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Thu, Oct 8, 2026Updated 12:55 PM IST
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सिंधिया राजघराने की अरबों की संपत्ति का समझौता फिर अटका: ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी प्रतिमा राणा ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के प्रमुख और ऐतिहासिक सिंधिया राजघराने की अरबों रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गया है। यह मामला अब न्यायालय में पहुंच चुका है और इस पर सुनवाई का दौर चल रहा है। सिंधिया परिवार की वरिष्ठ सदस्या प्रतिमा देवी (प्रतिमा राणा) की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है और बिना उनकी वास्तविक सहमति के उनसे समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करा लिए गए हैं। इस पूरे विवाद ने सिंधिया राजपरिवार की आंतरिक कानूनी लड़ाई को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है।

जानकारी के अनुसार, सिंधिया राजघराने की पुश्तैनी और अर्जित संपत्ति का बंटवारा दशकों से एक पेचीदा मुद्दा रहा है। परिवार के सदस्यों के बीच इस विशाल संपत्ति के बंटवारे को लेकर समय-समय पर बातचीत होती रही है। हाल ही में सभी पक्षों की आपसी सहमति से एक समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य इस पुराने विवाद को हमेशा के लिए खत्म करना और संपत्ति का शांतिपूर्ण तरीके से बंटवारा सुनिश्चित करना था। हालांकि, जब यह मामला कानूनी रूप से अंतिम चरण में पहुंचने वाला था, तभी प्रतिमा देवी की ओर से इस समझौते पर सवाल खड़े कर दिए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया ठप हो गई है।

केंद्रीय मंत्री और सिंधिया राजघराने के प्रमुख सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी प्रतिमा राणा (प्रतिमा देवी) ने इस मामले में अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रतिमा देवी ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि उनके साथ छल किया गया है। उनका कहना है कि समझौता प्रस्ताव पर जो भी हस्ताक्षर किए गए हैं, वे उनकी पूर्ण जानकारी और स्वेच्छा से नहीं हुए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें गुमराह किया गया और धोखाधड़ी के जरिए उनसे इस राजीनामे पर दस्तखत कराए गए। प्रतिमा देवी ने अपनी बड़ी बुआओं और परिवार के अन्य संबंधित सदस्यों पर भी निशाना साधा है और कहा है कि इस पूरे प्रकरण में उनके अधिकारों की अनदेखी की गई है।

प्रतिमा देवी द्वारा लगाए गए इन आरोपों के बाद यह मामला सीधे तौर पर न्यायालय के संज्ञान में आ गया है। सूत्रों के अनुसार, न्यायालय में इस संपत्ति विवाद और समझौता प्रस्ताव की वैधता को लेकर सुनवाई चल रही है। प्रतिमा देवी के वकीलों की ओर से न्यायालय के समक्ष यह तर्क रखा गया है कि यदि किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर धोखाधड़ी, दबाव या गलत तथ्यों के आधार पर कराए गए हों, तो भारतीय कानून के तहत वह दस्तावेज शून्य (वॉइड) माना जाता है। ऐसे में इस राजीनामे को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। न्यायालय अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर यह तय करेगा कि क्या यह समझौता प्रस्ताव वास्तव में आपसी सहमति से हुआ था या इसमें कोई धोखाधड़ी हुई है।

सिंधिया राजघराना भारत के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक राजपरिवारों में से एक है। ग्वालियर की रियासत से जुड़े इस परिवार की संपत्ति में महल, ट्रस्ट, व्यावसायिक भवन, कृषि भूमि और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनका कुल मूल्य अरबों रुपये में आंका जाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया के निधन के बाद परिवार की संपत्ति को लेकर बंटवारे की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हो गई थी। इसके बाद से ही परिवार के विभिन्न गुटों और सदस्यों के बीच संपत्ति के हिस्से को लेकर कानूनी और पारिवारिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई।

इस विवाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी मां माधवीराजे सिंधिया, बहन चित्रांगदा राजे सिंधिया और परिवार की अन्य वरिष्ठ महिला सदस्य जैसे वसुंधरा राजे सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया के नाम भी प्रमुखता से जुड़े रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में प्रतिमा राणा द्वारा लगाए गए आरोप मुख्य रूप से समझौता प्रस्ताव की प्रक्रिया और उसमें शामिल कुछ विशिष्ट सदस्यों (बुआओं) पर केंद्रित हैं। प्रतिमा देवी का कहना है कि सहमति के बिना कराए गए ये हस्ताक्षर उनके पैतृक अधिकारों का हनन करते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब सिंधिया परिवार की संपत्ति को लेकर कोई विवाद सामने आया हो। अतीत में भी कई बार इस तरह की कानूनी खींचतान देखी गई है, लेकिन हर बार आपसी बातचीत या न्यायालयीन प्रक्रिया के जरिए इसे सुलझाने का प्रयास किया गया है। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजघरानों की संपत्ति का बंटवारा कितना जटिल और संवेदनशील मामला होता है। जब तक न्यायालय इस मामले में अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक यह समझौता प्रस्ताव कानूनी रूप से अटका रहेगा।

फिलहाल, सिंधिया परिवार के अन्य सदस्यों की ओर से प्रतिमा देवी के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि परिवार के अन्य सदस्य इस विवाद को न्यायालय के बाहर सुलझाने का कोई नया प्रयास करेंगे या पूरी प्रक्रिया कानूनी लड़ाई के जरिए ही आगे बढ़ेगी। वंदे भारत न्यूज़ की ओर से इस मामले में सभी पक्षों के रुख को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है और न्यायालय में चल रही सुनवाई के अंतिम परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।