Thu, 08 Oct 202612:50 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 12:50 PM IST
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सिंगरौली: बीएड अंकसूची में 100 अंक बढ़ाकर किया गया था अतिथि शिक्षक का फर्जी चयन, एक महीने बाद माड़ा स्कूल के प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह निलंबित

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वन्दे भारत न्यूज़, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अतिथि शिक्षक की भर्ती प्रक्रिया में सामने आए गंभीर फर्जीवाड़े के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए माड़ा स्थित स्कूल के प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह को बुधवार को निलंबित कर दिया है। यह मामला बीएड की अंकसूची में छेड़छाड़ कर एक सौ अंक बढ़ाने और उसी आधार पर अतिथि शिक्षक की नियुक्ति करने से जुड़ा हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिंगरौली जिले में अतिथि शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान आरोप है कि एक उम्मीदवार की बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की अंकसूची में भारी हेराफेरी की गई। मूल दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करते हुए अंकसूची में एक सौ अंक अतिरिक्त रूप से जोड़ दिए गए। इन्हीं बढ़ाए हुए अंकों के आधार पर संबंधित उम्मीदवार को मेरिट लिस्ट में ऊंचा स्थान दिलवाकर अतिथि शिक्षक के पद पर नियुक्ति प्रदान कर दी गई। यह धांधली सामने आने के बाद शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया था।

इस पूरे प्रकरण में माड़ा स्कूल के प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह की भूमिका संदिग्ध पाई गई। उन पर अतिथि शिक्षक चयन प्रक्रिया में हुई इस धांधली की जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा विभाग ने बुधवार को उन्हें उनके पद से निलंबित कर दिया है। हालांकि, यह कार्रवाई फर्जीवाड़ा सामने आने के लगभग एक महीने बाद की गई है, जिसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि विभाग ने त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं की और एक महीने का समय क्यों लगा।

अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए की जाती है। इसमें उम्मीदवारों का चयन उनकी शैक्षणिक योग्यता और प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की गई मेरिट सूची के अनुसार होता है। बीएड की अंकसूची में एक सौ अंक का इजाफा किसी भी उम्मीदवार की रैंकिंग को पूरी तरह से बदल सकता है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचता है और अयोग्य व्यक्ति को सरकारी पद पर बैठने का मौका मिल जाता है। ऐसे में यह फर्जीवाड़ा केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और गुणवत्ता से सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है।

सिंगरौली जिला मध्य प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक और खनन क्षेत्र है, जहां पहले से ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत बताई जाती रही है। ऐसे में स्कूलों में होने वाली नियुक्तियों में इस तरह की धांधली सामने आना स्थानीय अभिभावकों और समाज के लिए चिंता का विषय है। फर्जी तरीके से नियुक्त किए गए शिक्षक यदि बच्चों को पढ़ाते हैं, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य और उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ता है।

शिक्षा विभाग द्वारा प्रभारी प्राचार्य रामलल्लू शाह के निलंबन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। क्या केवल प्राचार्य तक यह जिम्मेदारी सीमित रहेगी, या फिर जिस उम्मीदवार की अंकसूची में छेड़छाड़ की गई और जिसे फर्जी तरीके से नियुक्ति दी गई, उसके खिलाफ भी पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसके अलावा, इस बात की भी जांच होना आवश्यक है कि क्या इस स्कूल या जिले के अन्य स्कूलों में भी ऐसी ही किसी धांधली को अंजाम दिया गया है।

बता दें कि अतिथि शिक्षक भर्ती घोटालों और अंकसूची में छेड़छाड़ के मामले मध्य प्रदेश में समय-समय पर सामने आते रहे हैं। सरकार और शिक्षा विभाग ने इन पर अंकुश लगाने के लिए कई बार दिशा-निर्देश जारी किए हैं और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को कड़ा करने की बात कही है। लेकिन सिंगरौली के माड़ा स्कूल में हुआ यह ताजा मामला यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर अभी भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है और कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी से नहीं कर रहे हैं।

प्रभारी प्राचार्य के निलंबन की पुष्टि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने की है। विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, निलंबित प्राचार्य रामलल्लू शाह के खिलाफ आगे क्या विभागीय जांच या कानूनी कार्रवाई होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। वहीं, फर्जी नियुक्ति पाकर स्कूल में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षक की सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया पर भी विभाग की नजर है।

इस पूरे मामले ने सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर से सवालिया निशान लगा दिया है। एक महीने की देरी से हुई कार्रवाई ने प्रशासनिक सुस्ती को भी उजागर किया है। स्थानीय स्तर पर लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसे मामलों में केवल निलंबन से काम नहीं चलेगा, बल्कि फर्जीवाड़े को अंजाम देने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने की हिम्मत न कर सके। वन्दे भारत न्यूज़ इस मामले की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है।