोक हटाने की मांग; 23 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

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चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से दायर किए गए मानहानि मामले में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दोनों नेताओं ने अपने खिलाफ लगी एक्स-पार्टी अंतरिम रोक (एकपक्षीय अस्थायी रोक) को हटाने की मांग करते हुए अदालत में अलग-अलग अर्जियां दायर की हैं। इस मामले में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) डॉ. प्रक्षित की अदालत ने तीनों अर्जियों पर संज्ञान लेते हुए याचिकाकर्ता पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि को समझें तो यह विवाद पंजाब के मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर द्वारा दायर की गई मानहानि की शिकायत से जुड़ा है। डॉ. गुरप्रीत कौर ने अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में शुरुआती चरण के दौरान अदालत ने वादी पक्ष की अपील पर एक्स-पार्टी अंतरिम रोक लगा दी थी। एक्स-पार्टी अंतरिम रोक का अर्थ यह होता है कि अदालत किसी एक पक्ष (वादी) की बात सुनकर, दूसरे पक्ष (प्रतिवादी) को बिना नोटिस दिए या उनकी उपस्थिति के बिना ही अस्थायी रूप से कोई आदेश पारित कर देती है। यही कारण है कि अब मजीठिया और खैहरा ने इस एकपक्षीय आदेश को चुनौती देने और इसे हटवाने के लिए अदालत में औपचारिक रूप से अर्जियां दायर की हैं।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सिविल जज (जूनियर डिवीजन) डॉ. प्रक्षित की अदालत ने दोनों नेताओं द्वारा दायर की गई अलग-अलग अर्जियों पर विचार किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत के समक्ष कुल तीन अर्जियां पेश की गईं, जिन पर एक साथ सुनवाई हुई। अदालत ने इन तीनों अर्जियों पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता पक्ष यानी डॉ. गुरप्रीत कौर के वकीलों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। इस नोटिस के माध्यम से याचिकाकर्ता पक्ष से जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष की अर्जियों पर वादी पक्ष का रुख जानने के बाद ही आगे का फैसला सुरक्षित रखने का संकेत दिया है और इस प्रक्रिया के लिए 23 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।

बिक्रम सिंह मजीठिया पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल के एक प्रमुख चेहरे माने जाते हैं। वे पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और पार्टी के भीतर उनका खासा प्रभाव है। वहीं, सुखपाल सिंह खैहरा भी पंजाब की राजनीति में एक सक्रिय विधायक के रूप में जाने जाते हैं। इन दोनों नेताओं के खिलाफ राज्य के मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा मानहानि का मामला दर्ज कराया जाना पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। दोनों नेताओं ने अब अदालत का रुख करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वे इस एक्स-पार्टी अंतरिम रोक के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखेंगे।

कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो मानहानि के मामलों में एक्स-पार्टी अंतरिम रोक लगना एक संवेदनशील विषय होता है। जब प्रतिवादी पक्ष को इस तरह की एकपक्षीय रोक के खिलाफ अदालत में अर्जी दायर करता है, तो अदालत का पहला कदम वादी पक्ष को नोटिस जारी करके उनका जवाब मांगना होता है। वर्तमान मामले में भी सिविल जज डॉ. प्रक्षित की अदालत ने ठीक यही प्रक्रिया अपनाई है। अब 23 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी कि उन्होंने यह मानहानि का मुकदमा किन आधारों पर दायर किया है और एक्स-पार्टी अंतरिम रोक को क्यों बरकरार रखा जाना चाहिए।

इस मामले की सुनवाई जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, पंजाब की राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा और तेज होने की संभावना है। मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े इस मानहानि मामले में विपक्षी नेताओं का सीधे तौर पर शामिल होना इसे एक हाई-प्रोफाइल कानूनी विवाद बनाता है। फिलहाल, सभी निगाहें 23 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जिसमें यह तय होगा कि अदालत याचिकाकर्ता पक्ष के जवाब के बाद एक्स-पार्टी अंतरिम रोक को लेकर क्या रुख अपनाती है। अदालत ने अभी तक इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है और यह पूरी प्रक्रिया कानूनी दायरे में ही चल रही है।